सरकार ने सरकारी बैंकों (PSU Banks) को बॉन्ड्स में अपने निवेश के बारे में बताने को कहा है। इनमें देश का सबसे बड़ा बैंक State Bank of India (SBI) भी शामिल है। अमेरिका में बैंकिंग क्राइसिस के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। अमेरिका में बैंकिंग क्राइसिस की बड़ी वजह बॉन्ड्स में बैंकों का निवेश माना जा रहा है। इंडिया में जिन बैंकों को अपने बॉन्ड पोर्टफोलियो की जानकारी देने के लिए कहा गया है, उनमें Punjab National Bank (Bank), Bank of Baroda (BoB) जैसे बड़े बैंक शामिल हैं। मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है। बैंक अपना काफी पैसा बॉन्ड्स में निवेश करते हैं।
सिर्फ सरकारी बैंकों से मांगी गई जानकारी
एक सूत्र ने मनीकंट्रोल को बताया, "सरकार ने सिर्फ बड़े बैंकों को अपने बॉन्ड पोर्टफोलियो के डेटा शेयर करने को कहा है। इनमें SBI, PNB और BoB शामिल हैं। उन्हें बॉन्ड पोर्टफोलियो की अपनी स्थिति चेक करने को कहा गया है। ऐसा लगता है कि सरकार उन बैंकों से यह जानकारी नहीं मांगेगी, जिनका बॉन्ड पोर्टफोलियो छोटा है। इनमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं।"
अमेरिका में बॉन्ड में निवेश पर बैंकों को बड़ा घाटा
पिछले साल की शुरुआत में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व सहित दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने इंटरेस्ट रेट्स बढ़ाने शुरू किए थे। इसका असर बॉन्ड्स पर पड़ा। बॉन्ड्स की कीमतें गिरनी शुरू हो गईं और यील्ड बढ़ने लगी। इससे बॉन्ड्स में ज्यादा निवेश करने वाले बैंकों को काफी नुकसान हुआ। अमेरिका में Silicon Valley Bank के डूबने की यह सबसे बड़ी वजह रही।
25 मार्च को बैंकरों के साथ सरकार की बैठक
सूत्र ने बताया, "इंडिया में खरीद और बिक्री के लिए बॉन्ड्स की उपलब्धता की लिमिट तय है। इस वजह से हमें अमेरिका जैसी प्रॉब्लम का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसलिए सिर्फ सरकारी बैंकों को बॉन्ड पोर्टफोलियो की जानकारी देने को कहा गया है। यह सावधानी के लिए उठाया गया कदम है।" यह कदम तब उठाया गया है, जब फाइनेंस मिनिस्ट्री की बैठक 25 मार्च को सरकारी बैंकों के साथ होने वाली है। इसमें बैंकिंग इंडस्ट्री की ग्रोथ पर चर्चा होगी। बैंकरों ने इस मीटिंग की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इंडियन बैंक मजबूत स्थिति में हैं।
इंडिया में बैंकों की स्थिति मजबूत
एक दूसरे सूत्र ने बताया, "इंडियन बैंक बहुत मजबूत स्थिति में हैं। RBI यह देखने के लिए बैठक कर रहा है कि बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है या नहीं। कोरोना की महामारी शुरू होने पर भी ऐसा देखने को मिला था। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी बैठक की थी। इसका मकसद भरोसा बनाए रखना था।"