आज के दौर में घर, गाड़ी या शिक्षा के लिए लोन लेना आम बात हो गई है। लेकिन लोन की EMI (Equated Monthly Installment) अगर आपकी आय का बड़ा हिस्सा खा जाए, तो यह धीरे-धीरे वित्तीय संकट में बदल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि घर की कुल आय का 30-40% से अधिक EMI पर खर्च करना खतरनाक हो सकता है।
मान लीजिए किसी परिवार की मासिक आय 1 लाख रुपये है। अगर वे 30-40 हजार रुपये तक EMI भरते हैं, तो बाकी रकम से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल जरूरतें और बचत आराम से हो सकती है। लेकिन अगर EMI 60-70 हजार तक पहुंच जाए, तो रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो जाएगा और बचत लगभग खत्म हो जाएगी।
- EMI को आय के 30-40% तक सीमित रखने से परिवार के पास आपातकालीन खर्चों के लिए पर्याप्त पैसा बचता है।
- बचत और निवेश की आदत बनी रहती है, जिससे भविष्य सुरक्षित होता है।
- अचानक नौकरी जाने या आय घटने की स्थिति में भी परिवार पूरी तरह संकट में नहीं फंसता।
नुकसान अगर नियम तोड़ा जाए:
- EMI ज्यादा होने पर परिवार को रोजमर्रा की जरूरतों में कटौती करनी पड़ती है।
- बचत और निवेश रुक जाते हैं, जिससे भविष्य असुरक्षित हो जाता है।
- मानसिक तनाव बढ़ता है और परिवार आर्थिक दबाव में जीने लगता है।
एक मध्यमवर्गीय परिवार ने नया घर लेने के लिए बड़ा लोन लिया। शुरुआत में उत्साह था, लेकिन हर महीने भारी EMI भरते-भरते बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल खर्च और छोटी-छोटी खुशियाँ पीछे छूट गईं। ऐसे हालात में परिवार को लगता है कि घर का सपना पूरा हुआ, लेकिन जीवन की सहजता खो गई। यही वजह है कि वित्तीय विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि EMI को आय के 30-40% तक ही सीमित रखें।