Pakistan Donkey Export To China: पाकिस्तान की माली हालत किसी से छिपी नहीं है। वैसे जर्जर हो चुकी अर्थव्यवस्था को एक बड़ा सहारा वहां के गधों से मिलने जा रही है। पाक में इन दिनों रोजाना सैकड़ों गधों की बलि चढ़ाई जा रही है। सबसे खास बात ये है कि बलि के बाद बूचड़खाने से निकलने वाला माल पाकिस्तान के लोगों के लिए नहीं, बल्कि पड़ोसी देश चीन भेजा जा रहा है।
बलूचिस्तान के ग्वादर में स्थित हनगेंग ग्रुप का स्लॉटरहाउस इस समय जोर शोर से गधों की प्रोसेसिंग में जुटा है, और आने वाले कुछ ही महीनों में यहां रोजाना 800 गधों को काटने का प्लान है। आखिर चीन को इतने गधों की जरूरत क्यों है और कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह क्या नया 'बिजनेस मॉडल' बन गया है। आइए आपको बताते हैं।
चीन को क्यों चाहिए गधे? 'इजियाओ' का खेल
चीन में गधे के मांस की मांग तो है ही, लेकिन असली खेल गधे की चमड़ी का है।दरअसल गधे की चमड़ी को उबालकर एक खास तरह का जिलेटिन निकाला जाता है, जिसे चीन में 'इजियाओ' (Ejiao) कहते हैं। इजियाओ का इस्तेमाल चीन की पारंपरिक दवाओं और महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स में बड़े पैमाने पर होता है।
चीन में गधों की संख्या तेजी से घटी है। अफ्रीका में 2024 में अफ्रीकी संघ ने गधों के कत्ल और उनकी चमड़ी के व्यापार पर महाद्वीप-व्यापी बैन लगा दिया था। इसके बाद चीन ने पाकिस्तान, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया की तरफ रुख किया।
60 लाख गधे और करोड़ों की कमाई
पाकिस्तान के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, देश में गधों की आबादी 60 लाख से ज्यादा है। कंगाली और विदेशी मुद्रा की तंगी से जूझ रही पाकिस्तान सरकार को चीन की इस मांग में कमाई का बड़ा जरिया दिखा है। ग्वादर में चीनी कंपनी हनगेंग ने करीब 5 करोड़ डॉलर का निवेश किया है, जिसमें 500 स्थानीय पाकिस्तानी मजदूरों को रोजगार मिला है।
हनगेंग के सीईओ एंडी लियाओ के मुताबिक, अगले 6 महीनों में इस बिजनेस से पाकिस्तान को 50 लाख डॉलर प्रति महीने और 2 साल में 70 लाख डॉलर प्रति महीने की विदेशी मुद्रा की कमाई हो सकती है।
ग्वादर फ्री जोन में प्रोसेस हुए गधे के मीट की पहली वाणिज्यिक खेप जुलाई में चीन के तियानजिन पोर्ट पहुंची थी। शुरुआती जमी हुई खेप और खालों की कीमत लगभग $1,95,000 थी।
घरेलू बाजार से रखा गया दूर
पाकिस्तान में मुस्लिम समुदाय के धार्मिक नियमों और स्थानीय खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पूरे प्रोजेक्ट को बेहद नियंत्रित रखा गया है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि गधों के प्रोसेसिंग प्लांट सिर्फ ग्वादर फ्री जोन तक ही सीमित रहें, ताकि यह मांस पाकिस्तान के घरेलू फूड चेन में प्रवेश न करे। गधों की संख्या अचानक खत्म न हो जाए, इसके लिए कंपनी आगे चलकर गधों के फार्मिंग और ब्रीडिंग का काम भी शुरू करेगी।