रिटायरमेंट बाद के खर्च के लिए अभी से इनवेस्ट करना जरूरी है। सही रिटायरमेंट प्लानिंग से तब आप चैन की नींद सो सकेंगे, जब आपके बैंक अकाउंट में हर महीने सैलरी के पैसे आने बंद हो जाएंगे। लेकिन, इस लक्ष्य को हासिल करना आसान काम नहीं है। खासकर तब जब इंटरेस्ट रेट में कमी का ट्रेंड है। अगस्त की मॉनेटरी पॉलिसी में आरबीआई ने रेपो रेट में कमी नहीं की। हालांकि, वह इस साल रेपो रेट में 1 फीसदी यानी 100 बेसिस प्वाइंट्स की कमी कर चुका है। इससे फिक्स्ड सेविंग्स प्रोडक्ट्स के इंटरेस्ट रेट में भी कमी आई है।
रिटायरमेंट बाद के खर्च के लिए कई लोग Annuity Plan में इनवेस्ट करते हैं। इस प्लान में नियमित रूप से कंट्रिब्यूट करने पर रिटायरमेंट के बाद गारंटीड रेगुलर इनकम होती है। पेमेंट के लिए आप मंथली, क्वार्टर्ली या एनुअल ऑप्शन सेलेक्ट कर सकते हैं। यह पेआउट फिक्स्ड पीरियड तक जारी रह सकता है या जीवन भर जारी रह सकता है। इसका चुनाव इनवेस्ट कर सकता है।
खरीदने के बाद इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं
जब इंटरेस्ट रेट घट रहा होता है तब एन्युटी प्लान का असल फायदा दिखता है। इसकी वजह यह है कि इस प्लान में रेगुलेर इनकम की गारंटी होती है। एन्युटी प्लान खरीदते वक्त जो इंटरेस्ट रेट होता है वह हमेशा के लिए लॉक हो जाता है। इसका मतलब है कि आपने एक बार एन्युटी प्लान खरीद लिया तो उसके इंटरेस्ट रेट में बाद में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने और घटने का फर्क उस प्लान पर नहीं पड़ेगा।
इंटरेस्ट रेट रिवाइज से पहले निवेश में फायदा
एन्युटी प्लान ऑफर करने वाली कंपनी घटते इंटरेस्ट रेट के बीच अपने इंटरेस्ट रेट को रिवाइज करती है तो अट्रैक्टिव इंटरेस्ट रेट पर प्लान (एन्युटी) में इनवेस्ट करने का मौका खत्म हो जाता है। इसका मतलब है कि एन्युटी प्लान ऑफर करने वाली कंपनी के इंटरेस्ट रेट को रिवाइज करने से पहले इस प्लान में इनवेस्ट करना समझदारी है।
ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर एन्युटी प्लान में इनवेस्ट करने का मतलब है कि पूरी जिदंगी आपके प्लान का इंटरेस्ट रेट हाई बना रहेगा। इसलिए इससे पहले की कंपनियां एन्युटी प्लान के इंटरेस्ट रेट में कमी करें, इस प्लान में इनवेस्ट करना समझदारी होगी।