आर्बिट्राज फंड्स की चमक लौटी, क्या आपको म्यूचुअल फंड की इस स्कीम में निवेश करना चाहिए?

जुलाई 2022 से मार्च 2023 के दौरान आर्बिट्राज फंडों से निवेशकों ने 34,678 करोड़ रुपये निकाल लिए थे। लेकिन, इस साल 1 अप्रैल से इन फंडों में 13,772 करोड़ रुपये का निवेश आया है। आर्बिट्राज फंडों के लिए कम से कम 65 फीसदी इनवेस्टमेंट इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में करना अनिवार्य होता है। आसान शब्दों में कहा जाए तो ये फंड कैश मार्केट में स्टॉक्स खरीदते हैं और साथ ही उसे ज्यादा कीमत पर फ्यूचर्स मार्केट में बेच देते हैं

अपडेटेड Aug 01, 2023 पर 5:16 PM
1 अप्रैल से डेट फंडों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) टैक्स बेनेफिट खत्म हो जाने के बाद से आर्बिट्राज फंड्स में निवेश बढ़ा है।

डेट म्यूचुअल फंडों (Debt Mutual Funds) के टैक्स के नियम में बदलाव के बाद आर्बिट्राज फंड्स (Arbitrage Funds) की चमक बढ़ी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे आर्बिट्राज फंड्स का रिटर्न अच्छा रहने की उम्मीद है। जुलाई 2022 से मार्च 2023 के दौरान आर्बिट्राज फंडों से निवेशकों ने 34,678 करोड़ रुपये निकाल लिए थे। लेकिन, इस साल 1 अप्रैल से इन फंडों में 13,772 करोड़ रुपये का निवेश आया है।

क्या है आर्बिट्राज फंड?

आर्बिट्राज फंडों के लिए कम से कम 65 फीसदी इनवेस्टमेंट इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में करना अनिवार्य होता है। आसान शब्दों में कहा जाए तो ये फंड कैश मार्केट में स्टॉक्स खरीदते हैं और साथ ही उसे ज्यादा कीमत पर फ्यूचर्स मार्केट में बेच देते हैं। इसका मकसद दोनों मार्केट में स्टॉक की कीमतों में अंतर का फायदा उठाना होता है।


डेट म्यूचुअल फंड के टैक्स नियमों में बदलाव

सरकार ने फाइनेंस एक्ट, 2023 में एक बड़ा फैसला लिया। इसके मुताबिक, डेट फंड्स और नॉन-इक्विटी म्यूचुअल फंडों की कुछ खास कैटेगरी से हुए कैपिटल गेंस पर टैक्स के ज्यादा रेट लागू होंगे। 1 अप्रैल, 2023 से इक्विटी में 35 फीसदी से कम इनवेस्टमेंट वाले म्यूचुअल फंडों से होने वाले प्रॉफिट को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस माना जाता है। इस पर इनवेस्टर्स के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इनवेस्टर्स ने इन फंडों में कितने समय के लिए निवेश किया है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।

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टैक्स नियमों में बदलाव का आर्बिट्राज फंड को फायदा

म्यूचुअल फंड के टैक्स नियमों में बदलाव का फायदा आर्बिट्राज फंड को हुआ है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के फाउंडर और सीईओ विशाल धवन ने कहा, "आर्बिट्राज फंड्स और डेट फंड्स के टैक्स के नियमों में बड़ा फर्क था। खासकर जो इनवेस्टर्स ज्यादा टैक्स ब्रैकेट में आते थे, उन पर ज्यादा असर पड़ता था। 1 अप्रैल से डेट फंडों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) टैक्स बेनेफिट खत्म हो जाने के बाद से आर्बिट्राज फंड्स में निवेश बढ़ा है।"

arbitrage funds

आर्बिट्राज फंड का कैसा रहेगा प्रदर्शन?

सवाल है कि क्या आर्बिट्राज फंड्स का प्रदर्शन अच्छा रहेगा? वैल्यू रिसर्च के मुताबिक, तीन महीने और 12 महीनों के दौरान आर्बिट्राज फंडों का औसत रिटर्न क्रमश: 1.6 फीसदी और 6 फीसदी रहा है। एडलवाइज म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, आर्बिट्राज फंडों में करीब 12,000 करोड़ रुपये का निवेश आया है। मार्केट के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच जाने, विदेशी फंडों के निवेश और फाइव-वीक एक्सपायरी की वजह से हमें आर्बिट्राज फंडों का रिटर्न ज्यादा रहने की उम्मीद है।

एक्सपर्ट्स की राय

ICICI Prudential Mutual Fund का मानना है कि आने वाले महीनों में आर्बिट्राज स्प्रेड कई बातों पर निर्भर करेगा। इनमें शॉर्ट टर्म रेट मूवमेंट और मार्केट डायरेक्शन शामिल हैं। ICICI Pru MF के इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी हेड चिंतन हरिया ने कहा कि हमारा मानना है कि यह तीन महीने और ज्यादा समय के लिए पैसे डालने का सही समय है। जेम फाइनेंशियल म्यूचुअल फंड ने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता को देखते हुए 2023 में मार्केट में उतार-चढ़ाव रहने के आसार हैं। इस उतार-चढ़ाव की वजह से आर्बिट्राज पोर्टफोलियो को अच्छा रिटर्न जेनरेट करने में मदद मिलेगी।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

धवन ने कहा कि फ्यूचर डायरेक्शन के लिहाज से अगर इनवेस्टर्स कम से कम तीन से छह महीने के लिए पैसा लगाना चाहता है तो आर्बिट्राज फंड्स पर विचार किया जा सकता है। अगर निवेशक सिर्फ कुछ दिन या हफ्तों के लिए पैसा लगाना चाहते हैं तो उन्हें आर्बिट्राज फंड में निवेश के बारे में नहीं सोचना चाहिए।

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