US Russia Sanctions Bill 2026: अमेरिका से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। वहां के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक ऐसा विधेयक प्रक्रियात्मक वोट पास हो गया है जो भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इस बिल का नाम है 'लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026'।
अगर यह विधेयक पूरी तरह पास होकर कानून बन जाता है, तो अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों (जैसे- भारत और चीन) से आने वाले सामान पर 100% तक का एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा।
आइए आपको बताते हैं कि इस बिल में भारत के लिए क्या खतरे हैं, अमेरिकी संसद में इस पर क्या खींचतान चल रही है और भारत सरकार का इस पर क्या रुख है।
क्या है 100% टैरिफ वाला नियम? (Section 113)
इस बिल की सबसे अहम और विवादास्पद पहलू सेक्शन 113 है। इसके कानून बनने से पिछले 12 महीनों के दौरान रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल या नेचुरल गैस खरीदने वाले शीर्ष 5 देशों पर यह नियम लागू होगा। सीनेट के मुताबिक, इन 5 बड़े खरीदारों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।
यह टैरिफ केवल तेल के सौदों पर नहीं, बल्कि उस देश (जैसे भारत) से अमरीका में इंपोर्ट होने वाले सभी सामानों पर 0% से लेकर 100% तक लगाया जा सकता है। वैसे बिल में राष्ट्रपति को यह अधिकार भी दिया गया है कि अगर अमेरिका के राष्ट्रीय हित में जरूरी हो, तो वे किसी देश को इस टैरिफ से छूट दे सकते हैं।
अमेरिकी संसद में क्या हुआ?
US प्रतिनिधि सभा में H. Res. 1530 नाम के एक रूल को 214-211 के बेहद मामूली अंतर से मंजूरी मिली। 211 रिपब्लिकन और 2 डेमोक्रेट्स ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि 209 डेमोक्रेट्स और 2 रिपब्लिकन इसके खिलाफ रहे।
वैसे यह प्रक्रियात्मक वोट था। बिल पर अंतिम वोट के बाद इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास दस्तखत के लिए भेजा जाएगा। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि वे इस बिल का समर्थन करते हैं।
बिल को लेकर अमेरिका के भीतर ही विरोध क्यों?
अमरीकी डेमोक्रेटिक पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इस बिल का कड़ा विरोध किया है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के रैंकिंग सदस्य ग्रेगोरी मीक्स ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रम्प को बिना किसी रोक-टोक के टैरिफ लगाने का एकतरफा अधिकार दे देगा। उन्होंने सेक्शन 113 को हटाने की मांग की थी।
कई सांसदों का मानना है कि भारत और चीन जैसे व्यापारिक साझेदारों पर 100% टैरिफ लगाने से अमरीका में ही महंगाई और चीजों के दाम बढ़ जाएंगे।
भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर अपना रुख बिल्कुल साफ रखा है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत के ऊर्जा खरीद के फैसले पूरी तरह से देश के राष्ट्रीय हित और 140 करोड़ नागरिकों की जरूरतों से तय होते हैं। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग द्विपक्षीय साझेदारी का एक मजबूत और पुराना स्तंभ है।