भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (Small Industries Development Bank of India (SIDBI) ने मंगलवार को कहा कि उसने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana Small Finance Bank) को 650 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है। एसएफबी के माध्यम से छोटे आकार की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFIs) तक सहायता पहुंचाना है जो छोटे व्यवसायों और सूक्ष्म उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
एक बयान में कहा गया है कि देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में अपेक्षाकृत छोटे एनबीएफसी और एमएफआई की अच्छी भूमिका रहती है। ये आमतौर पर दूरस्थ भौगोलिक क्षेत्रों (क्रेडिट की कमी वाले, पिछड़े जिलों ) में काम करते हैं। वे आम तौर पर अनौपचारिक एमएसएमई क्षेत्र विशेष रूप से क्रेडिट व्यवसायों के लिए नए, छोटे खुदरा व्यापार, माइक्रो क्रेडिट और अन्य छोटे घरेलू व्यवसायों के लिए काम करते हैं। अंदरूनी इलाकों में होने के कारण ये अपने ग्राहकों के बारे में लंबे समय से बहुत ज्यादा जानकारी रखते हैं ।
कोविड -19 महामारी ने एमएसएमई के व्यवसायों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है जिससे इन छोटे व्यवसायों और सूक्ष्म उद्यमों की कमाई में कमी आई है। इसने एनबीएफसी और एमएफआई के के कलेक्शन और लिक्विडिटी पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है। छोटे एनबीएफसी और एमएफआई हमेशा पर्याप्त संस्थागत फंडिंग पाने में चुनौतियों का सामना करते हैं और आम तौर पर अन्य बड़ी और अच्छी तरह से स्थापित गैर-बैंकिंग कंपनियों और छोटे वित्तीय बैंकों से पैसा प्राप्त करते हैं।
SIDBI के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक शिवसुब्रमण्यम रमन (Sivasubramanian Ramann, chairman and managing director) ने कहा, "इस कदम से 40 से अधिक छोटे आकार के एनबीएफसी / एमएफआई को लाभ होने की उम्मीद है जो ऐसे एनबीएफसी / एमएफआई को अपने व्यवसायों के लिए संसाधन जुटाने में आने वाली कठिनाइयों को कम करने में मदद करेंगे।"
मिंट की खबर के मुताबिक इन SFBs को 530 करोड़ रुपये की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। मौजूदा कोविड -19 महामारी के कारण MSMEs के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा SIDBI को स्वीकृत 16,000 करोड़ रुपये की स्पेशल लिक्विडिटी फैसिलिटी की वित्तीय सहायता बढ़ा दी गई है।