वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने शनिवार को मंकीपॉक्स बीमारी को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया। WHO ने कहा कि मंकीपॉक्स के मामले 70 से अधिक देशों में फैल चुके हैं और यह 'सामान्य' बात नहीं है। साथ ही WHO ने इस बीमारी का टीका विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। WHO की इस घोषणा से मंकीपॉक्स बीमारी का इलाज खोजने की दिशा में निवेश बढ सकता है।
हालांकि WHO की ‘इमरजेंसी कमेटी’ के सदस्यों के बीच मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने को लेकर आम सहमति नहीं बन पाई थी। इसके बावजूद WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस ए घेब्रेयसस ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर यह ऐलान किया। यह पहला मौका है जब WHO चीफ ने इस तरह की कार्रवाई की है।
इससे पता चलता है कि WHO कोरोना वायरस के समय हुई गलती को नहीं दोहराना चाहता है। उस समय भी आम सहमति नहीं बन पाने के लिए कारण WHO ने काफी देर से कोरोना वायरस को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी और फिर महामारी घोषित किया था, जिसे लेकर उसकी काफी आलोचना भी हुई थी।
टेड्रोस ने कहा, "कम शब्दों में कहें तो, हम एक ऐसी महामारी का सामना कर रहे हैं जो संक्रमण के नए तरीकों के जरिए तेजी से दुनिया भर में फैल गई है और इस रोग के बारे में हमारे पास काफी कम जानकारी है। साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय हेल्थ रेगुलेशंस की सभी जरूरतों को पूरा करता है।" उन्होंने कहा, "मैं जानता हूं कि यह कोई आसाना या सीधी प्रक्रिया नहीं रही है और इसलिए इमरजेंसी कमेटी के सदस्यों के भिन्न-भिन्न विचार हैं।"
बता दें कि मंकीपॉक्स वायरस कई दशकों से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के कई देशों में मौजूद है और वहां इसके मामले सामने आते रहे हैं। हालांकि अफ्रीकी महाद्वीप के बाहर इतने बड़े स्तर पर इसका प्रकोप अब से पहले कभी नहीं देखा गया था।
इस बीमारी को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने का मतलब है कि मंकीपॉक्स का प्रकोप एक असमान्य घटना है और यह रोग कई अन्य देशों में भी फैल सकता है। साथ ही इसके रोकथाम के लिए वैश्विक स्तर पर एक संयुक्त प्रतिक्रिया की जरूरत है। इससे पहले, WHO ने कोविड-19, इबोला, जीका वायरस के लिए हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा की थी।