शुरुआत करने से पहले बता दें कि ये एक क्रेडिट कार्ड की तरह होते हैं। ये किसी बैंक द्वारा जारी किए गए क्रेडिट कार्ड की ही तरह होते हैं। सिर्फ इनकी क्रेडिट लिमिट में अंतर होता है। सिक्योर्ड कार्ड में उतनी ही क्रेडिट लिमिट तय की जाती है जितना फिक्स्ड डिपॉजिट आप बैंक के पास रखते हैं। इस तरह आपको क्रेडिट कार्ड जारी करते समय बैंक कोई जोखिम नहीं उठाता है।
देखते हैं कि ये कैसे काम करता है। इसके लिए बैंक आपसे एक फिक्स्ड डिपॉजिट की मांग करता है। अगर आप 1 लाख रुपये का फिक्स्ड डिपॉडिट करते हैं तो इस फिक्स्ड डिपॉजिट राशि के 60-70 फीसदी हिस्से के बराबर बैंक आपको एक क्रेडिट कार्ड जारी कर देगा। इस तरह आप बैंकों के नियम के मुताबिक 60,000-70,000 रुपये की लिमिट वाले एक क्रेडिट कार्ड को पा लेते हैं। चुंकि क्रेडिट कार्ड के पीछे एक एसेट- फिक्स्ड डिपॉजिट रखा हुआ है इसलिए इसे सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड कहते हैं। क्रेडिट कार्ड धारक इसे किसी अन्य क्रेडिट कार्ड की ही तरह उपयोग कर सकता है। इन कार्ड पर ब्याज की दर अन्य अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड के मुकाबले कम होती है। हालांकि अन्य सभी मापदंडों पर सिक्योर्ड कार्ड अनसिक्योर्ड कार्ड की ही तरह समान होते हैं।
अगर क्रेडिट कार्ड धारक आउटस्टैंडिग क्रेडिट को नहीं चुकाता है तो बैंक के पास अधिकार है कि वो फिक्स्ड डिपॉजिट से पैसा निकाल ले। बैंक ने ब्याज के सहित आउटस्टैंडिग रकम के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट में एक सीमारेखा बना रखी होती है जिससे बैंक अपने ब्याज को सुरक्षित रख पाता है। इस सुविधा में क्रेडिट कार्ड धारक को क्रेडिट कार्ड की सारी सुविधाएं मिलती हैं। अगर 6-12 महीने के दौरान सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड के सारे आउटस्टैंडिंग तय समय से पहले या समय पर चुकाए जाते हैं तो इससे कार्ड धारक अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री बना लेता है और ऊंचा क्रेडिट स्कोर हासिल कर लेता है।