मोटर एक्सिडेंट के पीड़ितों और उनके परिवार को न सिर्फ शारीरिक और भावनात्मक आघात से गुजरना पड़ता है बल्कि उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया और पैसे की दिक्कत का भी सामना करना पड़ता है। मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 में मौत, स्थायी दिव्यांगता या शारीरिक चोट की स्थिति में मुआवजे का प्रावधान है। लेकिन मुआवजा मिलने में अक्सर देर हो जाती है, क्योंकि मोटर एक्सिडेंट क्लेम्स ट्राइब्यूनल्स (MACTs) का फैसला आने में काफी समय लग जाता है।
कई मामलों में एमएसीटी में क्लेम का फाइनल सेटलमेंट होने में कई सालों का समय लग जाता है। प्रोसिजर में देर, सुनवाई स्थगित होना, मेडिकल सबूतों की जांच और इंश्योरेंस कंपनियों की अपील इसकी वजहे हैं। इस लंबे समय के दौरान पीड़ित और उसके कानूनी उत्तराधिकारी को अक्सर इलाज के खर्च और जीविकोपार्जन के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में मुआवजा और उस पर इंटरेस्ट का आदेश परिवार के लिए इनकम की जीवन रेखा बन जाती है।
मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत ट्राइब्यूनल को निम्नलिखित आदेश पारित करने का अधिकार है:
-मौत, स्थायी दिव्यागंता, या शारीरिक चोट की स्थिति में मुआवजा और
-इस मुआवजे पर इंटरेस्ट क्योंकि अक्सर एक्सिडेंट की तारीख और अंतिम फैसला आने में देर होती है
हालांकि, इनकम टैक्स के मौजूदा प्रावधानों के तहत मोटर एक्सिडेंट क्लेम्स ट्राइब्यूनल के आदेश पर मुआवजे पर इंटरेस्ट टैक्स के दायरे में आता है और इसमें सिर्फ सीमित राहत मिलती है। इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 393(4) के तहत ऐसे इंटरेस्ट पर टीडीएस सिर्फ तभी लागू नहीं होता है, जब किसी एक फाइनेंशियल ईयर में टोटल अमाउंट 50,000 से ज्यादा नहीं होता है। इससे ज्यादा के इंटरेस्ट अमाउंट पर टीडीएस कटता है भले ही देरी के लिए पीड़ित जिम्मेदार न हो।
बजट 2026 में क्या प्रस्ताव पेश किया गया है?
दुर्घटना के शिकार व्यक्तियों और उनके परिवारों को आने वाली दिक्कत को ध्यान में रख बजट 2026 में एक बड़े रिफॉर्म का प्रस्ताव पेश किया गया है।
बजट में पेश प्रस्ताव में मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत आए मुआवजे के इंटरेस्ट अमाउंट पर दुर्घटना के शिकार व्यक्ति या उसके कानूनी वारिस को टैक्स से पूरी तरह एग्जेम्प्शन के लिए संबंधित शिड्यूल में संशोधन का प्रस्ताव है। इसके अलावा इस इंटरेस्ट पर किसी तरह का टीडीएस नहीं काटा जाएगा चाहे अमाउंट कितना भी हो।
इस प्रस्ताव में इस तथ्य को ध्यान में रखा गया है कि MACT के आदेश पर मिलने वाला इंटरेस्ट एक तरह से मुआवजा है और यह मुआवजे के अमाउंट मिलने में हुई देरी की सिर्फ भरपाई है। यह संसोधन 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा, जिससे दुर्घटना के शिकार लोगों और उनके परिवारों को मुआवजे के मामले में राहत मिलेगी।
(लेखक सीए हैं और पर्सनल फाइनेंस खासकर इनकम टैक्स से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट हैं)