मैंने हाल में सालाना 2000 रुपये फीस पर बैंक लॉकर लिया है, लॉकर में रखा गोल्ड चोरी होने पर क्या होगा?

RBI का नियम कहता है कि कुछ स्थितियों में बैंक की जवाबदेही होती है। अगर आग लगने, चोरी, डकैती, इमारत ढहने या किसी बैंक एंप्लॉयी के फ्रॉड की वजह से ज्वेलरी को नुकसान होता है, तो बैंक की जिम्मेदारी बनती है। लेकिन, सिर्फ एक सीमा तक ही

अपडेटेड Jan 26, 2026 पर 8:39 PM
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आप लॉकर में जो ज्वेलरी रखते हैं बैंक उसका इंश्योरेंस नहीं कराते हैं।

गोल्ड ज्वेलरी को सुरक्षित रखना एक बड़ा चैलेंज है। कई लोगों को बैंक लॉकर में गोल्ड ज्वेलरी रखना सुरक्षित लगता है। हालांकि, बैंक लॉकर की सालाना फीस चुकानी पड़ती है। फिर भी लोगों को यह ऑप्शन फायदेमंद लगता है। वे बैंक लॉकर में रखने के बाद चिंतामुक्त हो जाते हैं। लेकिन, अगर बैंक लॉकर से गोल्ड ज्वेलरी चोरी हो जाए तो क्या होगा?

बैंक लॉकर के बारे में आरबीआई के नियम 

RBI का नियम कहता है कि कुछ स्थितियों में बैंक की जवाबदेही होती है। अगर आग लगने, चोरी, डकैती, इमारत ढहने या किसी बैंक एंप्लॉयी के फ्रॉड की वजह से ज्वेलरी को नुकसान होता है, तो बैंक की जिम्मेदारी बनती है। लेकिन, सिर्फ एक सीमा तक ही। इसके लिए बैंक लॉकर की सालाना फीस की 100 गुनी लिमिट तय है। इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं।


गोल्ड की वैल्यू और बैंक के कंपनसेशन के बीच फर्क

मान लीजिए आपके बैंक लॉकर की सालाना फीस 2,000 रुपये है। ऐसे में बैंक मैक्सिमम 2 लाख रुपये तक की क्षतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार है। इसके मुकाबले बैंक लॉकर में रखी ज्वेलरी की वैल्यू कई गुनी होती है। आज 2 लाख रुपये में तो मुश्किल से गले का छोटा हार या एक जोड़ी चूड़ियां आएंगी। इसका मतलब है कि अगर किसी परिवार ने अपनी पूरी ज्वेलरी बैंक लॉकर में रखी है तो उसकी वैल्यू और बैंक के मैक्सिमम कंपनसेशन के बीच बड़ा फर्क हो सकता है।

इन स्थितियों में गोल्ड ज्वेलरी को नुकसान होने पर ग्राहक की जिम्मेदारी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादातर लोग यह मानकर चलते हैं कि बैंक लॉकर में रखा उनका सोना पूरी तरह सुरक्षित है। उन्हें लगता है कि किसी तरह की अनहोनी होने पर बैंक उनके नुकसान की भरपाई करेगा। लेकिन, यह सच नहीं है। कुछ स्थितियों में तो गोल्ड ज्वेलरी को हुए नुकसान पर बैंक की कोई जवाबदेही नहीं बनती है। अगर बाढ़, भूकंप, बिजली गिरने या किसी प्राकृतिक आपदा से गोल्ड ज्वेलरी को नुकसान होता है तो बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

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बैंक लॉकर में रखे और निकाले जाने वाली ज्लेवरी का रिकॉर्ड नहीं रखते

इसका मतलब है कि भले ही आपने गोल्ड ज्वेलरी बैंक के सुरक्षित दिखने वाले वॉल्ट में रखी है, लेकिन उसकी जिम्मेदारी बैंक की नहीं बल्कि ग्राहक की होती है। ज्यादा रेंट वाले लेकर या बड़े बैंक में लॉकर ओपन करने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। आप लॉकर में जो ज्वेलरी रखते हैं बैंक उसका इंश्योरेंस नहीं कराते हैं। उन्हें ग्राहक को इस पर इंश्योरेंस ऑफर करने की इजाजत नहीं है। इसकी वजह यह है कि बैंक को यह पता नहीं होता कि ग्राहक ने लॉकर में कितना ज्वेलरी रखा है। इसकी कोई लिस्ट नहीं है। बैंक के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होता कि ग्राहक ने कब क्या रखा और कब क्या निकाला।

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