हर महीने की सैलरी का बड़ा हिस्सा अगर EMI में चला जाता है और बाकी खर्चों के लिए हाथ तंग पड़ने लगता है, तो यह तनाव का कारण बन सकता है। घर का लोन, कार की किस्त, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड बिल मिलकर बजट को बिगाड़ देते हैं। ऐसे हालात में यह समझना जरूरी है कि आखिर कितना कर्ज लेना सही है। इसका जवाब देता है Debt-to-Income Ratio (DTI)।
यह आपकी मासिक आय और कुल EMI के बीच का अनुपात है। इसे निकालने का फॉर्मूला है:
कुल EMI ÷ मासिक आय × 100।
DTI आपकी वित्तीय सेहत का बैरोमीटर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह अनुपात 40% से ऊपर चला जाए, तो यह आपके बजट और भविष्य की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है। इसका मतलब है कि आपकी आय का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में जा रहा है और बचत या अन्य खर्चों के लिए जगह नहीं बच रही।
- समय-समय पर DTI जांचें ताकि पता चले कि कर्ज का बोझ बढ़ रहा है या नहीं।
- अगर अनुपात ज्यादा है, तो नए लोन लेने से बचें और पुराने कर्ज को जल्द चुकाने की कोशिश करें।
- बजट प्लानिंग में DTI मदद करता है, जिससे आप अपनी आय का सही इस्तेमाल कर पाते हैं।
कई लोग सपनों को पूरा करने के लिए बिना सोचे-समझे लोन ले लेते हैं घर खरीदना, कार लेना या अचानक खर्चों के लिए पर्सनल लोन। लेकिन जब हर महीने की सैलरी का बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है, तो तनाव बढ़ता है और जीवन की खुशियां कम हो जाती हैं। Debt-to-Income Ratio आपको यह सोचने पर मजबूर करता है कि सपनों को पूरा करने के साथ-साथ वित्तीय संतुलन भी उतना ही जरूरी है।
DTI सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आपकी वित्तीय सेहत का आईना है। अगर आप चाहते हैं कि EMI का बोझ आपकी जिंदगी पर हावी न हो, तो हर लोन लेने से पहले DTI जरूर जांचें। यह आदत आपको तनाव से बचाएगी और आपके भविष्य को सुरक्षित बनाएगी।