चीन क्या शंघाई में संक्रमण के आंकड़े छिपा रहा है? अगर शंघाई में संक्रमितों की संख्या देखें तो इसी बात की आशंका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक शंघाई में 4 लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 17 लोगों की ही अब तक मौत हुई है। चीन इन आंकड़ों के जरिए दुनिया को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कैसे उसकी कोशिशें महामारी के दौरान लोगों की जिंदगी बचाने में सफर रही है। हालांकि चीन के क्या ये आंकड़े पूरी तरह सही है?
एक्सपर्ट की मानें तो चीन के ये आंकड़े कोरोना वायरस के प्रकोप की पूरी तस्वीर नहीं दिखाते हैं। दरअसल चीन कोरोना से जुड़ी मौतों को दर्ज करने में दुनिया के किसी भी देश से अधिक सख्ती बरतता है। अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है और वह कोरोना संक्रमित हो जाता है तो इलाज के दौरान उसकी मौत को चीन की सरकार अन्य बीमारियों के खाते में दर्ज करती है, न कि कोरोना के।
शंघाई चीन के सबसे बड़े शहरों में से एक है और इसे चीन की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है। शंघाई में करीब तीन हफ्तों से बेहद कड़ा लॉकडाउन लागू है। इसके चलते वहां दूसरी बीमारियों के इलाज और दवा की उपलब्धता सीमित हो गई है।
हाल ही में शंघाई में एक नर्स की अस्थमा अटैक से मौत हो गई क्योंकि उसे कोरोना को नियंत्रित करने के उपायों के तहत इलाज देने से मना कर दिया गया। एक 90 वर्षीय व्यक्ति की शुगर से जुड़ी दिक्कतों के चलते मौत हो गई क्योंकि उन्हें अस्पताल ने कोरोना मरीजों की अधिक भीड़ के चलते लौटा दिया था।
बुजुर्ग शख्स की 32 वर्षीय पोती ट्रैसी टैंग ने बताया, "अगर उन्हें तब समय से इलाज मिल गया होता, तो वे आज जिंदा होते।" शहर के निवासी और फ्रंट लाइन वर्कर के लिए भी लॉकडाउन को झेलना कठिन होता जा रहा है। एक हॉस्पिटल कर्मचारी की हाल में काफी लंबे समय तक अस्पातल में काम करने के चलते इंटरनल ब्लीडिंग शुरू हो गई और मौत हो गई।
यह कभी भी पता नहीं चल सकता कि चीन में ऐसी कितनी कहानियां हैं। चीन अतिरिक्त मौतों पर जानकारी जारी नहीं करता है, जिसे महामारी से कुल मौतों की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें कोरोना और इससे जुड़ी मौतों दोनों का जिक्र होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि महामारी के दौरान होने वाले नुकसान को ये आंकड़े अधिक सटीक तरीके से दिखाते हैं।