डिजिटल बैंकिंग ने हमारी जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है। आज हम कैशलेस ट्रांजैक्शन, ऑनलाइन शॉपिंग और एटीएम से पैसे निकालने जैसी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को ठग रहे हैं। इनमें सबसे खतरनाक है ATM कार्ड क्लोनिंग फ्रॉड।
कार्ड क्लोनिंग वह प्रक्रिया है जिसमें अपराधी आपके डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जानकारी चोरी कर लेते हैं और उसका नकली (डुप्लीकेट) कार्ड बना लेते हैं। इस क्लोन कार्ड का इस्तेमाल करके वे आपके खाते से पैसे निकाल सकते हैं या ऑनलाइन शॉपिंग कर सकते हैं। कई बार यह ठगी इतनी चुपचाप होती है कि पीड़ित को तब तक पता नहीं चलता जब तक उसका बैलेंस गायब न हो जाए।
- स्किमिंग डिवाइस: एटीएम मशीन पर लगाया गया छोटा उपकरण कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप की जानकारी कॉपी कर लेता है।
- छिपे हुए कैमरे: पिन डालते समय आपका पासवर्ड रिकॉर्ड किया जा सकता है।
- नकली कीपैड: असली कीपैड की जगह नकली कीपैड लगाकर पिन चोरी किया जाता है।
- ऑनलाइन ट्रांजैक्शन: कई बार फर्जी वेबसाइट या असुरक्षित नेटवर्क पर कार्ड डिटेल डालने से भी जानकारी चोरी हो जाती है।
- हमेशा बैंक शाखा या सुरक्षित जगह पर लगे एटीएम का ही इस्तेमाल करें।
- पिन डालते समय कीपैड को हाथ से ढकें ताकि कोई कैमरा रिकॉर्ड न कर सके।
- बैंक की SMS/ईमेल अलर्ट सर्विस एक्टिव रखें ताकि हर ट्रांजैक्शन की जानकारी तुरंत मिले।
- नियमित रूप से खाते का बैलेंस और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री चेक करें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक को सूचित करें और कार्ड ब्लॉक कराएं।
- ऑनलाइन शॉपिंग करते समय केवल सुरक्षित और भरोसेमंद वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें।
साइबर ठग अब संगठित गैंग के रूप में काम कर रहे हैं। वे अलग-अलग राज्यों से ऑपरेट करते हैं और रोज नए तरीके ईजाद करते हैं। डिजिटल पेमेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल ने उन्हें और मौके दिए हैं। यही वजह है कि कार्ड क्लोनिंग फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है और आम लोगों को निशाना बना रहा है।