8th Pay Commission: बढ़ी हुई सैलरी के लिए करना पड़ेगा और लंबा इंतजार, ये डेडलाइन बढ़ने से जानें सैलरी और एरियर पर क्या पड़ेगा असर
8th Pay Commission Deadline: इस बार नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी की ओर से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने और न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। कर्मचारी संगठनों ने DA रिफॉर्म को ऊंचे फिटमेंट फैक्टर से जोड़ने का प्रस्ताव रखा है
सर्कुलर के मुताबिक, '8वें केंद्रीय वेतन आयोग को ज्ञापन सौंपने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 जून कर दी गई है
8th Pay Commission Delayed: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। वेतन आयोग ने विभिन्न कर्मचारी संगठनों और हितधारकों के लिए अपनी सिफारिशें और ज्ञापन सौंपने की समय-सीमा को पिछले दिनों फिर से आगे बढ़ा दिया।
अब कर्मचारी संगठन 15 जून तक अपनी मांगों का ड्राफ्ट पैनल के सामने पेश कर सकते हैं। इसके पहले यह प्रक्रिया 5 मार्च को शुरू हुई थी, जिसकी शुरुआती डेडलाइन 30 अप्रैल तय की गई थी। बाद में इसे बढ़ाकर 31 मई किया गया और अब इसे तीसरी बार आगे बढ़ाया गया है।
कमीशन के सर्कुलर में क्या है खास?
8वें वेतन आयोग द्वारा जारी ताजा सर्कुलर में साफ कर दिया गया है कि इसके बाद समय-सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा। सर्कुलर के मुताबिक, '8वें वेतन आयोग को ज्ञापन सौंपने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 जून कर दी गई है। यह अंतिम समय-सीमा है और इसके बाद कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा'।
कमीशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी आवेदनों को केवल आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in के माध्यम से ही ऑनलाइन स्वीकार किया जाएगा। किसी भी तरह की हार्ड कॉपी, फिजिकल दस्तावेज, ईमेल या पीडीएफ के रूप में भेजे गए ज्ञापनों पर विचार नहीं किया जाएगा।
प्रक्रिया में देरी की 5 सबसे बड़ी वजहें क्या हैं?
8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट फाइनल होने में लग रहे अतिरिक्त समय के पीछे 5 प्रमुख कारण और मुद्दे हैं:
पुरानी पेंशन और न्यूनतम वेतन: नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की ओर से पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने और न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
सैलरी ₹18000 से सीधे ₹69000 करने की मांग: कर्मचारी संगठनों ने DA रिफॉर्म को ऊंचे फिटमेंट फैक्टर से जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। यूनियन की मांग है कि फिटमेंट फैक्टर को 3.833 किया जाए, जिससे कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन ₹18000 से बढ़कर सीधे करीब ₹69000 हो जाए।
प्रस्ताव तैयार करने के लिए मांगा गया समय: NC-JCM के अनुरोध पर ही आयोग ने समय-सीमा बढ़ाई है, क्योंकि विभिन्न यूनियनों को अपनी विस्तृत मांगों और प्रस्तावों का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए और अधिक समय की जरूरत थी।
केवल ऑनलाइन मोड की अनिवार्यता: सभी सबमिशन केवल ऑनलाइन पोर्टल के जरिए होने हैं। फिजिकल या ईमेल कॉपियों के रिजेक्शन के नियम के चलते संगठनों को ऑनलाइन डेटा फीड करने में समय लग रहा है।
देशभर में चल रही बैठकें: केंद्र सरकार देश के अलग-अलग हिस्सों में हितधारकों के साथ परामर्श सत्र आयोजित कर रही है। दिल्ली, पुणे और हैदराबाद में बैठकें हो चुकी हैं, जबकि जून में श्रीनगर और लद्दाख में सत्र होने तय हैं। इसके बाद अगली बड़ी बैठक लखनऊ में आयोजित की जाएगी।
कर्मचारियों की सैलरी और एरियर पर क्या पड़ेगा असर?
वेतन आयोग की प्रक्रिया में हो रही इस देरी का सीधा वित्तीय असर केंद्र सरकार और कर्मचारियों दोनों पर पड़ेगा:
मोटा एरियर: ध्यान देने वाली बात यह है कि नया संशोधित वेतन ढांचा 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होना निर्धारित है। इस वजह से 1 जनवरी 2026 से अब तक का बकाया एरियर कर्मचारियों के खाते में जुड़ रहा है, जिसका भुगतान नई सैलरी स्केल लागू होने के बाद एकमुश्त किया जाएगा। सरकार को एक साथ बड़ी रकम पेंशन और एरियर के रूप में जारी करनी होगी।
HRA का नुकसान: कर्मचारियों को एरियर तो एकसाथ मिल जाएगा, लेकिन इस देरी के कारण उनके हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को नुकसान पहुंच सकता है। बेसिक पे पर तो एरियर बाद में मिल जाता है, लेकिन सामान्य तौर पर HRA का भुगतान पिछली तारीखों से नहीं किया जाता है। ऐसे में देरी की अवधि के लिए कर्मचारी बढ़े हुए HRA के लाभ से चूक सकते हैं।