मार्क जकरबर्ग का दावा- 5 साल में हर किसी के पास होगा अपना AI Agent, क्या है ये जो आया तो आपका जीवन बदल देगा?
Mark Zuckerberg: अब तो ऐसा माना जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अगला बड़ा बदलाव सिर्फ ज्यादा समझदार चैटबॉट्स तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आने वाले समय में हर व्यक्ति का अपना पर्सनल AI एजेंट होगा। मेटा के CEO मार्क जकरबर्ग का मानना है कि अगले पांच वर्षों के भीतर दुनिया भर में अरबों लोगों के पास अपने व्यक्तिगत AI एजेंट होंगे
Mark Zuckerberg: मेटा के CEO मार्क जकरबर्ग ने मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में जल्द बड़ा बदलाव दिखेगा
Mark Zuckerberg: इस समय पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बहस छिड़ी हुई है। ये टेक्नोलॉजिकल रिवॉल्यूशन बड़ी इकॉनमी को संवार रहा है तो कई जगह राजनीति से लेकर अर्थव्यवस्था को इसकी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। AI की स्पीड को बढ़ाते हुए कई बड़ी कंपनियां लगातार छंटनी कर रही हैं, मैनपॉवर कम कर रही हैं। AI की ताकत किस ओर करवट लेगी, रोजाना नए अंदाजे और आकलन किए जा रहे हैं।
अब तो ऐसा माना जा रहा है कि AI की दुनिया में अगला बड़ा बदलाव सिर्फ ज्यादा समझदार चैटबॉट्स तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आने वाले समय में हर व्यक्ति का अपना पर्सनल AI एजेंट होगा। मेटा के CEO मार्क जकरबर्ग का मानना है कि अगले पांच वर्षों के भीतर दुनिया भर में अरबों लोगों के पास अपने व्यक्तिगत AI एजेंट होंगे। ये एआई एजेंट 24 घंटे बिना थके उनके लिए काम करेंगे।
मेटा के हालिया अर्निंग्स कॉल के दौरान जकरबर्ग ने यह बड़ी भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा कि टेक कंपनियां एआई पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं और आने वाले वर्षों में ये एआई एजेंट रेवेन्यू लाइंस जेनरेट करने का मेन आधार बनेंगे।
मार्क जकरबर्ग ने अर्निंग्स कॉल में क्या कहा?
मार्क जकरबर्ग ने फ्यूचर में इस टेक्नोलॉजी की एक रूपरेखा पेश की है। मार्क ने कहा कि 'मुझे लगता है कि इसकी संभावना बेहद कम है कि अगले पांच वर्षों में आपके पास ऐसा पर्सनल एआई एजेंट न हो, जो आपके लक्ष्यों को समझता हो और उन्हें पूरा करने के लिए 24/7 आपकी ओर से काम न कर रहा हो।' उन्होंने आगे कहा कि ये एआई एजेंट्स आने वाले सालों में कंपनियों के नए प्रॉडक्ट्स और कमाई का सबसे बड़ा जरिया बनेंगे। मेटा भी अपने फ्री कैश फ्लो में आई गिरावट के बावजूद एआई टेक्नोलॉजी को डेवलप करने में अरबों डॉलर का भारी निवेश कर रही है।
क्या होता है AI Agent और यह सामान्य एआई चैटबॉट से कैसे अलग है?
ट्रेडिशनल एआई चैटबॉट्स (जैसे ChatGPT या अन्य सामान्य एआई) सिर्फ तभी जवाब देते हैं जब यूजर उनसे कोई सवाल पूछता है या प्रॉम्प्ट देता है। इसके उलट एआई एजेंट को यूजर की तरफ से खुद फैसले लेने और काम करने के लिए डिजाइन किया जाता है।
AI एजेंट में क्या खास होता है?
1 - ये इंडिपेंडटली काम करता है। सिर्फ सवालों के जवाब नहीं देता बल्कि वो काम भी करता है जिसमें इंसानी दखल बिना इंसानी दखल के काम पूरा कर सकता है।
2 - ये कठिन काम करने में भी माहिर होता है। मीटिंग शेड्यूल करना, ट्रैवल टिकट और होटल बुक करना, ईमेल्स ऑर्गनाइज करना, मार्केट में प्रॉडक्ट्स की तुलना करना और कई जटिल असाइनमेंट पूरे करने के लिए दूसरे एआई सिस्टम के साथ तालमेल बिठाने का काम इसके जरिए आसान हो जाता है।
3- बिना थके 24/7 काम करता है। जब यूजर ऑफलाइन होता है या सो रहा होता है, तब भी यह एजेंट यूजर की पसंद और लक्ष्यों को ध्यान में रखकर बैकग्राउंड में काम करता रहता है।
क्या सच होगी जकरबर्ग की भविष्यवाणी?
AI क्षेत्र के कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई एजेंट्स आने वाले समय में हमारी रूटीन और रोजमर्रा की टेक्नोलॉजी का एक अहम हिस्सा बनने जा रहे हैं। मेटा के अलावा गूगल, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट और एंथ्रोपिक जैसी दिग्गज कंपनियां पहले से ही ऐसे सिस्टम बना रही हैं जो कम से कम इंसानी इनपुट के साथ जटिल से जटिल काम कर सकें। वैसे अगले 5 साल के भीतर अरबों लोगों तक पर्सनल एआई एजेंट पहुंचने के जकरबर्ग के दावे पर अभी अनिश्चितता और कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा एआई सिस्टम अभी भी गलतियां करते हैं और कई चरणों में होने वाले जटिल काम सटीकता से पूरा करने में अभी भी दिक्कतें देखी जा रही हैं। एआई एजेंट को प्रभावी ढंग से काम करने के लिए यूजर के प्राइवेट डेटा जैसे- ईमेल, कैलेंडर, वित्तीय जानकारी और निजी दस्तावेजों तक पहुंच की जरूरत होगी। इससे प्राइवेसी ब्रीच होने का बड़ा खतरा बना रहता है।
इन एजेंट्स को चलाने और प्रोसेस करने के लिए भारी कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है। ऐसे में इन्हें बनाना और चालू रखना बेहद महंगा सौदा है। इसके अलावा दुनिया भर की सरकारें और रेग्युलेटरी अथॉरिटी अभी भी हाई एंड एआई टेक्नोलॉजी के लिए नियम व नीतियां बनाने पर काम कर रही हैं। ऐसे में इन्हें लेकर भविष्य की तस्वीर अभी काफी कुछ हद तक साफ होनी बाकी है।