आप ज्यादा पेंशन की स्कीम में अप्लाई करने जा रहे हैं? इन बातों का जरूर ध्यान रखें

EPFO की ज्यादा पेंशन स्कीम के लिए सब्सक्राइबर्स अप्लाई तो करना चाहते हैं लेकिन, इससे पहले वे इसके बारे में कई बातें जानना चाहते हैं। जैसे इसमें उन्हें कितनी पेंशन मिल सकती है, इसका उनके EPF पर क्या असर पड़ेगा, पेंशन अमाउंट का कैलकुलेशन किस तरह से होगा

अपडेटेड Mar 04, 2023 पर 12:36 PM
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सबसे पहले यह बता देना जरूरी है कि अभी EPFO ने पेंशन के कैलकुलेशन के तरीके के बारे में नहीं बताया है। लेकिन, उसने कई बातें बता दी हैं। इससे आपको इस स्कीम को ठीक से समझने में काफी मदद मिलेगी।

एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) ने ज्यादा पेंशन की स्कीम में अप्लाई के लिए प्रोसेस बता दिया है। दरअसल, नवंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ को ज्यादा पेंशन की स्कीम का फायदा उठाने का एक मौका सब्सक्राइबर्स को देने का निर्देश दिया था। इसके बाद ईपीएफओ ने इसके बारे में सर्कुलर जारी कर दिया है। EPF के सब्सक्राइबर्स के मन में ज्यादा पेंशन की स्कीम को लेकर कई सवाल हैं। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि मौजूदा स्कीम और ज्यादा पेंशन की स्कीम के बीच क्या अंतर है, उन्हें क्या ज्यादा पेंशन की स्कीम के लिए अप्लाई करना चाहिए, ज्यादा पेंशन स्कीम में उनकी पेंशन कितनी बढ़ जाएगी?

कैसे होता है पेंशन का कैलकुलेशन?

सबसे पहले यह बता देना जरूरी है कि अभी EPFO ने पेंशन के कैलकुलेशन के तरीके के बारे में नहीं बताया है। लेकिन, उसने कई बातें बता दी हैं। इससे आपको इस स्कीम को ठीक से समझने में काफी मदद मिलेगी। यह मसला थोड़ा जटिल है, इसलिए आपको हर चीज को ध्यान से समझना होगा। हो सकता है कि आपको एक ही चीज को समझने के लिए एक से ज्यादा बार पढ़ना पड़े।


सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि पेंशन का कैलकुलेशन किस तरह होता है। पहले से वेबसाइट्स पर पेंशन के कैलकुलेशन के लिए टूल्स उपलब्ध हैं। लेकिन, ऐसा कोई टूल उपलब्ध नहीं है, जो आपको यह बताए कि मौजूदा पेंशन की स्कीम और ज्यादा पेंशन की स्कीम में से कौन आपके लिए फायदेमंद है। अगर ऐसा कोई टूल होता जो यह बता देता कि ज्यादा पेंशन की स्कीम में कितना फायदा होगा तो बहुत अच्छा होता।

यह है फॉर्मूला

पेंशन के कैलकुलेशन के लिए पेंशनेबल सैलरी को पेंशनेबल सर्विस (जितने साल तक आपने EPS में कंट्रिब्यूशन किया है) से मल्टीप्लाई (Multiply) किया जाता है। फिर जो Figure आता है उसे 70 से डिवाइड (Divide) किया जाता है। 22 अगस्त, 2014 को जारी नोटिफिकेशन से पहले पेंशन सैलरी का मतलब अंतिम 12 महीनों की औसत सैलरी से था। इस नोटिफिकेशन के बाद इसे बदल दिया गया और अंतिम 60 महीने की औसत सैलरी को पेंशनेबल सैलरी मानी गई। हालांकि, इस बदलाव को कोर्ट में चुनौती दी गई। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट का फैसला EPFO के पक्ष में आया।

नियमों में बदलाव के बाद अगर अंतिम 12 महीनों में सब्सक्राइबर्स की सैलरी बढ़ी है तो उसकी पेंशनेबल सैलरी कम हो सकती है। अगर अंतिम 12 महीनों में सैलरी घटाई गई है तो उसके पेंशनबेल सैलरी ज्यादा हो सकती है।

अभी कोई एंप्लॉयी (सब्सक्राइबर) पेंशन के लिए तब हकदार होता है, जब कम से कम वह 10 साल तक EPS में कंट्रिब्यूट करता है। ऐसा नहीं होने पर पेंशन फंड में जमा पैसा उसे एकमुश्त दे दिया जाता है। इसलिए अगर ज्यादा पेंशन स्कीम में अप्लाई करने के लिए सोच रहे हैं तो आपको यह कैलकुलेट कर लेना चाहिए कि रिटायरमेंट से पहले आपकी सर्विस कम से कम 10 साल पूरी हो जानी चाहिए।

कैलकुलेशन का आधार

पेंशन का कैलकुलेशन EPS में जमा फंड के आधार पर होता है। अगर आप ज्यादा पेंशन की स्कीम के लिए अप्लाई करते हैं तो ईपीएफ (EPF) में जमा अतिरिक्त पैसा इंटरेस्ट के साथ ईपीएस (EPS) में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इससे EPF में जमा आपका पैसा घट जाएगा। इसलिए अगर आपने कुछ फाइनेंशियल टारगेट जैसे बच्चे की शिक्षा या शादी के लिए EPF के पैसे के इस्तेमाल करने के बारे में सोचा हो तो आपको पेंशन की जगह EPF में ज्यादा कंट्रिब्यूशन जारी रखना चाहिए। इससे आपको रिटायर होने पर अच्छी एकमुश्त रकम मिल जाएगी।

टैक्स का क्या होगा?

यहां टैक्स का भी पहलू है। EPF में पैसा रखना टैक्स के लिहाज से ज्यादा फायदेमंद होता है। अभी अगर आप 5 साल या ज्यादा नौकरी करने के बाद या रिटायरमेंट पर EPF का पैसा निकालते हैं तो इस पर टैक्स-छूट मिलती है। लेकिन, पेंशन अमाउंट टैक्स के दायरे में आता है।

पेंशन में अतिरिक्त कंट्रिब्यूशन

यह ध्यान में रखना जरूरी है कि 2014 के EPFO के नोटिफिकेशन में कहा गया था कि प्रति माह 15,000 रुपये से ज्यादा की सैलरी पर अतिरिक्त 1.6 फीसदी का कंट्रिब्यूशन पेंशन में करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन के लिए अतिरिक्त कंट्रिब्यूशन की EPFO की डिमांग को खारिज नहीं किया। उसने इसके लिए छह महीने के अंतर कानून में संसोधन करने का निर्देश दिया था।

सवाल है कि क्या पेंशन के कैलकुलेशन के तरीके में किसी तरह का बदलाव हो सकता है? इस बारे में पक्ते तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन, एक बात तो पक्की है कि आपका पेंशन अमाउंट आपके पेंशन फंड में डिपॉजिट फंड और उस पर मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करेगा।

एन्युटी प्लान

आखिर में आपको यह बता दूं कि मार्केट में पहले से कई एन्युटी प्लांस हैं। EPF से मिले पैसे से कोई एक एन्युटी प्लान खरीदा जा सकता है। लेकिन, EPS को सरकार की गारंटी हासिल है, इसलिए यह गारंटी लोगों को इसमें कंट्रिब्यूट करने के लिए अट्रैक्ट कर सकती है।

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