8th Pay Commission: सैलरी, पेंशन और प्रमोशन में बड़े बदलाव की मांग, जानिए क्या हो सकते हैं फैसले?

8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन कर दिया है और यह 1 जनवरी 2026 से लागू भी हो चुका है। हालांकि कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में असली बढ़ोतरी तब होगी, जब आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा और कैबिनेट उसे मंजूरी देगी

अपडेटेड Mar 18, 2026 पर 2:47 PM
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8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन कर दिया है।

8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन कर दिया है। हालांकि, कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में असली बढ़ोतरी तब होगी, जब आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा और कैबिनेट उसे मंजूरी देगी। माना जा रहा है कि आयोग को अपनी सिफारिशें देने में करीब 18 महीने का समय लगेगा। इस बीच अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और यूनियनों ने अपनी मांगें आयोग के सामने रखनी शुरू कर दी हैं।

सैलरी बढ़ाने के लिए 3.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) ने मांग की है कि फिटमेंट फैक्टर 3.0 किया जाए। इससे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और पेंशन में बड़ा उछाल आ सकता है। फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, उतनी ही ज्यादा सैलरी बढ़ेगी।


सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने की मांग

फिलहाल कर्मचारियों को हर साल 3% इंक्रीमेंट मिलता है। यूनियन ने इसे बढ़ाकर कम से कम 6% करने की मांग की है। इससे कर्मचारियों की इनकम समय के साथ तेजी से बढ़ेगी और उन्हें महंगाई से राहत मिलेगी।

करियर में कम से कम 5 प्रमोशन

यूनियन का कहना है कि मौजूदा सिस्टम में कर्मचारियों को सही तरीके से प्रमोशन नहीं मिल पाता। इसलिए 30 साल की नौकरी में कम से कम 5 प्रमोशन देने की मांग की गई है। इससे कर्मचारियों की ग्रोथ और सैलरी दोनों बेहतर हो सकती हैं।

पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग

AITUC ने ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को फिर से लागू करने की मांग उठाई है। साथ ही हर 5 साल में पेंशन में 5% बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी दिया गया है, ताकि रिटायर होने के बाद इनकम स्थिर बनी रहे।

DA और अन्य सुविधाओं में बदलाव

यूनियन का कहना है कि मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) का फॉर्मूला पुराना हो चुका है। इसलिए इसे अपडेट करने की जरूरत है, ताकि यह आज की महंगाई को सही तरीके से दिखा सके। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए 450 दिन तक लीव एन्कैशमेंट, कैशलेस हेल्थकेयर और बेहतर मातृत्व-पितृत्व छुट्टियों जैसी सुविधाओं की भी मांग की गई है।

जोखिम भरी नौकरियों के लिए ज्यादा मुआवजा

रेलवे, रक्षा और सुरक्षा बलों (CAPF) जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ज्यादा मुआवजे की मांग की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर 2 करोड़ रुपये तक का मुआवजा दिया जाना चाहिए। साथ ही बोनस पर लगी लिमिट हटाने की भी मांग की गई है, ताकि कर्मचारियों को उनके वास्तविक वेतन के आधार पर बोनस मिल सके। फिलहाल ये सभी मांगें प्रस्ताव के रूप में रखी गई हैं। अंतिम फैसला वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।

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