8th Pay Commission: क्या बदलेगा DA कैलकुलेशन फॉर्मूला? जानिए सैलरी और पेंशन पर क्या होगा असर

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग से पहले DA कैलकुलेशन फॉर्मूला बदलने की मांग तेज हो गई है। कर्मचारी संगठन परिवार आकार बढ़ाने और नए खर्च शामिल करने की बात कर रहे हैं। अगर बदलाव हुआ तो सैलरी और पेंशन में बड़ा इजाफा हो सकता है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Mar 19, 2026 पर 5:11 PM
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DA की गणना ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के आधार पर होती है।

8th Pay Commission: महंगाई भत्ता (DA) की गणना के फॉर्मूले में बदलाव की मांग एक बार फिर चर्चा में है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) समेत कई कर्मचारी संगठनों ने सरकार से कहा है कि मौजूदा व्यवस्था आज की बढ़ती जीवन लागत को सही तरीके से नहीं दिखाती। इसलिए वेतन और पेंशन तय करने के तरीके की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए।

हालांकि अभी तक सरकार ने DA फॉर्मूला बदलने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब 8वें वेतन आयोग ने अपने 18 सवालों वाले प्रश्नपत्र पर सुझाव देने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी है।

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन का अहम हिस्सा DA होता है। इसे साल में दो बार- जनवरी और जुलाई महंगाई के आंकड़ों के आधार पर संशोधित किया जाता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा फॉर्मूला अब वास्तविक खर्चों को सही तरीके से नहीं दिखाता।


क्या हैं कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांगें

कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि समय के साथ जीवनयापन की लागत काफी बढ़ गई है, लेकिन DA की गणना का आधार लगभग वही बना हुआ है। उनकी पहली मांग परिवार के आकार में बदलाव की है। अभी फॉर्मूले में परिवार को 3 उपभोग इकाइयों के रूप में माना जाता है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि इसे बढ़ाकर 5 सदस्य किया जाए, ताकि आश्रित माता-पिता जैसे खर्चों को भी शामिल किया जा सके।

दूसरी मांग आधुनिक खर्चों को शामिल करने की है। इंटरनेट, डिजिटल सेवाएं, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसे खर्च आज जरूरी बन चुके हैं। लेकिन मौजूदा फॉर्मूले में इनका पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया है। इसके अलावा कर्मचारी संगठनों ने DA को बेसिक सैलरी में मर्ज करने, बेहतर फिटमेंट फैक्टर तय करने, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं में सुधार जैसी मांगें भी उठाई हैं।

मौजूदा DA सिस्टम कैसे काम करता है

DA की गणना ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के आधार पर होती है। महंगाई के हिसाब से प्रतिशत तय किया जाता है और इसे बेसिक सैलरी पर लागू किया जाता है। फिलहाल जुलाई 2025 से DA 58 प्रतिशत है। जनवरी 2026 के लिए इसमें 2 से 3 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे यह 60 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो सकता है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब DA 50 प्रतिशत से ज्यादा हो जाता है, तो इसे बेसिक सैलरी में मर्ज कर देना चाहिए। ऐसा 2005 में पांचवें वेतन आयोग के दौरान किया गया था। हालांकि बाद में यह व्यवस्था जारी नहीं रही।

Aykroyd फॉर्मूला पर क्यों हो रही बहस

न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 1957 में अपनाया गया Aykroyd फॉर्मूला आज भी आधार माना जाता है। इसमें 2700 कैलोरी पोषण, कपड़ा और आवास जैसी बुनियादी जरूरतों और 3 सदस्यीय परिवार मॉडल को आधार बनाया गया है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह ढांचा अब पुराना हो चुका है। इसमें आधुनिक खर्च, बदलती परिवार संरचना और शहरों में बढ़ती जीवन लागत को सही तरीके से शामिल नहीं किया गया है।

अगर फॉर्मूला बदला तो क्या होगा

अगर सरकार DA फॉर्मूले में बदलाव करती है, तो इसका बड़ा असर वेतन और पेंशन पर पड़ सकता है। परिवार की उपभोग इकाइयों को 3 से बढ़ाकर 5 करने पर न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर 30,000 रुपये से ज्यादा हो सकता है। क्योंकि DA बेसिक सैलरी का प्रतिशत होता है, इसलिए बेसिक बढ़ने पर DA और पेंशन दोनों में बढ़ोतरी होगी।

साथ ही वेतन संशोधन में इस्तेमाल होने वाला फिटमेंट फैक्टर भी बढ़ सकता है, जिससे कुल सैलरी में 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है।

इसमें चुनौतियां क्या हैं

हालांकि इन मांगों को लागू करना आसान नहीं है। वेतन और पेंशन बढ़ने से सरकार पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ सकता है।

इसके अलावा पूरे देश में वास्तविक जीवन लागत का आकलन करना भी मुश्किल है, क्योंकि शहर और गांवों के बीच खर्चों में बड़ा अंतर होता है। इसलिए सरकार को कर्मचारियों के हित और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाना होगा।

8वें वेतन आयोग की स्थिति

7वें वेतन आयोग का कार्यकाल औपचारिक तौर पर 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो चुका है। ऐसे में 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होना था। लेकिन अभी इसका औपचारिक गठन और विस्तृत ढांचा घोषित नहीं हुआ है।

फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन और DA मर्जर जैसे मुद्दों पर चर्चा जारी है। कर्मचारी संगठन लगातार अपने सुझाव दे रहे हैं, जिनमें DA फॉर्मूला बदलने की मांग भी शामिल है।

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