महीना खत्म होने से पहले खत्म हो जाती है सैलरी? अपनाएं ये 5 सीक्रेट टिप्स, जो बनाएंगी आपको फाइनेंशियली स्ट्रॉन्ग
Personal Finances Tips: फाइनेंशियली मजबूत होने के लिए शेयर बाजार में किसी 'जैकपॉट' शेयर को पकड़ना जरूरी है या किसी रातों-रात अमीर बनाने वाली स्कीम में निवेश करना पड़ता है। लेकिन सच यह है कि पर्सनल फाइनेंस का असली खेल किसी बड़े धमाके से नहीं, बल्कि आपकी रोजमर्रा की छोटी और 'बोरिंग' आदतों से तय होता है
ये 5 छोटी-छोटी आदतें आपके सेविंग्स को मजबूत बना सकती हैं
5 Smart Money Habits: क्या महीना खत्म होने से पहले ही आपका बैंक बैलेंस जवाब देने लगता है? हम में से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि अमीर बनने या फाइनेंशियली मजबूत होने के लिए शेयर बाजार में किसी 'जैकपॉट' शेयर को पकड़ना जरूरी है या किसी रातों-रात अमीर बनाने वाली स्कीम में निवेश करना पड़ता है। लेकिन सच यह है कि पर्सनल फाइनेंस का असली खेल किसी बड़े धमाके से नहीं, बल्कि आपकी रोजमर्रा की छोटी और 'बोरिंग' आदतों से तय होता है।
बिना किसी शोर-शराबे के ये 5 छोटी-छोटी आदतें आपके सेविंग्स को इतना मजबूत बना सकती हैं कि बड़ी से बड़ी आर्थिक मंदी भी आपकी जेब को हिला नहीं पाएगी। आइए आपको बताते हैं इन 5 सीक्रेट आदतों के बारे में।
1. 'Pay Yourself First': पहले निवेश, फिर खर्चा!
ज्यादातर लोग पूरा महीना खर्च करते हैं और महीने के अंत में जो बच जाता है, उसे सेव या इन्वेस्ट करने की सोचते हैं। लेकिन यह तरीका हमेशा नाकाम साबित होता है।स्मार्ट तरीका ये है कि जैसे ही आपकी सैलरी या बिजनेस की कमाई आए, उसका एक तय हिस्सा सबसे पहले अपनी SIP, आरडी (RD) या इमरजेंसी फंड में ऑटो-डेबिट कर दें।
SEBI के निवेशक जागरूकता अभियानों में भी लगातार इस बात पर जोर दिया जाता है कि नियमित और शुरुआती उम्र से किया गया निवेश कंपाउंडिंग का सबसे ज्यादा फायदा देता है।
2. 'Emergency Fund': अचानक आई मुसीबत के लिए ढाल बनाएं
जिंदगी में बिना बताए आने वाले खर्चे जैसे- अचानक बीमारी, गाड़ी का भारी-भरकम रिपेयर या नौकरी का संकट आपको महंगे पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के जाल में फंसा सकते हैं। इसके लिए अपने दैनिक इस्तेमाल वाले बैंक अकाउंट से अलग एक इमरजेंसी फंड बनाएं। इसमें कम से कम आपके 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर रकम जमा होनी चाहिए। यह फंड आपको मुसीबत के समय महंगे कर्ज से बचाता है।
3. 'Money Leakage' को रोकें: ट्रैक करें कि पैसा कहां गायब हो रहा है
कई लोगों की शिकायत होती है कि वे बहुत ज्यादा खर्च नहीं करते, फिर भी पैसा नहीं बचता। इसे 'मनी लीक' कहा जाता है। महीने में कम से कम एक बार अपने क्रेडिट कार्ड और बैंक स्टेटमेंट को ध्यान से देखें। कई बार हम ऐसे OTT सब्स्क्रिप्शन, जिम मेंबरशिप या अनचाहे बैंक चार्जेस दे रहे होते हैं जिनका इस्तेमाल भी नहीं करते। छोटी-छोटी रिसाव जैसी कटौतियां महीने के अंत में बड़ा अंतर पैदा करती हैं।
4. 'Lifestyle Inflation' पर ब्रेक: सैलरी बढ़े तो सेविंग्स भी बढ़ाएं
प्रमोशन, इंक्रीमेंट या बिजनेस में ज्यादा मुनाफा होते ही हमारी आदतें तुरंत बदल जाती हैं हम महंगे फोन, लग्जरी गाड़ियां या महंगे होटल चुनने लगते हैं। इसे 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' कहते हैं। इंक्रीमेंट का मतलब यह नहीं कि पूरा पैसा लग्जरी पर ही खर्च हो जाए। जब भी आय बढ़े, अपनी SIP या कर्ज चुकाने की रकम में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी करें। आय के साथ खर्चों को तेजी से न बढ़ने देना ही असली वेल्थ क्रिएट करता है।
5. बार-बार पोर्टफोलियो न बदलें, केवल सालाना रिव्यू करें
बाजार के हर उतार-चढ़ाव या नए ट्रेंड को देखकर अपने म्यूचुअल फंड या शेयरों में लगातार फेरबदल करने से आपका नुकसान हो सकता है। सेबी के अनुसार म्यूचुअल फंड्स डाइवर्सिफिकेशन का फायदा देते हैं, लेकिन निवेश करने से पहले अपने जोखिम और लंबे समय के गोल को ध्यान में रखना जरूरी है।
इसके अलावा साल में एक बार अपने टर्म प्लान, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की कवरेज और नॉमिनी की जानकारियों को जरूर अपडेट करें। 5 साल पहले ली गई इंश्योरेंस पॉलिसी आज की जरूरतों के हिसाब से कम पड़ सकती है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।