8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में 2, 2.5 या 3 फिटमेंट फैक्टर मिला तो इतनी हो जाएगी सैलरी, एक्सपर्ट ने बताया आगे का प्लान

8th Pay Commission: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) से लगभग 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और अनुमानित 69 लाख पेंशनभोगियों के मूल वेतन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू करके लेवल 1 के कर्मचारियों का मूल वेतन बढ़ाकर ₹18000 कर दिया था। अब अगर 8वां वेतन आयोग इस मल्टीप्लायर को उदाहरण के तौर पर 2 बढ़ाता है तो कर्मचारियों की सैलरी में कुछ इस तरह बदलाव आएगा

अपडेटेड Jul 14, 2026 पर 12:34 PM
आपको बता दें कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी हो चुका है।

8th Pay Commission updates: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत संभावित वेतन वृद्धि को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी के साथ केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने अपने पर्सनल फाइनेंस की प्लानिंग भी शुरू कर दी है। हालांकि विभिन्न फिटमेंट फैक्टर के परिदृश्यों के तहत मूल वेतन और सैलरी से जुड़े कंपोनेंट्स में होने वाले बदलावों को लेकर बहस जारी है लेकिन इसके साथ ही इस अतिरिक्त आमदनी को सही जगह प्लान करना भी बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी हो चुका है। हालांकि इसे असल में लागू करने और लोगों की सैलरी बढ़ने की बात करें तो पैनल द्वारा 2027 के मध्य के आसपास अपनी सिफारिशें सौंपने और सरकार द्वारा उन्हें मंजूरी दिए जाने के बाद ही होने की संभावना है।

मनी कंट्रोल पर दिपेन प्रधान की रिपोर्ट में अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के आधार पर संभावित सैलरी कैलकुलेट की गई है और एक्सपर्ट के हवाले से समझाया गया है कि बढ़ी सैलरी पर बेस्ट इन्वेस्टमेंट की स्ट्रैटिजी क्या होनी चाहिए। आइए जानते हैं कि अलग-अलग सैलरी लेवल पर इसका क्या असर पड़ेगा और बढ़े हुए पैसे को निवेश करने का एक्सपर्ट्स का क्या प्लान है।

2.0 फिटमेंट फैक्टर पर कितनी हो जाएगी सैलरी?


8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) से लगभग 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और अनुमानित 69 लाख पेंशनभोगियों के मूल वेतन में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू करके लेवल 1 के कर्मचारियों का मूल वेतन बढ़ाकर ₹18000 कर दिया था। अब अगर 8वां वेतन आयोग इस मल्टीप्लायर को उदाहरण के तौर पर 2 बढ़ाता है तो कर्मचारियों की सैलरी में कुछ इस तरह बदलाव आएगा-

  • लेवल 1कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन ₹36000 ({Rs 18000 ×2) हो जाएगा।
  • लेवल 7 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹89800 हो जाएगा।
  • लेवल 13 कर्मचारी: इस स्तर के अधिकारियों का मासिक मूल वेतन बढ़कर ₹246200 प्रति माह हो जाएगा।

बाकी अगर फिटमेंट फैक्टर अगर 2.5 या 3 फिक्स किया गया तो बढ़ी हुई संभावित सैलरी का कैलकुलेशन यहां नीचे देखा जा सकता है-

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वेतन वृद्धि के बाद क्या होनी चाहिए एसेट एलोकेशन स्ट्रेटजी?

