Twitter 2013 में स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी। इसके बाद से उसने एक-दो बार ही प्रॉफिट कमाया है। हालांकि, दुनिया में उसकी धाक काफी ज्यादा है। इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल दुनिया के सबसे पावरफुल लोग करते हैं। सवाल है कि क्या एलन मस्क (Elon Musk) के पास जाने के बाद यह ज्यादा प्रॉफिट कमाना शुरू करे देगी?
सोमवार को ट्विटर की डील के ऐलान से पहले ही मस्क कह चुके हैं कि उन्हें ट्विटर के इकोनॉमी की परवाह नहीं है। उन्होंने इस महीने की शुरुआत में TED2022 के कॉन्फ्रेंस में कहा था, "यह (ट्विटर की डील) पैसा कमाने के लिए नहीं है। यह सिर्फ मेरी समझ है कि सिविलाइजेशन के फ्यूचर के लिए ऐसा ट्रस्टेड पब्लिक प्लेटफॉर्म होना जरूरी है।"
ट्विटर को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुए करीब 9 साल हो रहे हैं। सिर्फ 2018 और 2019 को छोड़ इसने किसी साल प्रॉफिट नहीं कमाया है। इसका मतलब है कि इसने हर साल लॉस उठाया है। 2018 और 2019 में इसका प्रॉफिट एक अरब डॉलर से थोड़ा ही ज्यादा था।
मस्क ट्विटर के लिए 44 अरब डॉलर चुका रहे हैं। यह फेसबुक के 500 अरब डॉलर की वैल्यूएशन के आगे कुछ भी नहीं है। ट्विटर को सिर्फ एडवर्टाइजिंग से रेवेन्यू होती है न कि यूजर बेस से। इसका यूजर बेस इतना ज्यादा नहीं है कि उससे यह कमाई कर सके। पिछले साल के अंत में इसने 2.17 करोड़ ऐसे यूजर्स होने का दावा किया था, जिसे वह कमाई कर सकती है।
ट्विटर पहली तिमाही के वित्तीय नतीजें गुरुवार को पेश करेगी। वॉल स्ट्रीट का अनुमान है कि इसकी प्रति शेयर अर्निंग (EPS) 3 सेंट रहेगी, जबकि रेवेन्यू 1.2 अरब डॉलर होगा। भले ही ट्विटर का बिजनेस मस्क के लिए मायने नहीं रखता है, लेकिन वह कभी भी नुकसान उठान नहीं चाहेंगे। हालांकि, उन्होंने अभी तक यह नहीं बताया है कि वह कैसे ट्विटर का रेवेन्यू बढ़ाएंगे।
ट्विटर का हेडक्वार्टर सैन फ्रैंसिस्को है। दुनियाभर में इसके 7,500 एंप्लॉयीज हैं। 2020 के अंत तक दुनियाभर में इसके करीब 1,500 मॉडरेटर्स थे। दुनियाभर में इसके 6 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। सिर्फ इंडिया में इसके 2 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं। इसके सबसे ज्यादा यूजर्स अमेरिका में है। जापान दूसरे नंबर पर है। इंडिया तीसरे नंबर पर है।