Budget 2026: क्या 31 अगस्त की ITR डेडलाइन सभी पर लागू होगी? जानिए किसे मिलेगा फायदा

Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की टाइमलाइन को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है। सरकार ने रिटर्न फाइलिंग का दबाव कम करने के लिए स्टैगर्ड टाइमलाइन का ऐलान किया है

अपडेटेड Feb 02, 2026 पर 6:16 PM
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Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की टाइमलाइन को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है।

Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की टाइमलाइन को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है। सरकार ने रिटर्न फाइलिंग का दबाव कम करने के लिए स्टैगर्ड टाइमलाइन का ऐलान किया है। यानी, एक ही काम के लिए अलग-अलग लोगों या कैटेगरी के लिए अलग-अलग तारीखें तय की गई हैं। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि 31 अगस्त की बढ़ी हुई डेडलाइन सभी टैक्सपेयर्स के लिए नहीं है। ज्यादातर सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए पुरानी तारीख ही लागू रहेगी।

किसे मिलेगी 31 अगस्त तक ITR फाइल करने की छूट

बजट दस्तावेज और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की FAQs के मुताबिक, 31 अगस्त की डेडलाइन सिर्फ नॉन-ऑडिट बिजनेस केस और ट्रस्ट्स के लिए है। इसमें ऐसे कारोबारी और प्रोफेशनल शामिल हैं, जिनके अकाउंट्स का ऑडिट जरूरी नहीं होता। इसके अलावा नॉन-ऑडिट फर्म के पार्टनर और कुछ मामलों में उनके जीवनसाथी भी इस दायरे में आते हैं। यह राहत खासतौर पर छोटे कारोबारियों, फ्रीलांसरों और प्रोफेशनल्स के लिए है, जिन्हें अकाउंट फाइनल करने में ज्यादा समय लगता है।


सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए क्या बदला

अगर आप सैलरीड हैं और ITR-1 या ITR-2 फाइल करते हैं, तो आपके लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे टैक्सपेयर्स को पहले की तरह 31 जुलाई तक ही ITR फाइल करनी होगी। यानी यह मान लेना गलत होगा कि सभी के लिए डेडलाइन 31 अगस्त हो गई है।

सरकार का साफ कहना है कि यह एक्सटेंशन चुनिंदा कैटेगरी के लिए है, ताकि उन्हें नए इनकम टैक्स फ्रेमवर्क के तहत तैयारी का अतिरिक्त समय मिल सके।

नॉन-ऑडिट बिजनेस केस क्या होते हैं

नॉन-ऑडिट केस वह होते हैं, जिनमें कारोबार या पेशे का टर्नओवर तय सीमा से कम होता है। आमतौर पर 1 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले बिजनेस या प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन के तहत आने वाले लोग इसमें शामिल होते हैं। ऐसे मामलों में टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं होता, इसलिए सरकार ने इन्हें अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है।

ट्रस्ट्स को क्यों मिली राहत

ट्रस्ट्स ऐसे लीगल एंटिटी होते हैं, जो चैरिटेबल, धार्मिक या निजी उद्देश्य के लिए बनाए जाते हैं। अगर इनके अकाउंट्स का ऑडिट जरूरी नहीं है, तो वह भी अब 31 अगस्त तक ITR फाइल कर सकते हैं। इससे उन्हें कंप्लायंस में आसानी मिलेगी और जल्दबाजी में गलती की आशंका कम होगी।

यह बदलाव कब से लागू होगा

यह नया नियम इनकम टैक्स एक्ट 2025 की धारा 263(1)(c) के तहत लाया गया है। यह 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और टैक्स ईयर 2026-27 (असेसमेंट ईयर 2027-28) से प्रभावी रहेगा। साथ ही इसी तरह का रिवीजन पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 में भी किया गया है, ताकि ट्रांजिशन आसान रहे। अगर आप सैलरीड हैं, तो 31 जुलाई की डेडलाइन न भूलें। अगर आप छोटे कारोबारी, फ्रीलांसर या नॉन-ऑडिट ट्रस्ट से जुड़े हैं, तो आपको अब 31 अगस्त तक का समय मिलेगा। सही कैटेगरी समझना जरूरी है, ताकि पेनल्टी और परेशानी से बचा जा सके।

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