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Budget 2026: डबल इनकम और सिंगल आईटीआर? ICAI ने बजट 2026 के लिए क्या प्रस्ताव दिया है?

अभी हर इंडिविजुअल यानी हर व्यक्ति को अलग टैक्सपेयर माना जाता है। पति-पत्नी मिलकर कमाते हैं, इनवेस्ट करते हैं और मिलकर खर्च करते हैं तो भी उन्हें अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है। उनके लिए स्लैब, एग्जेम्प्शन लिमिट और डिडक्शन की लिमिट भी अलग-अलग होती है

Abhishek Anejaअपडेटेड Jan 31, 2026 पर 3:23 PM
Budget 2026: डबल इनकम और सिंगल आईटीआर? ICAI ने बजट 2026 के लिए क्या प्रस्ताव दिया है?
ICAI ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि सरकार को मैरिड कपल को अलग-अलग दो इनकम रिटर्न फाइल करने की जगह एक ज्वाइंट रिटर्न फाइल करने की इजाजत देनी चाहिए।

यूनियन बजट 2026-27 पेश होने से पहले भारत में मैरिड कपल के टैक्स चुकाने के सिस्टम में बदलाव के एक प्रस्ताव पर खूब चर्चा हुई है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने यह प्रस्ताव पेश किया था। इसमें मैरिड कपल के लिए ज्वाइंट टैक्सेशन का सुझाव दिया गया है। इससे परिवारों को टैक्स-सेविंग्स में मदद मिलेगी। साथ ही उन पर टैक्स का बोझ भी कम पड़ेगा।

अभी टैक्स का क्या सिस्टम है?

अभी हर इंडिविजुअल यानी हर व्यक्ति को अलग टैक्सपेयर माना जाता है। पति-पत्नी मिलकर कमाते हैं, इनवेस्ट करते हैं और मिलकर खर्च करते हैं तो भी उन्हें अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है। उनके लिए स्लैब, एग्जेम्प्शन लिमिट और डिडक्शन की लिमिट भी अलग-अलग होती है।

इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए पति-पत्नी में से किसी एक की कमाई 10 लाख रुपये हैं और दूसरे की कोई कमाई नहीं है। ऐसे में कमाई नहीं करने वाले परिवार के सदस्य के इस्तेमाल नहीं होने वाले टैक्स बेनेफिट्स का इस्तेमाल कमाई करने वाला सदस्य नहीं कर सकता। इससे कई बार परिवार पर टैक्स का बोझ काफी बढ़ जाता है।

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