एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में एचडीएफसी (HDFC Ltd.) का विलय होने जा रहा है। यह प्रोसेस पूरा होने में एक से डेढ़ साल का समय लग जाएगा। इस बीच दोनों कंपनियों के कस्टमर्स को पहले की तरह सेवाएं मिलती रहेंगी। विलय (HDFC Bank and HDFC Merger) की खबर आने के बाद एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी के ग्राहकों के मन में कई सवाल हैं। आइए हम ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।
विलय के बाद दोनों कंपनियों के ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
मर्जर का प्रोसेस पूरा होने तक एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी लिमिटेड का कामकाज वैसी ही चलता रहेगा, जैसा अभी चल रहा है। विलय के बाद दोनों कंपनियों के कस्टमर्स को फायदा होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है विलय के फैसले से दोनों को फायदा होगा। यस सिक्योरिटीज के लीड एनालिस्ट शिवाजी थपलियाल ने कहा, "मॉर्टगेज बिजनेस को एचडीएफसी बैंक के लो-कॉस्ट फंड्स का फायदा होगा। एचडीएफसी बैंक को मॉर्टगेज बिजनेस में एचडीएफसी के अनुभव से लाभ होगा। "
चूंकि एचडीएफसी बैंक की फंड की लागत कम है, जिससे इसका फायदा इसके होम लोन कस्टमर्स को मिलेगा। एचडीएफसी बैंक के होम लोन के ग्राहकों का इंट्रेस्ट रेट कम रहने की उम्मीद है। मायमनीमंत्रा के फाउंडर राज खोसला ने कहा, "विलय के बाद होम लोन के नए कस्टमर्स को बराबर या कम इंट्रेस्ट रेट पर लोन मिल सकता है।" हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि विलय में 12 से 18 महीने लग सकते हैं, इसलिए अभी इंट्रेस्ट रेट के बारे में कहना ठीक नहीं होगा।
अभी एनबीएफसी को एक्सटर्नल बेंचमार्क नियम का पालन नहीं करना पड़ता है, जबकि बैंकों को करना पड़ता है। एचडीएफसी बैंक से होम लोन लेने वाले कस्टमर्स पर इसका क्या फर्क पड़ेगा?
अभी एचडीएफसी लिमिटेड के होम लोन का इंट्रेस्ट रेट इंडस्ट्री में सबसे कम है। यह सिर्फ 6.7 फीसदी है। बैंकबाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी ने कहा, "हमें विलय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी होम लोन का इंट्रेस्ट रेट कम रहने की उम्मीद है। एक्सटर्नल बेंचमार्किंग व्यवस्था अपनाने के बाद होम लोन का इंट्रेस्ट रेट ज्यादा बढ़ने की उम्मीद नहीं है। ज्यादा से ज्यादा इसमें कुछ बेसिस प्वॉइंट्स की वृद्धि हो सकती है।" उन्होंने कहा कि इसलिए एचडीएफसी के होम लोन के ग्राहकों को डरने की जरूरत नहीं है।
मेरा एचडीएफसी बैंक में डिपॉजिट है, विलय के बाद डिपॉजिट पर मिलने वाले इंट्रेस्ट रेट पर क्या असर पड़ेगा?
डिपॉजिट मुख्य रूप से डिपॉजिटर और बैंक (या वित्तीय संस्थान) के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट होता है। शेट्टी ने कहा, "डिपॉजिट रेट और उससे जुड़े नियम और शर्तों में डिपॉजिट मैच्योर होने तक कोई बदलाव नहीं होगा।" इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपने एचडीएफसी में कोई डिपॉजिट कराया है, जिसका इंट्रेस्ट रेट 6.5 फीसदी है और मैच्योरिटी मार्च 2026 है तो इंट्रेस्ट रेट मैच्योरिटी तक इतना ही बना रहेगा। मैच्योरिटी तक विलय का प्रोसेस पूरा हो जाएगा। फिर डिपॉजिट रिन्यू होने के वक्त उसके इंट्रेस्ट रेट में बदलाव हो सकता है।
पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, ऑटो लोन के लिए अप्लाई करने या एचडीएफसी बैंक की तरफ से प्रोडक्ट्स की क्रॉस-सेलिंग को देखते हुए मुझे किन बातों का ध्यान रखना होगा?
एचडीएफसी बैंक के कस्टमर्स को कई तरह के प्रोडक्ट्स उपलब्ध होंगे। अभी एचडीएफसी के 70 फीसदी कस्टमर्स का एचडीएफसी बैंक में अकाउंट नहीं है। इससे पता चलता है कि प्रोडक्ट्स की क्रॉस-सेलिंग की काफी संभावना मौजूद है। उधर, एचडीएफसी बैंक के 80 फीसदी कस्टमर्स ने होम लोन नहीं लिया है। थपलियाल ने कहा, "अभी लोन के सैंक्शन और डिस्बर्सल में आने वाली दिक्कतें विलय के बाद दूर हो जाएंगी। एचडीएफसी बैंक को अपने ग्राहकों को जीवन बीमा और गैर-जीवन बीमा प्रोडक्ट्स बेचने का मौका मिलेगा।"
मेरा एचडीएफसी में होम लोन अकाउंट है और मैंने डिपॉजिट भी किया है, क्या मेरे अकाउंट नंबर में बदलाव हो सकता है?
हां, विलय के बाद आपके अकाउंट नंबर में बदलाव हो सकता है। शेट्टी ने कहा, "यह एक लंबा प्रोसेस है। हमने सरकारी बैंकों के विलय में यह देख चुके हैं। अभी यह कहना मुश्किल हैं कि आपको किस-किस तरह के बदलाव का सामना करना पड़ेगा। लेकिन, यह तय है कि एचडीएफसी बैंक आपको इस बारे में हर जानकारी देगा।"