RBI ने फ्रॉड के 5 तरीकों से किया सावधान, जान लें तो नहीं होंगे शिकार

आरबीआई (RBI) ने लोगों को फ्रॉड के बारे में बताने के लिए एक बुकलेट जारी की है। इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है। पार्ट A और B में बैंक और नॉन-बैंकिंग कंपनियों से जुड़े फ्रॉड के बारे में बताया गया है

अपडेटेड Mar 22, 2022 पर 7:57 PM
लोग बैंक, इंश्योरेंस कंपनियों के कस्टमर केयर नंबर, आधार अपडेशन सेंटर के बारे में जानने के लिए सर्च इंजन का इस्तेमाल करते हैं। कई बार सर्च इंजन पर दिखने वाले कॉन्टैक्ट डिटेल बैंक या इंश्योरेंस कंपनियों के नहीं होते हैं। लेकिन, वे ऐसा दिखते हैं।

आए दिन फ्रॉड (Fraud) के नए तरीके सामने आ रहे हैं। खास बात यह है कि ज्यादा पढ़ेलिखे लोग और बैंक इंप्लॉयीज तक फ्रॉड के शिकार बन रहे हैं। आरबीआई (RBI) ने लोगों को फ्रॉड के बारे में बताने के लिए एक बुकलेट जारी की है। इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है। पार्ट A और B में बैंक और नॉन-बैंकिंग कंपनियों से जुड़े फ्रॉड के बारे में बताया गया है। पार्ट C में उन सावधानियों के बारे में बताया गया है, जो आपको फ्रॉड का शिकार होने से रोकती हैं।

ऑनलाइन सेल्स प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल

जालसाज खुद को ऑनलाइन सेल्स प्लेटफॉर्म पर खरीदार के रूप में दिखाने की कोशिश करते हैं। वे सेलर्स के प्रोडक्ट्स में दिलचस्पी दिखाते हैं। लोगों का भरोसा हासिल करने के लिए वे खुद को डिफेंस इंप्लॉयीज के रूप में पेश करते हैं, जिसकी पोस्टिंग दूरदराज के इलाके में है। सेलर को पैसे चुकाने की बजाय वे यूनिफायड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एप के माध्यम से 'रिक्वेस्ट मनी' ऑप्शन का इस्तेमाल करते हैं। वे सेलर पर यूपीआई पिन डॉलकर रिक्वेस्ट एप्रूव करने के लिए दबाव बनाते हैं। जैसे ही सेलर पिन डालता है, पैसे फ्रॉडस्टर के अकाउंट में ट्रांसफर हो जाते हैं।

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स्क्रीन शेयरिंग एप/रिमोट एक्सेस का इस्तेमाल

फ्रॉडस्टर्स स्क्रीन-शेयरिंग एप को डाउनलोड कर ग्राहकों से फ्रॉड करते हैं। इस एप के इस्तेमाल से जालसाज व्यक्ति के मोबाइल/लैपटॉप को देख और कंट्रोल कर सकते हैं। वे व्यक्ति के फाइनेंशियल इंफॉर्मेशन तक पहुंच बना सकते हैं। वे इस तरीके का इस्तेमाल फंड के अनअथाराइज्ड ट्रांसफर के लिए करते हैं। वे पेमेंट के लिए व्यक्ति के इंटरनेट बैंकिंग/पेमेंट एप का भी इस्तेमाल करते हैं।

सर्च इंजन के जरिए फ्रॉड

लोग बैंक, इंश्योरेंस कंपनियों के कस्टमर केयर नंबर, आधार अपडेशन सेंटर के बारे में जानने के लिए सर्च इंजन का इस्तेमाल करते हैं। कई बार सर्च इंजन पर दिखने वाले कॉन्टैक्ट डिटेल बैंक या इंश्योरेंस कंपनियों के नहीं होते हैं। लेकिन, वे ऐसा दिखते हैं। फिर, लोग ऐसे नंबर को बैंक या इंश्योरेंस कंपनी का नंबर समझकर उन पर कॉल करते हैं। फिर, फ्रॉडस्टर्स उन्हें अपने क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड का डिटेल बताने को कहते हैं। लोग उन्हें बैंक का प्रतिनिधि मानते हुए अपनी जानकारियां बता देते हैं। फिर वे फ्रॉड के शिकार बन जाते हैं।

क्यूआर कोड स्कैन के जरिए फ्रॉड

कई बार जालसाज व्यक्ति को फोन में मौजूद एप का इस्तेमाल कर क्यूआर रिस्पॉन्स (QR) कोड को स्कैन करने के लिए कहता है। क्यूआर कोड को स्कैन करते ही व्यक्ति को अपने अकाउंट्स से पैसा निकालने के लिए अथराइज कर देता है। इसलिए आपको क्यूआर कोड को स्कैन करने में सावधानी बरतने की जरूरत है।

मोबाइल के चार्जिंग पोर्ट का इस्तेमाल

मोबाइल के चार्जिंग पोर्ट का इस्तेमाल भी फाइल/डाटा के ट्रांसफर के लिए किया जा सकता है। फ्रॉडस्टर्स इसके लिए पब्लिक चार्जिंग प्वॉइंट्स का इस्तेमाल करते हैं। जब व्यक्ति इस चार्जिंग प्वाइंट का इस्तेमाल करता है तो उसके फोन तक फॉडस्टर की पहुंच हो जाती है। वे फिर ईमेल, एसएमएस, सेव किया गया पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियां हासिल कर लेते हैं। इसे जूस जैकिंग कहा जाता है।

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