Budget 2026: डबल इनकम और सिंगल आईटीआर? ICAI ने बजट 2026 के लिए क्या प्रस्ताव दिया है?
अभी हर इंडिविजुअल यानी हर व्यक्ति को अलग टैक्सपेयर माना जाता है। पति-पत्नी मिलकर कमाते हैं, इनवेस्ट करते हैं और मिलकर खर्च करते हैं तो भी उन्हें अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है। उनके लिए स्लैब, एग्जेम्प्शन लिमिट और डिडक्शन की लिमिट भी अलग-अलग होती है
ICAI ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि सरकार को मैरिड कपल को अलग-अलग दो इनकम रिटर्न फाइल करने की जगह एक ज्वाइंट रिटर्न फाइल करने की इजाजत देनी चाहिए।
यूनियन बजट 2026-27 पेश होने से पहले भारत में मैरिड कपल के टैक्स चुकाने के सिस्टम में बदलाव के एक प्रस्ताव पर खूब चर्चा हुई है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने यह प्रस्ताव पेश किया था। इसमें मैरिड कपल के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन का सुझाव दिया गया है। इससे परिवारों को टैक्स-सेविंग्स में मदद मिलेगी। साथ ही उन पर टैक्स का बोझ भी कम पड़ेगा।
अभी टैक्स का क्या सिस्टम है?
अभी हर इंडिविजुअल यानी हर व्यक्ति को अलग टैक्सपेयर माना जाता है। पति-पत्नी मिलकर कमाते हैं, इनवेस्ट करते हैं और मिलकर खर्च करते हैं तो भी उन्हें अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है। उनके लिए स्लैब, एग्जेम्प्शन लिमिट और डिडक्शन की लिमिट भी अलग-अलग होती है।
इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए पति-पत्नी में से किसी एक की कमाई 10 लाख रुपये हैं और दूसरे की कोई कमाई नहीं है। ऐसे में कमाई नहीं करने वाले परिवार के सदस्य के इस्तेमाल नहीं होने वाले टैक्स बेनेफिट्स का इस्तेमाल कमाई करने वाला सदस्य नहीं कर सकता। इससे कई बार परिवार पर टैक्स का बोझ काफी बढ़ जाता है।
आईसीएआई ने क्या प्रस्ताव दिया है?
ICAI ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि सरकार को मैरिड कपल को अलग-अलग दो इनकम रिटर्न फाइल करने की जगह एक ज्वाइंट रिटर्न फाइल करने की इजाजत देनी चाहिए। पति-पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्स रिटर्न का यह सिस्टम अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों में इस्तेमाल होता है।
इस सिस्टम के तहत क्या होगा:
-पति और पत्नी दोनों की इनकम जोड़ कर परिवार की एक कंबाइंड इनकम बनाई जाएगी।
-कंबाइंड इनकम के लिए एक नए टैक्स स्लैब स्ट्रक्चर का इस्तेमाल होगा, जिसमें इंडिविजुअल की जगह परिवार के लिए ज्यादा एग्जेम्प्शन लिमिट और बड़े टैक्स स्लैब्स होंगे।
-बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट ज्वाइंट फाइलर्स के लिए दोगुनी हो जाएगी या इसे बढ़ाया जाएगा। जैसे यह कंबाइंड करीब 8 लाख रुपये होगी। इसका मतलब है कि अलग-अलग रिटर्न फाइल करने की जगह ज्वाइंट रिटर्न फाइलिंग से इनकम का एक बड़ा हिस्सा टैक्स-फ्री हो सकता है।
-ऐसे पति-पत्नी जिनकी कमाई एक जैसी है, उनके लिए रिटर्न फाइलिंग का मौजूदा सिस्टम बना रहेगा। ऐसे में उनके पास अपने लिए दोनों में से ज्यादा फायदेमंद विकल्प चुनने का मौका होगा।
परिवारों को फायदा
ज्वाइंट टैक्ससेशन के विचार का मकसद परिवार को एक आर्थिक इकाई मानना है, क्योंकि परिवार में ज्यादातर खर्च और वित्तीय फैसले मिलकर लिए जाते हैं। इसके कुछ बड़े फायदे इस तरह हैं:
-कई परिवारों के लिए टैक्स घट जाएगा: खासकर उन परिवारों के लिए जिसमें एक सदस्य दूसरे सदस्य से काफी ज्यादा कमाता है या दूसरा सदस्य की कोई कमाई नहीं होती है।
-एग्जेम्प्शंस और डिडक्शंस का बेहतर इस्तेमाल: ज्वाइंट फाइलिंग से परिवार होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन, स्टैंडर्ड डिडक्शन और दूसरे एलिजिबल डिडक्शंस का ज्यादा बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे।
-आसान कंप्लायंस: प्रति परिवार दो की जगह एक टैक्स रिटर्न फाइल होने से कई पति-पत्नी के लिए टैक्स फाइलिंग आसान हो जाएगी। इससे ज्वाइंट नाम से या कमाई नहीं करने वाले सदस्य की तरफ से इनवेस्टमेंट होने पर इनकम की क्लबिंग जैसी जटिलता में कमी आएगी।
अगर यह सिस्टम पति-पत्नी के लिए फायदेमंद नहीं होगा तो क्या होगा?
चूंकि इस सिस्टम को विकल्प के रूप में पेश करने का प्रस्ताव है, जिससे पति-पत्नी ज्वाइंट सिस्टम और अलग-अलग रिटर्न के सिस्टम की तुलना करेंगे। वे उस सिस्टम का चुनाव कर सकेंगे, जिसमें उन्हें कम टैक्स देना पड़ेगा। इस ऑप्शन से उन परिवारों को फायदा होगा, जिसमें कंबाइंड इनकम से परिवार ज्यादा टैक्स वाले स्लैब में चला जाता है।
वित्तमंत्री 1 फरवरी, 2026 को यूनियन बजट पेश करेंगी। टैक्स एक्सपर्ट्स, पॉलिसी मेकर्स और टैक्सपेयर्स की नजरें इस बात पर लगी हैं कि सरकार आईसीएआई के इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है और इसे बजट भाषण में शामिल करती है या नहीं।
अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो यह इंडियन टैक्स सिस्टम में एक बड़ा रिफॉर्म होगा। इससे लाखों परिवारों को टैक्स सेविंग्स, पारदर्शिता और रिटर्न फाइलिंग में मदद मिलेगी। साथ ही इंडियन टैक्स सिस्टम इंटरनेशनल प्रैक्टिसेज के करीब आएगा, जिसमें पहले से पति और पत्नी को ज्वाइंट रिटर्न फाइलिंग की इजाजत है।
(लेखक सीए हैं और पर्सनल फाइनेंस से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट हैं)