Bima Sugam: बीमा का यूनिफाइड डिजिटल मार्केटप्लेस- Bima Sugam जल्द ही सिलसिलेवार तरीके से शुरू होने जा रहा है। शुरुआत मोटर इंश्योरेंस से होगी। इस प्लान से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल इसी सेगमेंट को पहले लाइव किया जाएगा।

Bima Sugam: बीमा का यूनिफाइड डिजिटल मार्केटप्लेस- Bima Sugam जल्द ही सिलसिलेवार तरीके से शुरू होने जा रहा है। शुरुआत मोटर इंश्योरेंस से होगी। इस प्लान से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल इसी सेगमेंट को पहले लाइव किया जाएगा।
प्लेटफॉर्म का मकसद सभी तरह के बीमा प्रोडक्ट्स को एक जगह लाना है। लेकिन शुरुआत मोटर इंश्योरेंस से की जा रही है। क्योंकि इसमें स्टैंडर्डाइजेशन और डिजिटाइजेशन पहले से ज्यादा है। इसे बाकी सेगमेंट्स के मुकाबले लागू करना आसान है।
इंश्योरेंस कंपनियां तैयारी में जुटीं
सूत्रों के मुताबिक, जनरल इंश्योरेंस कंपनियां प्लेटफॉर्म के लिए तैयारी शुरू कर दी है। खासकर, जिनका मोटर बिजनेस बड़ा है। वो बैकएंड इंटीग्रेशन, API अलाइनमेंट और इंटरनल टेस्टिंग जैसे काम कर रही हैं।
एक सूत्र का कहना है कि मोटर इंश्योरेंस को प्राथमिकता इसलिए मिली है क्योंकि इसमें पॉलिसी स्ट्रक्चर साफ होता है। अंडरराइटिंग आसान होती है और वॉल्यूम भी ज्यादा होता है। इसलिए इसे अलग-अलग कंपनियों के बीच एक जैसा बनाना आसान है।
लाइफ-हेल्थ सेक्टर तैयार नहीं
इसके उलट, लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां अभी पूरी तरह तैयार नहीं दिख रही हैं। वजह विरोध नहीं, बल्कि साफ गाइडलाइन की कमी है।
Moneycontrol से बात करने वाले कई अधिकारियों ने बताया कि उन्हें अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि प्रोडक्ट किस फॉर्मेट में अपलोड होंगे, टेस्टिंग कब होगी और प्लेटफॉर्म कब लाइव होगा। इससे इन सेगमेंट्स को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।
क्या है Bima Sugam प्लेटफॉर्म
Bima Sugam को Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) के तहत एक 'Amazon जैसा' प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है। यहां ग्राहक एक ही जगह पर लाइफ, हेल्थ और जनरल इंश्योरेंस पॉलिसी की तुलना, खरीद और मैनेज कर सकेंगे।
यह एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) होगा, जिसे Bima Sugam India Federation (BSIF) ऑपरेट करेगा। यह एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है, जिसे इंश्योरेंस कंपनियों और इंडस्ट्री बॉडीज का समर्थन मिला है।
जीरो-कॉस्ट नहीं होगा प्लेटफॉर्म
इंश्योरेंस कंपनियों ने साफ किया है कि यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह फ्री नहीं होगा। इसे बनाने और चलाने में लागत आती है। इंडस्ट्री पहले ही करीब ₹200-250 करोड़ निवेश कर चुकी है, जो टेक्नोलॉजी और इंटीग्रेशन पर खर्च हुआ है। आगे चलकर मेंटेनेंस और ऑपरेशन के लिए एक छोटा प्लेटफॉर्म चार्ज भी लिया जा सकता है।
हालांकि कंपनियों का कहना है कि यह चार्ज पारंपरिक कमीशन के मुकाबले काफी कम होगा, जिससे कुल लागत घटेगी और सिस्टम ज्यादा कुशल बनेगा।
सबसे बड़ी चुनौती क्या है
इस प्लेटफॉर्म का धीरे-धीरे शुरू होना यह भी दिखाता है कि सभी बीमा प्रोडक्ट्स को एक ही सिस्टम में लाना आसान नहीं है। मोटर इंश्योरेंस के मुकाबले, लाइफ और हेल्थ पॉलिसी ज्यादा जटिल होती हैं। इनमें अंडरराइटिंग अलग-अलग होती है, लॉन्ग-टर्म सेविंग्स जुड़े होते हैं, नियम अलग होते हैं और बेनिफिट भी स्टैंडर्ड नहीं होते।
इन सबको एक जैसा और आसानी से तुलना करने लायक बनाना ही Bima Sugam का असली लक्ष्य है, लेकिन इस पर काम अभी जारी है।
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