Bank FD: ₹10 लाख अकाउंट में है? कैसे करें FD की ज्यादा रिटर्न के साथ सुरक्षित रहें आपका पैसा, जानिए

FD Rules: अगर आपके पास ₹10 लाख की बचत है और आप उसे FD में निवेश करना चाहते हैं, तो सिर्फ एक बैंक में पैसा रखना जोखिम भरा हो सकता है। DICGC के नियमों के अनुसार केवल ₹5 लाख तक का फंड ही बीमित होता है। लेकिन सही वित्तीय रणनीति, लैडरिंग तकनीक और पैसे को अलग-अलग बैंकों व टेन्योर में बांटकर आप न सिर्फ शानदार ब्याज पा सकते हैं, बल्कि अपनी पूरी जमापूंजी को 100% सुरक्षित भी रख सकते हैं। जानिए FD में ज्यादा मुनाफा कमाने के सबसे भरोसेमंद टिप्स

अपडेटेड Oct 12, 2026 पर 1:34 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
अगर आपका यह पूरा पैसा किसी एक ही बैंक में जमा है, तो आपका पूरा फंड सुरक्षित नहीं है

Bank FD Rules: फिक्स्ड डिपॉजिट को आमतौर पर सबसे कम जोखिम वाला और सुरक्षित निवेश माना जाता है। वैसे आपके पास ₹10 लाख या ₹20 लाख की बचत है और आप इसे एफडी में जमा कर रहे हैं, तो आपको एक बेहद महत्वपूर्ण नियम जानना जरूरी है। नियम ये है कि अगर आपका यह पूरा पैसा किसी एक ही बैंक में जमा है, तो आपका पूरा फंड सुरक्षित नहीं है।

भारतीय रिजर्व बैंक की सहायक कंपनी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) प्रति जमाकर्ता, प्रति बैंक अधिकतम ₹5 लाख तक का ही बीमा कवर प्रदान करती है। इस ₹5 लाख की सीमा में मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं।

एक ही बैंक में कई FD बनाने से नहीं बढ़ता बीमा कवर


अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर वे एक ही बैंक में ₹2-2 लाख की 5 अलग-अलग एफडी बना लेंगे, तो उनका ₹10 लाख का पूरा फंड सुरक्षित हो जाएगा। हालांकि, DICGC के नियम के अनुसार ऐसा बिल्कुल नहीं है:

पैसे की टैगिंग/कैलकुलेशन: अगर आपकी एक ही बैंक में कई FDs हैं, तो DICGC बीमा की गणना करते समय उन सभी को एक साथ जोड़ देता है।

बचत खाता + एफडी: मान लीजिए आपके पास एक ही बैंक में ₹2-2 लाख की 3 एफडी (कुल ₹6 लाख) हैं और ₹1 लाख सेविंग्स अकाउंट में हैं, तो कुल जमा ₹7 लाख माना जाएगा। लेकिन बैंक डूबने या संकट में आने पर आपको अधिकतम ₹5 लाख ही वापस मिलेंगे।

ब्याज भी शामिल: अगर आपका मूलधन ₹4.8 लाख है और उस पर मिला ब्याज कुल रकम को ₹5 लाख से ऊपर ले जाता है, तब भी इंश्योरेंस कवर ₹5 लाख की सीमा से अधिक नहीं बढ़ेगा।

विभिन्न शाखाएं: एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में खाता खोलने से भी बीमा सीमा अलग-अलग नहीं होती।

अपने पैसे को 100% सुरक्षित कैसे बनाएं?

अगर आपके पास बड़ी रकम है, तो अपने जोखिम को कम करने के लिए इन तरीकों को अपनाएं:

अलग-अलग बैंकों में बांटें पैसा: DICGC प्रत्येक अलग बीमित बैंक को अलग संस्था मानता है। उदाहरण के लिए, अगर आप ₹15 लाख की रकम को 3 अलग-अलग बैंकों में ₹5-₹5 लाख की एफडी में बांट देते हैं, तो आपकी पूरी रकम (₹15 लाख) अलग-अलग ₹5 लाख के बीमा कवर के तहत सुरक्षित रहेगी।

अलग-अलग कानूनी क्षमता: एक ही बैंक में अगर खाते अलग-अलग ओनरशिप/कैपेसिटी (जैसे- व्यक्तिगत खाता, जॉइंट अकाउंट, या HUF खाता) के तहत खुले हैं, तो नियम के तहत उनके लिए अलग से बीमा कवर मिल सकता है।

जब कोई बैंक संकट में आता है तो क्या होता है?

बैंक के लिक्विडेशन या RBI द्वारा पाबंदी लगाए जाने की स्थिति में DICGC का इंश्योरेंस फ्रेमवर्क लागू होता है। संबंधित बैंक को निर्धारित समय सीमा के भीतर जमाकर्ताओं की जानकारी जमा करनी होती है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत जमाकर्ता के क्लेम को प्रोसेस करके अधिकतम ₹5 लाख तक का भुगतान किया जाता है।

बड़ी FD कराने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

टोटल एक्सपोजर जांचें: एक ही बैंक में रखी अपनी कुल राशि (सेविंग्स + एफडी + आरडी) का हिसाब लगाएं।

एलोकेशन रणनीति: ₹10 या ₹15 लाख जैसी बड़ी रकम को कम से कम 2 से 3 अलग-अलग शेड्यूल बैंकों में बांटकर निवेश करें।

अन्य मापदंड: बैंक चुनते समय केवल इंश्योरेंस ही नहीं, बल्कि ब्याज दरें, लॉक-इन अवधि और प्री-मैच्योर विदड्रॉल के नियमों का भी ध्यान रखें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।