Bharat Bandh: बैंक से लेकर पोस्ट ऑफिस तक सब कुछ बंद! 25 करोड़ से ज्यादा से कर्मचारी उतरेंगे सड़कों पर, 9 जुलाई को क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद?

Bharat Bandh July 9: ट्रेड यूनियनों ने औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों में महीनों की लंबी तैयारियों का हवाला देते हुए “राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को एक बड़े स्तर पर सफल बनाने” की अपील की है। यूनियन नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक यूनियनों के संयुक्त मोर्चे ने इस हड़ताल को समर्थन दिया है और ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर लामबंदी करने का फैसला किया है

अपडेटेड Jul 08, 2025 पर 2:58 PM
Story continues below Advertisement
Bharat Bandh: बैंक से लेकर पोस्ट ऑफिस तक सब कुछ बंद! 25 करोड़ से ज्यादा से कर्मचारी उतरेंगे सड़कों पर

देश में 9 जुलाई बुधवार को 'भारत बंद' का ऐलान किया गया है। ऐसी उम्मीद है कि बैंकिंग, बीमा, डाक सेवाओं से लेकर कोयला माइनिंग सेक्टर तक के 25 करोड़ से ज्यादा कामगार बुधवार को इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल हो सकते हैं। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की तरफ से बुलाई इस हड़ताल को 'भारत बंद' नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार की "मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों" के खिलाफ विरोध जताना है।

ट्रेड यूनियनों ने औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों में महीनों की लंबी तैयारियों का हवाला देते हुए “राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को एक बड़े स्तर पर सफल बनाने” की अपील की है।

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की अमरजीत कौर ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया, "हड़ताल में 25 करोड़ से ज्यादा कामगार और मजदूरों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। देश भर में किसान और ग्रामीण मजदूर भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे।"


क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद?

इस देशव्यापी हड़ताल से कई बड़ी पब्लिक सर्विस और इंडस्ट्री पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। हिंद मजदूर सभा के हरभजन सिंह सिद्धू ने बताया कि इस भारत बंद के दौरान किन-किन सर्विस पर असर पड़ सकता है।

  • बैंकिंग
  • डाक
  • कोयला खनन
  • कारखाने
  • राज्य परिवहन

यूनियन की क्या है मांग?

इस 'भारत बंद' के पीछे एक बड़ा कारण वो है चार्टर है, जिसे पिछले साल इन यूनियों ने श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को सौंपा था। इस चार्टर में यूनियन 17 मांग हैं।

यूनियनों का दावा है कि सरकार ने इन मांगों को नजरअंदाज किया है और पिछले एक दशक से वार्षिक श्रम सम्मेलन भी नहीं करा रही है। उनका कहना है कि सरकार का ये रवैया मजदूर और कामगारों के प्रति उसकी उदासीनता को दिखाता है।

एक संयुक्त बयान में, फोरम ने आरोप लगाया कि सरकार के श्रम सुधार मजदूरों के अधिकारों को खत्म करने के लिए बनाए गए हैं, जिसमें चार नए लेबर कोड की शुरूआत भी शामिल है।

यूनियनों का तर्क है कि इन कोड का मकसद सामूहिक सौदेबाजी को खत्म करना, यूनियन की एक्टिविटी को कमजोर करना, काम के घंटे बढ़ाना और नियोक्ताओं (Employer) को श्रम कानूनों के तहत जवाबदेही से बचाना है।

प्राइवेटाइजेशन का विरोध

फोरम ने कहा कि अब सरकार मजदूरों और कामकारों के लिए कल्याणकारी नहीं रह गई और वो विदेशी और भारतीय कॉरपोरेट्स के हित में काम कर रही है, और यह उसकी नीति और कामगाज से साफ पता चलता है।

इसमें कहा गया है कि ट्रेड यूनियनें "पब्लिक सेक्टर के उद्यमों और पब्लिक सर्विस के निजीकरण, आउटसोर्सिंग, ठेकेदारी और वर्कफोर्स को अस्थायी करने की नीतियों" के खिलाफ लड़ रही हैं।

बयान में कहा गया है कि संसद की ओर से पारित चार लेबर कोड का उद्देश्य ट्रेड यूनियन आंदोलन को दबाना और पंगु बनाना, काम के घंटे बढ़ाना, श्रमिकों के बातचीत से अपनी बात मनवाने के अधिकार, हड़ताल के अधिकार को छीनना और नियोक्ताओं की ओर से श्रम कानूनों के उल्लंघन को अपराधमुक्त करना है।

यूनियन नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक यूनियनों के संयुक्त मोर्चे ने इस हड़ताल को समर्थन दिया है और ग्रामीण भारत में बड़े पैमाने पर लामबंदी करने का फैसला किया है।

ट्रेड यूनियनों ने इससे पहले 26 नवंबर, 2020, 28-29 मार्च, 2022 और पिछले साल 16 फरवरी को इसी तरह की देशव्यापी हड़ताल की थी।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।