7th Pay Commission: सरकारी कर्मचारी डीए (DA Hike) में बढ़ोतरी का इंतजार काफी समय से कर रहे हैं। अब उन्हें एक अच्छी खबर मिली है। इंडस्ट्रियल वर्कर की केटेगरी में महंगाई को देखते हुए सरकार महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में लगभग 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकती है। हालांकि, अभी इसे लेकर सरकार की तरफ से कोई भी ऐलान नहीं किया गया है लेकिन उम्मीद है कि सरकार ऐसी घोषणा अगले महीने जरूर कर सकती है।
लेटेस्ट आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अखिल भारतीय सीपीआई-आईडब्ल्यू पर आधारित इंडस्ट्रियल वर्करों के लिए रिटेल महंगाई दर जून में बढ़कर 5.57 प्रतिशत हो गई है, जो इस साल मई में 4.42 प्रतिशत थी। ये बढ़ोतरी खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने के कारण हुआ है।
साल में 2 बार बढ़ता है DA
डीए और महंगाई राहत (Dearness Relief - DR) में कितनी बढ़ोतरी होगी ये केंद्र सरकार अखिल भारतीय सीपीआई-आईडब्ल्यू डेटा (All-India CPI-IW data) के आधार पर तय करती है। डीए सरकारी कर्मचारियों को दिया जाता है, जबकि डीआर पेंशनर्स को दिया जाता है। डीए और डीआर में साल में दो बार बढ़ोतरी होती है - जनवरी और जुलाई।
मार्च 2023 में आखिरी बढ़ोतरी में DA 4 फीसदी बढ़ाकर 42 फीसदी कर दिया गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महंगाई दर को देखते हुए डीए अगली बढ़ोतरी 4 प्रतिशत होने की उम्मीद है।आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 47.58 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी और 69.76 लाख पेंशनभोगी हैं। सरकार के एक बार फिर डीए में बढ़ोतरी करने से कर्मचारियों और पेंशनर्स को फायदा होगा। हाल ही में मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों की सरकारों ने अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की थी।
अखिल भारतीय सीपीआई- इंडस्ट्रियल वर्कर्स (All-India CPI-Industrial Workers)
अखिल भारतीय सीपीआई-आईडब्ल्यू के अनुसार मौजूदा इंडेक्स में अधिकतम बढ़ोतरी खाद्य और पेय पदार्थ ग्रुप से आया, जिसका कुल बदलाव में 1.62 प्रतिशत अंक का योगदान रहा। अगर प्रोडक्ट की बात की जाए तो चावल, गेहूं, गेहूं आटा, अरहर दाल, मूंग दाल, ताजा मछली, पोल्ट्री चिकन, अंडा-मुर्गी, सेब, केला, बैंगन, गाजर, अदरक, फूलगोभी, हरी मिर्च, आलू, प्याज, टमाटर, जीरा, सुपारी, कैजुअल वियर, कैनवास जूते, बर्तन, दवा आयुर्वेदिक आदि सूचकांक में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार हैं। हालांकि, इसमें सरसों के तेल, पाम तेल, सूरजमुखी तेल, नारियल तेल, नींबू, आम, मिट्टी के तेल की कीमतों में कमी आई जिसने इंडेक्स को नीचे ले जाने का काम किया।