Mark Zuckerberg apologizes: दिग्गज अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी Meta के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार के साथ हालिया बातचीत के दौरान कंपनी के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM), डीपफेक कंटेंट और कामकाज में कमियों को लेकर खेद जताया है। यह जानकारी हमारे सहयोगी Moneycontrol को सूत्रों ने दी है।
सूत्रों के मुताबिक, जुकरबर्ग ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, डीपफेक कंटेंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गवर्नेंस में नाकामियों के लिए माफी मांगी है। रिपोर्ट के अनुसार, जुकरबर्ग ने इन घटनाओं पर अफसोस व्यक्त करते हुए स्वीकार किया कि हानिकारक और आपत्तिजनक कंटेंट से निपटने में Meta से कुछ कमियां रह गई थीं।
मेटा ने यह माना है कि कुछ खास तरह की सामग्री को बढ़ावा देने के लिए काफी धन दिया गया। अमेरिकी कंपनी ने इन गलतियों पर खेद जताया और माफी मांगी।सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार ने मेटा से कहा है कि वह 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) की परिभाषा में नहीं आती है, क्योंकि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही तय करता है कि कंटेंट किसे मिलेगा।
MeitY अधिकारियों से हुई अहम बैठक
5 अगस्त को Meta के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान और कंपनी के अन्य वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में भारत सरकार ने Meta के कंटेंट मॉडरेशन, यूजर सुरक्षा और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए।
सरकार ने 'सेफ हार्बर' पर उठाए सवाल
सूत्रों के मुताबिक, सरकारी अधिकारियों ने Meta से कहा कि कंपनी केवल एक निष्क्रिय (Passive) इंटरमीडियरी की भूमिका नहीं निभाती। बल्कि यह तय करती है कि किस तरह का कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा और किन पोस्टों की सिफारिश (Recommendation) की जाएगी।
अधिकारियों का कहना था कि जब कोई प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम के जरिए कंटेंट के वितरण और प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या उसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) सुरक्षा का लाभ उसी रूप में मिलना चाहिए।
क्या है 'सेफ हार्बर' प्रावधान?
आईटी अधिनियम के तहत 'सेफ हार्बर' प्रावधान सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। बशर्ते वे कानून के अनुसार आवश्यक सावधानियां बरतें और अवैध सामग्री के खिलाफ निर्धारित नियमों का पालन करें।
हालांकि, यदि कोई प्लेटफॉर्म कंटेंट के चयन, प्रचार या वितरण में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो उसकी इस कानूनी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो सकते हैं। फिलहाल Meta या भारत सरकार की ओर से इस बैठक और कथित माफी को लेकर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए रिपोर्ट में सामने आई जानकारी सूत्रों के हवाले से बताई गई है।