8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट! वेतन आयोग की जुलाई बैठक से पहले सामने आईं ये 5 बड़ी मांगें

8th Pay Commission Updates: 3 नवंबर 2025 को गठित हुए 8वें वेतन आयोग के लिए जुलाई की ये बैठकें एक बड़ा मील का पत्थर साबित होंगी, क्योंकि आयोग के गठन को लगभग 8 महीने पूरे होने वाले हैं। नियमों के मुताबिक, आयोग के पास सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए अब करीब 10 महीने का समय और बचा हुआ है

अपडेटेड Jun 29, 2026 पर 9:43 AM
जानिए कर्मचारियों की ये 5 मांगें क्या हैं और जुलाई में होने वाली बैठकें क्यों इतनी महत्वपूर्ण हैं

8th Pay Commission Latest Updates: देश के करीब 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था NC-JCM ने इस बार केवल पैसों की डिमांड नहीं की, बल्कि सर्विस कंडीशन में मौजूद उन 5 बड़ी विसंगतियों को टारगेट किया है जो लंबे समय से चुभ रही थीं। सबसे बड़ी बात यह है कि इन मांगों को कैबिनेट सचिव ने खुद आगे बढ़ाया है, जिससे यह साफ है कि जुलाई में भुवनेश्वर और कोलकाता की बैठकों में केवल चर्चा नहीं, बल्कि आर-पार का फैसला होने की उम्मीद है।

इन मांगों में पेंशन रिवीजन, सैलरी में विसंगतियां और मैटरनिटी बेनिफिट जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं। आइए जानते हैं कि कर्मचारियों की ये 5 मांगें क्या हैं और जुलाई में होने वाली बैठकें क्यों इतनी महत्वपूर्ण हैं।

8वें वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 मुख्य मांगें


NC-JCM की बैठक के दौरान स्टाफ साइड की तरफ से कई लंबे समय से लटके मुद्दों को उठाया गया, जिन्हें अब 8वें वेतन आयोग के पास भेजने या संबंधित विभागों द्वारा समीक्षा करने की सिफारिश की गई है। ये 5 बड़ी मांगें ये हैं:

हर 5 साल में पेंशन का रिवीजन: पेंशनर्स की मांग है कि हर पांच साल में उनकी पेंशन की समीक्षा की जाए और इसके साथ ही मिलने वाले 'फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस' को बढ़ाकर ₹3000 प्रति माह किया जाए।

फैमिली पेंशन में कटौती न हो: कर्मचारियों की मांग है कि किसी कर्मचारी या पेंशनर की मृत्यु के बाद उनकी फैमिली पेंशन को घटाकर मृतक की नोशनल पे का 30 फीसदी न किया जाए, बल्कि इसमें बढ़ोतरी की जाए।

फायरफाइटर्स के वेतन में समानता: केंद्रीय विभागों में काम करने वाले फायरफाइटर्स के पे-स्केल को 'दिल्ली फायर सर्विस' के बराबर लाकर समानता दी जाए।

MACP के बाद पे-फिक्सेशन का लाभ: जिन कर्मचारियों को एमएसीपी का लाभ मिलने के बाद प्रमोशन मिलता है, उन्हें FR-22(1)(a)(1) के तहत पे-फिक्सेशन का पूरा फायदा दिया जाए।

महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी बेनिफिट: महिला केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 'मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961' के सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए।

ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) और अन्य मुद्दों पर भी दबाव

इन 5 मांगों के अलावा, कर्मचारी संगठनों ने सरकार और 8वें वेतन आयोग से कुछ अन्य पुरानी मांगों पर भी दोबारा विचार करने का अनुरोध किया है। इसमें मौजूदा पेंशनभोगियों की पेंशन में सुधार, कम्यूटेड पेंशन को समय से पहले बहाल करना और सबसे महत्वपूर्ण ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को वापस लागू करना शामिल है।

जुलाई में कहाँ और कब होंगी अहम बैठकें?

8वें वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (https://8cpc.gov.in/) के अनुसार, आयोग अगले महीने विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ आमने-सामने बैठकर चर्चा करने जा रहा है। यह बैठकें दो बड़े शहरों में आयोजित होंगी:

भुवनेश्वर: 6 और 7 जुलाई को चर्चा होगी।

कोलकाता: 9 और 10 जुलाई को बैठकें की जाएंगी।

अगर इन बैठकों में अन्य यूनियनों ने भी इन मांगों का पुरजोर समर्थन किया, तो इन पर एक आम सहमति बन सकती है। हालांकि, आयोग ने अभी तक सैलरी में बढ़ोतरी या फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

फाइनल रिपोर्ट आने में कितना समय बाकी है?

3 नवंबर 2025 को गठित हुए 8वें वेतन आयोग के लिए जुलाई की ये बैठकें एक बड़ा मील का पत्थर साबित होंगी, क्योंकि आयोग के गठन को लगभग 8 महीने पूरे होने वाले हैं। नियमों के मुताबिक, आयोग के पास सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए अब करीब 10 महीने का समय और बचा हुआ है। ऐसे में जुलाई के इस दौर की बातचीत से यह तय होगा कि आने वाले समय में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों का ढांचा कैसा रहने वाला है।

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