Reserve Bank of India RBI : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने 2 फरवरी को महाराष्ट्र के इंडिपेंडेंस को-ऑपरेटिव बैंक लि. (Independence Co-operative Bank Ltd.) के लाइसेंस का निरस्त कर दिया है। आरबीआई इस कार्रवाई के पीछे अपर्याप्त कैपिटल का होना वजह बताई है। आरबीआई ने एक रिलीज में कहा, इस क्रम में 3 फरवरी, 2022 को कामकाज खत्म होने के साथ उसके बैंकिंग बिजनेस पर रोक लगा दी गई है।
लिक्विडेटर की होगी नियुक्ति
आरबीआई ने कहा, कोऑपरेशन एंड रजिस्ट्रार ऑफ कोआपरेटिव सोसायटीज, महाराष्ट्र के कमिशनर को बैंक को समेटने और बैंक के लिए एक लिक्विडेटर नियुक्त करने के लिए एक आदेश जारी करने का अनुरोध भी किया है। आरबीआई ने कहा कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है और अर्निंग की संभावना नहीं हैं।
बैंक का बने रहना जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल
आरबीआई ने कहा कि बैंक का बने रहना उसके जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल है और बैंक अपनी वर्तमान फाइनेंशियल पोजिशन के साथ डिपॉजिटर्स को भुगतान करने में असमर्थ होगा। आरबीआई ने कहा, “यदि बैंक को आगे भी बैंकिंग बिजनेस जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो इसका पब्लिक इंटरेस्ट पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।”
आरबीआई ने कहा, इंडिपेंडेंस को-ऑपरेटिव बैंक (Independence Co-operative Bank) का लाइसेंस निरस्त होने के चलते उस बैंकिंग बिजनेस जारी रखने पर रोक लग गई है, जिसमें डिपॉजिट स्वीकार करने या डिपॉजिट का भुगतान करना भी शामिल है।
99 फीसदी से ज्यादा जमाकर्ताओं को मिलेगी पूरी रकम
आरबीआई ने कहा, लिक्विडेशन पर हर डिपॉजिटर डीआईसीजीसी एक्ट, 1961 के प्रावधानों के तहत डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) से 5 लाख रुपये की मॉनिटरी सीलिंग की जमा सीमा तक डिपॉजिट इंश्योरेंस क्लेम प्राप्त करने का हकदार होगा।
केंद्रीय बैंक ने कहा, बैंक द्वारा जमा डाटा के तहत, 99 फीसदी से ज्यादा डिपॉजिटर डीआईसीजीसी अपने डिपॉजिट की पूरी रकम पाने के लिए पात्र होंगे।