पूर्व फंड मैनेजर और एक्सिस म्यूचुअल फंड (Axis Mutual Fund) के चीफ ट्रेडर विरेश जोशी (Viresh Joshi) ने एक्सिस म्यूचुअल फंड पर केस किया है। इसमें उन्होंने फ्रंट-रनिंग (Front-running) के एक संदिग्ध मामले में उन्हें नौकरी से हटाने के एसेट मैनेजमेंट कंपनी के फैसले को चुनौती दी है।
एक्सिस एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (Axis AMC) ने फ्रंट-रनिंग के एक मामले में जोशी को 18 मई को बर्खास्त कर दिया था। इस मामले में जोशी और उनके पूर्व सहकर्मी और एसिस्टेंट फंड मैनेजर दीपक अग्रवाल के खिलाफ जांच चल रही है। कंपनी ने 20 मई को अग्रवाल को भी बर्खास्त कर दिया था। इससे पहले कंपनी ने जोशी को 3 मई को निलंबित किया था।
कोर्ट में केस करने के बाद जोशी के वकील ने 20 मई को एक लीगल नोटिस फंड हाउस को भेजा था। इसमें यह पूछा गया है कि जब कथित फ्रंट-रनिंग केस में जांच चल रही है तब उसके नतीजे आने से पहले उन्हें क्यों बर्खास्त किया गया है।
एक्सिस एएमसी ने अब तक यह नहीं बताया है कि किसी तरह की गड़बड़ी हुई थी, जिसकी जांच वह कर रही है। लेकिन, वह कहती रही है कि सिक्योरिटी लॉ का कथित रूप से उल्लंघन हुआ है।
यह मामला मई की शुरुआत में सामने आया, जब फंड हाउस ने अपने इक्विटी फंड मैनेजमेंट में बदलाव किया था। उस समय एक्सिस एएमसी ने बदलाव की वजह के बारे में कुछ नहीं बताया। हालांकि, 9 मई को इनवेस्टर्स और डिस्ट्रिब्यूटर्स को मेल भेजा गाया। इसमें एक्सिस एएमसी के सीईओ और एमडी चंद्रेश निगम ने कहा कि फंड हाउस ने जांच शुरू कर दी है। मेल में यह भी कहा गया कि जांच के लिए 'रेप्यूटेड एक्सटर्नल एडवाइजर्स' नियुक्त किए गए हैं।
जोशी ने कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में अपनी बर्खास्तगी को गलत बताते हुए इस वजह से हुई मानसिक पीड़ा का जिक्र किया है। इसके लिए 54 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की गई है। जोशी पिछले करीब 20 साल से कैपिटल मार्केट से जुड़े हुए हैं। वह 2009 से एक्सिस बैंक के साथ हैं। एक्सिस एएमसी में नौकरी करने से पहले उन्होंने बीएनपी पारिबा और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज में नौकरी की हैं।
जोशी का केस लड़ने वाली कंपनी मनसुखलाल, हीरालाल एंड कंपनी एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स के वकीलों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में यह केस किया है। मनसुखलाल की पार्टनर पूर्वी एशेर ने कहा, 'एक्सिस एएमसी ने जो टर्मिनेशन लेटर मेरे क्लाइंट जोशो को भेजा है, वह इनवैलिड है।'
फ्रंट-रनिंग मामले में म्यूचुअल फंड जैसी कंपनी का डीलर खरीदे जाने वाले शेयर या सिक्योरटीज से जुड़ी अपनी जानकारियों का इस्तेमाल खुद के मुनाफा कमाने के लिए करता है। वह मुनाफा कमाने के लिए फंड हाउस की तरफ से ऑर्डर प्लेस होने से पहले शेयर खरीद लेता है। फंड हाउस की तरफ से खरीदारी का ऑर्डर प्लेस होते ही शेयरों की कीमतें बढ़ जाती हैं, क्योंकि फंड हाउस बल्क डील करते हैं।