Sri Lanka Economic Crisis : श्रीलंका में जारी आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) की सभी दलों की अंतरिम सरकार बनाने की कोशिशें अभी तक बेनतीजा हैं। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने कहा कि कैबिनेट में बाकी 26 मेंबर्स की नियुक्ति में अभी और देरी होगी।
उधर, डॉक्टर ने संकट के मद्देनजर चेतावनी देते हुए कहा कि आर्थिक संकट से होने वाली मौतों का आंकड़ा, कोविड महामारी में जान गंवाने वालों से ज्यादा हो सकता है।
श्रीलंका की तमिल नेशनल अलायंस (TNA) ने कहा कि वह राष्ट्रपति राजपक्षे के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन देने के लिए तैयार है। एसजेबी और टीएनए की 225 सदस्यों वाली असेंबली में 64 सदस्य हैं। सहयोगियों के साथ 150 सदस्यों के समर्थन वाली राजपक्षे सरकार 42 सदस्यों का समर्थन गंवा चुकी है। संसद का सत्र 19 अप्रैल से शुरू होना है।
तमिलनाडु के तट पर पहुंचे 19 शरणार्थी
उधर, 19 श्रीलंकाई शरणार्थियों का एक समूह रविवार को तमिलनाडु के तट पर पहुंच गया। आधिकारिक सूत्रों ने कहा, इनमें सभी महिलाएं और बच्चे हैं। श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्रों से ये शरणार्थी दो अलग-अलग नौकाओं के जरिये रामेश्वरम के तट पर पहुंचे हैं। 22 मार्च से अभी तक 39 श्रीलंकाई तमिल भारत पहुंच चुके हैं।
आर्थिक संकट से हो सकती हैं ज्यादा मौतें
श्रीलंका मेडिकल एसोसिएशन (SLMA) ने कहा कि सभी अस्पतालों को अब आयातित मेडिकल टूल्स और अहम दवाएं नहीं मिल रही हैं। कई अस्पतालों में पिछले महीने से ही सामान्य सर्जरीज पर रोक लगा दी गई है, क्योंकि एनस्थेटिक्स फिलहाल खासी कम हैं। SLMA ने यह भी कहा कि इमरजेंसी इलाज भी बहुत जल्दी शुरू होना संभव नहीं है।
एसोसिएशन ने कहा कि हमारे सामने विकल्प चुनना खासा मुश्किल है। एसएलएमए ने कहा, “हमें यह फैसला लेना है कि किसे इलाज की जरूरत है और किसका इलाज नहीं होगा। अगर कुछ दिनों के भीतर आपूर्ति बहाल नहीं होती है, तो मरने वालों की संख्या कोविड से भी ज्यादा हो जाएगी।”
भारत ने भेजा पेट्रोल और डीजल
आर्थिक संकट के चलते सड़कों पर जारी भारी प्रदर्शन जारी है। इस वक़्त श्रीलंका में ईंधन की भारी कमी है, जिसे कम करने के लिए भारत बड़ी भूमिका निभा रहा है। भारत ने श्रीलंका को 36 हजार टन पेट्रोल और 40 हजार टन डीजल क्रेडिट लाइन के तौर पर श्रीलंका तक पहुंचाया है।