अमेरिकी स्पेस फोर्स का बड़ा खुलासा, पहली बार माना कि अंतरिक्ष में भी उसने तैनात किए हथियार, ये कैसी तैयारी?

US weapons in space: अमेरिका ने पहली पार माना है कि उसने ऑर्बिट में हथियार तैनात किए हैं। यह अंतरिक्ष में तैनात सैन्य क्षमताओं की एक दुर्लभ मामला है। US स्पेस फोर्स के एक प्रवक्ता ने कहा कि इन सिस्टम का मकसद अंतरिक्ष में अमेरिकी सेना के खिलाफ दुश्मन की कार्रवाई का मुक़ाबला करना है

अपडेटेड Sep 15, 2026 पर 2:31 PM
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US weapons in space: अमेरिका ने हथियारों के बारे में कोई डिटेल्स जानकारी देने से इनकार कर दिया

US Space Force Weapons in Orbit: अंतरिक्ष में युद्ध की आशंका लगातार बढ़ती जा रही हैं। यह वजह है कि अंतरिक्ष अब केवल वैज्ञानिक खोज और संचार का क्षेत्र नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। इसी बीच, अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक रूप से बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसके हथियार अंतरिक्ष की कक्षा (Orbit) में तैनात हैं। अमेरिकी स्पेस फोर्स की इस पुष्टि को इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका ने इससे पहले कक्षा में तैनात अपनी सैन्य क्षमताओं के बारे में इतनी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दी थी।

अमेरिकी स्पेस फोर्स के एक प्रवक्ता ने बताया कि ये सिस्टम अंतरिक्ष में अमेरिकी सेनाओं के खिलाफ होने वाली संभावित दुश्मन गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए बनाए गए हैं। हालांकि, प्रवक्ता ने इन हथियारों की कैपसिटी, संख्या या उनकी तैनाती से जुड़ी डिटेल्स जानकारी देने से इनकार कर दिया।

अमेरिकी स्पेस फोर्स ने क्या कहा?


अमेरिकी स्पेस फोर्स के प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिका के पास 'ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल वेपन्स' मौजूद हैं, जो अमेरिकी संयुक्त सैन्य बलों (Joint Force) को किसी दुश्मन की कार्रवाई से बचाने में सक्षम हैं। स्पेस फोर्स के मुताबिक, स्पेस कंट्रोल का मतलब अंतरिक्ष क्षेत्र में विरोधी की क्षमताओं को प्रभावित करने के लिए ऐसे अभियानों को संचालित करना है। इनके जरिए अंतरिक्ष के क्षेत्र में नियंत्रण और रणनीतिक बढ़त हासिल की जा सके।

इसके लिए काइनेटिक (Kinetic) और नॉन-काइनेटिक (Non-Kinetic) दोनों तरह के साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। स्पेस फोर्स ने यह भी कहा कि इन क्षमताओं का इस्तेमाल रक्षात्मक और आक्रामक, दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

अंतरिक्ष में वर्चस्व की होड़, चीन और रूस बड़ी चुनौती

  • अंतरिक्ष में सैन्य वर्चस्व की होड़ अब तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका के सामने इस क्षेत्र में उसके दो प्रमुख भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी चीन और रूस हैं। अमेरिकी स्पेस फोर्स चीन और रूस की अंतरिक्ष संबंधी सैन्य क्षमताओं को अमेरिकी हितों के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखती है।
  • अमेरिकी आकलन के मुताबिक, चीन अपनी सैन्य आधुनिकीकरण रणनीति के तहत अंतरिक्ष और काउंटर-स्पेस क्षमताओं को विकसित और संचालित कर रहा है।
  • वहीं, रूस अंतरिक्ष को युद्ध के क्षेत्र के तौर पर देखता है और उसका मानना है कि भविष्य के संघर्षों में अंतरिक्ष पर सर्वोच्चता निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
  • यही वजह है कि अमेरिका भी अंतरिक्ष में अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रहा है।

स्पेस रेस के साथ ही शुरू हो गया था अंतरिक्ष का सैन्यीकरण

  • अंतरिक्ष का सैन्यीकरण कोई नई प्रक्रिया नहीं है। इसकी शुरुआत अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शुरू हुई स्पेस रेस के शुरुआती दौर में ही हो गई थी।ॉ
  • 1957 में सोवियत संघ द्वारा स्पुतनिक लॉन्च किए जाने के बाद अमेरिका और मॉस्को ने इस बात पर विचार करना शुरू किया कि उपग्रहों को हथियारों से लैस कैसे किया जा सकता है और दुश्मन के उपग्रहों को नष्ट करने की क्षमता कैसे विकसित की जाए।
  • उस समय सबसे बड़ी चिंता अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों की तैनाती को लेकर थी। इस खतरे को नियंत्रित करने के लिए 1967 में Outer Space Treaty (बाह्य अंतरिक्ष संधि) अस्तित्व में आई।
  • इस संधि पर अमेरिका, सोवियत संघ समेत कई देशों ने हस्ताक्षर किए थे। संधि के तहत अंतरिक्ष की कक्षा में सामूहिक विनाश के हथियार (Weapons of Mass Destruction) तैनात करने पर रोक लगाई गई है।

फिर भी अंतरिक्ष में सैन्य क्षमताएं बढ़ती रहीं

  • Outer Space Treaty के बाद भी अमेरिका, रूस, चीन और भारत सहित कई देशों ने ऐसी सैन्य क्षमताएं विकसित की हैं। इनके जरिए अंतरिक्ष में सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं, जो संधि में प्रतिबंधित गतिविधियों के दायरे से बाहर हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक दुश्मन के उपग्रहों को निशाना बनाने की क्षमता है।
  • आधुनिक युद्ध में उपग्रहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है। सैन्य संचार, निगरानी और नेविगेशन जैसी कई अहम सेवाएं उपग्रहों पर निर्भर करती हैं। ऐसे में किसी देश के उपग्रहों को नुकसान पहुंचाना उसकी सैन्य क्षमता और संचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका की पुष्टि क्यों अहम है?

  • अमेरिका द्वारा पहली बार यह स्वीकार करना कि उसके पास कक्षा में तैनात स्पेस कंट्रोल हथियार मौजूद हैं। एक तरह से अंतरिक्ष में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, अमेरिकी स्पेस फोर्स ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कक्षा में किस तरह के हथियार तैनात हैं, उनकी संख्या कितनी है या वे किन स्थानों पर मौजूद हैं।

लेकिन यह पुष्टि ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां अंतरिक्ष को भविष्य के संघर्षों का महत्वपूर्ण क्षेत्र मानते हुए अपनी स्पेस और काउंटर-स्पेस क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रही हैं। आपको बता दें कि यह खबर ऐसे समय आई है जब अभी भी रूस और यूक्रेन एवं अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी है।

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