यूक्रेन पर हमला रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को महंगा पड़ सकता है। इस लड़ाई को शुरू हुए एक महीना हो गया है। लेकिन, इसके खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। कूटनीति स्तर पर अब तक हुई कोशिशें नाकाम रही हैं। ऐसे में कुछ जानकारों का मानना है कि पुतिन के रूस की सत्ता से बाहर होने पर इस युद्ध का अंत हो सकता है।
सरेंडर करने को तैयार नहीं यूक्रेनी सेना
रूसी सेना के सामने यूक्रेनी फौज घुटने टेकने को तैयार नहीं हैं। अब तक कई रूसी जनरल्स की मौत हो चुकी है। यूक्रेन पर हमला शुरू होने के बाद से रूस की सड़कों पर आम लोगों का विरोध जारी है। यह हालात तब है जब युद्ध की खबरें रूस में उस तरह से नहीं पहुंच रही, जिस तरह वह दुनिया के दूसरे देशों में पहुंच रही हैं।
रूस में रोजाना हो रहे विरोध-प्रदर्शन
रूस के एक एनजीओ के मुताबिक, यूक्रेन पर हमला शुरू होने के बाद से देशभर में करीब 15,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। पुतिन ने अपने नागरिकों को मुंह बंद रखने के उपाय किए हैं। पुतिन ने ऐसे कानून बनाए है, जिसके तहत सरकार के खिलाफ मुंह खोलने पर सजा हो सकती है। यूक्रेन पर हमले को रूसी लोग युद्ध नहीं कह सकते। इसे स्पेशल ऑपरेशन कहना होगा। इस कानून को तोड़ने पर 15 साल जेल की सजा हो सकती है।
रूस में विपक्ष की ताकत कमजोर
इन सबके बावजूद रूस में विपक्ष इतना मजबूत नहीं है कि वह पुतिन को सत्ता से हटने को मजबूर कर सके। बीते सालों में पुतिन ने विपक्ष को खत्म करने की पूरी कोशिश की है। विपक्ष के मुख्य नेता एलेक्सी नेवेलनी पिछले कई साल से जेल में बंद हैं। विपक्ष के कई नेता देश छोड़ने को मजबूर हैं।
सभी अधिकार एक ही व्यक्ति के पास
निरंकुश शासक को सत्ता से हटाने के लिए सिर्फ लोगों का विरोध पर्याप्त नहीं है। सत्ता से जुड़े ताकतवर लोगों का आगे आना इसके लिए जरूरी है। रूस में शासन की जो व्यवस्था है, उसमें सत्ता की चाबी और सभी अधिकार एक व्यक्ति के हाथ में होते हैं। ऐसे में बातचीत के रास्ते डिक्टेटर शायद ही सत्ता छोड़ते हैं।
लेकिन, रूस में कहानी कुछ अलग है। कोरोना की महामारी ने पुतिन और उनसे जुड़े सत्ता तंत्र को कमजोर किया है। माना जा रहा है कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंध और देशभर में चल रहे प्रदर्शनों के चलते सत्ता से जुड़े उन लोगों की सोच में बदलाव आ सकता है, जिनकी सोच उदारवादी रही है। रूस ने यूक्रेन पर जिस तरह से हमले किए हैं, उससे उन लोगों को भी चोट पहुंची है, जिनके सगेसबंधी यूक्रेन में हैं।
अमीरों के रुख में आ सकता है बदलाव
रूस में अमीर बहुत पावरफुल हैं। अनुमान है कि ऐसे अमीरों का समूह पुतिन के खिलाफ हो सकता है। इसकी वजह यह है कि रूस पर प्रतिबंध लगने के बाद से उन्हें बहुत नुकसान हो रहा है। यह चीज उन्हें परेशान कर रही है। ऐसे में वे पुतिन के खिलाफ कदम उठाने को तैयार हो सकते हैं।
अंत में सिक्योरिटी सर्विसेज को देश में तख्तापलट के बड़े स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। इस सर्विसेज में अब तक पुतिन की मजबूत पैठ रही है। लेकिन अब स्थिति बदल रही है।