मक्का पर ड्रोन हमला किसने किया? दुनिया को याद आया 47 साल पुराना भयानक मंजर
सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस ने 15 सितंबर की शाम मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को मार गिराया। सऊदी के मुताबिक यह ड्रोन हूती विद्रोहियों ने लॉन्च किया था और वह मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने इस आरोप को खारिज कर दिया है। किसने किया ड्रोन हमला पढ़ें पूरी खबर
पवित्र शहर मक्का पर 15 सितंबर 2026 की शाम ड्रोन हमले की घटना हुई थी। हालांकि साउदी एयर डिफेंस ने वक्त रहते इस ड्रोन को मार गिराया। लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर ये ड्रोन अटैक किसने किया। क्योंकि सऊदी अरब के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम उसकी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को मार गिराया। सऊदी का कहना है कि यह ड्रोन हूती विद्रोहियों ने भेजा था और यह मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था। तो वहीं अब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के इस आरोप को खारिज कर दिया है। हूतियों ने कहा है कि उन्होंने मक्का या किसी भी दूसरे पवित्र स्थल को निशाना नहीं बनाया।
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है अगर हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के लिए यह ड्रोन नहीं भेजा, तो फिर यह ड्रोन किसका था? फिलहाल इस सवाल का कोई पुख्ता जवाब तो सामने नहीं आया है लेकिन सऊदी अरब की तरफ से जो दावे किये जा रहो हैं वो चौंकाने वाले हैं
सऊदी के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्स ने 15 सितंबर को शाम करीब 6:50 मिनट पर मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। सऊदी पक्ष का कहना है कि ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। ड्रोन का मलबा शहर के दक्षिण में आकर गिरा।
मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कोशिश
सऊदी अरब ने इसे मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया है। गठबंधन के प्रवक्ता ने जुलाई 2017 में मक्का की दिशा में दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल का भी हवाला दिया लेकिन इस बार मामले थोड़ा अलग है, मौजूदा घटना में हथियार के तौर पर ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जा रहा है। सऊदी पक्ष ने कहा है कि दो पवित्र मस्जिदों और जायरीनों की सुरक्षा उसके लिए रेड लाइन है। सऊदी की तरफ से आगो कहा गया कि आगे किसी ऐसे हमले को रोकने के लिए जरूरी और कड़े कदम उठाए जाएंगे
हूती विद्रोहियों ने आरोपों को बताया झूठ
सऊदी पक्ष के इस दावे के तुरंत बाद हूती विद्रोहियों की ओर से इसका खंडन किया गया। हूती सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य हेजाम अल-असद ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि मक्का या किसी अन्य पवित्र स्थल को निशाना बनाने की बात गलत है। यही वजह है कि घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे बिल्कुल अलग हैं। सऊदी अरब कह रहा है कि ड्रोन हूतियों की ओर से ही लॉन्च किया गया था, जबकि हूती इस बात से इनकार कर रहे हैं।
सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, मक्का और वहां मौजूद जायरीनों (तीर्थयात्री) की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। इस घटना की संवेदनशीलता इसलिए भी अधिक है क्योंकि मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है और यहां दुनिया भर से मुसलमान उमराह और हज के लिए पहुंचते हैं।
दुनिया को याद आया 47 साल पुराना भयानक मंजर
15 सितंबर 2026 को मक्का के पास ड्रोन हमले की कोशिश ने 1979 की उस घटना की यादें ताजा कर दीं, जब करीब 200 हथियारबंद लोगों ने ग्रैंड मस्जिद पर कब्जा कर हजारों लोगों को बंधक बना लिया था। इस कब्जे की अगुवाई धार्मिक उपदेशक जुहैमान अल-उतैबी ने की थी और सुरक्षा बलों को इसे खत्म करने में करीब दो हफ्ते लग गए थे।
मौजूदा घटना में सऊदी अरब के मुताबिक एयर डिफेंस ने शाम करीब 6:50 बजे ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने दावा किया कि ड्रोन हूतियों ने लॉन्च किया था। इसके बाद मक्का में सुरक्षा अलर्ट जारी हुआ, जिसे कुछ मिनट बाद हटा लिया गया। सऊदी के मुताबिक 2017 के बाद यह पहली ऐसी चेतावनी थी। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने सऊदी के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यमन की ओर से मक्का या किसी अन्य पवित्र स्थल को कोई खतरा नहीं है।
1979 में क्या हुआ था?
20 नवंबर 1979 को करीब 50 हजार लोग ग्रैंड मस्जिद में नमाज के लिए जुटे थे। इसी दौरान जुहैमान अल-उतैबी और उसके समर्थकों ने मस्जिद पर कब्जा कर लिया। उसने अपने बहनोई मोहम्मद अब्दुल्लाह अल-कहतानी को महदी बताया और सऊदी शाही परिवार के खिलाफ विद्रोह का ऐलान किया।
सुरक्षा बलों और हथियारबंद विद्रोहियों के बीच करीब दो हफ्ते तक लड़ाई चलती रही। विद्रोही मस्जिद के भूमिगत हिस्सों में छिप गए थे। फ्रांस के जानकारों की मदद से अभियान चलाया गया और 5 दिसंबर को जुहैमान समेत करीब 100 विद्रोहियों ने आत्मसमर्पण किया। 9 जनवरी 1980 को जुहैमान और 62 अन्य लोगों को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी।
यमन में हूतियों और सरकार के बीच संघर्ष लंबे समय से चला आ रहा है। 2014 में हूतियों ने राजधानी सना और देश के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।
इसके अलावा इस मामले पर एक और अहम खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि कि सऊदी ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ इजरायल से मदद मांगी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के मक्का पैक्ट के तहत अपने हाथ पीछे खींच लिए जिसके बाद अब सऊदी इजरायल का रुख कर लिया है। इस मामले पर अभी तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
पिछले कुछ समय में दोनों पक्षों के बीच माहौल काफी शांत था, लेकिन जुलाई 2026 की शुरुआत के बाद संघर्ष फिर तेज हो गया। मक्का के पास ड्रोन की घटना से एक दिन पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया था कि हूती हमलों में खमीस मुशैत, अबहा और ताइफ में 13 नागरिक घायल हुए इसके अलावा सात घरों और दो वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है।