किंग स्टब एंड कसिवा एडवोकेट्स एंड अटॉर्नी के पार्टनर रोहिताश्व सिन्हा ने बढ़े हुए वेतन का संतुलित उपयोग करने के लिए एक खास एलोकेशन स्ट्रेटजी सुझाई है-

  • 40-50 प्रतिशत हिस्सा: दीर्घकालिक निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग में लगाएं।
  • 20-30 प्रतिशत हिस्सा: महंगे या उच्च ब्याज वाले कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल करें।
  • 10-20 प्रतिशत हिस्सा: इमरजेंसी सेविंग्स बनाने में लगाएं।
  • शेष 10-20 प्रतिशत हिस्सा: लाइफस्टाइल को अपग्रेड करने पर खर्च कर सकते हैं।

एक्सपर्ट की खास सलाह

रोहिताश्व सिन्हा के मुताबिक इसका मुख्य मंत्र सही सीक्वेंसिंग है। अपनी इच्छाओं पर खुलकर खर्च करने से पहले महंगे कर्ज को चुकाएं और अपने वित्तीय आधार को स्थिर करें। सैलरी हाइक स्थायी होती है इसलिए इसे आदर्श रूप से स्थायी संपत्ति में बदला जाना चाहिए न कि इसे सिर्फ स्थायी रूप से खर्च बढ़ाने की आदत बना लेना चाहिए।

सैलरी स्तर के हिसाब से निवेश की रणनीति

बैंकबाजार के सीईओ अधिल शेट्टी का मानना है कि कर्मचारियों को वेतन वृद्धि के बाद अपनी जरूरतों के हिसाब से पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अलग-अलग आय वर्ग के लिए ये सुझाव दिए हैं:

सीमित बचत वाले कर्मचारी: जिन कर्मचारियों के पास बचत कम है वे सबसे पहले छह महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं और फिर ऊंचे ब्याज वाले लोन चुकता करें।

मध्यम आय वर्ग: इन्हें मुख्य रूप से एसआईपी और रिटायरमेंट के लिए ऊंचे योगदान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उच्च आय वर्ग वाले कर्मचारी: जिनकी सैलरी अधिक है वे घर खरीदने या बच्चों की शिक्षा की फंडिंग जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए अधिक निवेश कर सकते हैं।

अधिल शेट्टी ने आगे कहा कि सैलरी बढ़ोतरी का एक छोटा हिस्सा अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने पर खर्च करना पूरी तरह ठीक है लेकिन इस बात से बचें कि पूरी की पूरी सैलरी हाइक आपके ऊंचे मासिक खर्चों में तब्दील हो जाए। इसके अलावा जोखिम भरे निवेशों पर विचार करने से पहले कर्मचारियों को पर्याप्त स्वास्थ्य और जीवन बीमा सुनिश्चित करना चाहिए।

करियर के पड़ाव के अनुसार कैसे करें निवेश?

अगर रोहिताश्व सिन्हा के बताए 40-50 प्रतिशत के एलोकेशन को आधार माना जाए तो 2.0 का फिटमेंट फैक्टर मानकर कर्मचारियों के पास लंबी अवधि के निवेश के लिए हर महीने एक बड़ी राशि बचेगी। यह बचत कुछ इस तरह की हो सकती है:

लेवल 1 के कर्मचारी: करीब ₹7200 से ₹9000 प्रति माह।

लेवल 7 के कर्मचारी: करीब ₹17960 से ₹22450 प्रति माह।

लेवल 13 के कर्मचारी: करीब ₹49240 से ₹61550 प्रति माह।

करियर के अलग-अलग चरणों के लिए रोहिताश्व सिन्हा ने अलग अलग सुझाव दिए हैं। युवा कर्मचारियों को इक्विटी एसआईपी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और साथ ही एनपीएस योगदान को जारी रखना चाहिए। मिड-करियर कर्मचारियों को अपने प्रमुख वित्तीय लक्ष्यों के इर्द-गिर्द एनपीएस, एसआईपी और डेट इन्वेस्टमेंट्स के बीच एक संतुलन बनाना चाहिए। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को वीपीएफ, एनपीएस और फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से पूंजी के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

ध्यान दें कि बिना किसी उचित वित्तीय योजना के सैलरी में हुई बढ़ोतरी बहुत तेजी से गायब हो सकती है। ऐसे में पहले से ही इस अतिरिक्त आय का उपयोग करने की योजना बनाना भविष्य में बड़ी संपत्ति बनाने में मदद कर सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

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