Silver Price: पिछले एक महीने में चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। चांदी करीब 30 फीसदी से ज्यादा उछलकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इस तेजी से मार्केट और निवेशक खुश थे। लेकिन शुक्रवार को अचानक आई तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगले 2 से 3 महीनों में चांदी का भाव गिरेगा या चढ़ेगा?
शुक्रवार को ग्लोबल बाजारों में बड़ी हलचल दिखी। एक ही दिन में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 36 डॉलर प्रति औंस टूटकर करीब 78 डॉलर पर आ गई। सोने में भी भारी गिरावट रही। सोने का भाव 594 डॉलर प्रति औंस गिरकर 4,732 डॉलर पर बंद हुआ। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा।
घरेलू बाजार में तेज गिरावट
हैदराबाद के सर्राफा बाजार में शुक्रवार रात तक 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम पर 21,860 रुपये गिरकर 1,57,840 रुपये रह गया। चांदी में गिरावट और ज्यादा रही। एक किलो चांदी का भाव करीब 1 लाख रुपये टूटकर 2,99,000 रुपये पर बंद हुआ। एक दिन पहले यानी गुरुवार रात को सोना 1,79,700 रुपये और चांदी 3,99,600 रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी।
कमोडिटी बाजार में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। MCX पर अप्रैल गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट ने ऊंचाई से फिसलकर करीब 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की। वहीं मार्च सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट में तो और बड़ी टूट देखने को मिली। चांदी एक दिन में करीब 27 फीसदी गिरकर नीचे बंद हुई। यह हाल के सालों की सबसे तेज गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
आगे क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
हालांकि इस गिरावट के बावजूद कई ब्रोकरेज और एक्सपर्ट्स चांदी को लेकर अब भी पॉजिटिव हैं। Citi Brokerage का कहना है कि आने वाले तीन महीनों में चांदी 150 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। पहले उनका टारगेट 100 डॉलर था, जिसे हालिया तेजी के बाद बढ़ाया गया है। हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि चांदी की कीमतें काफी वोलाटाइल हैं और सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है।
क्यों मिल सकता है चांदी को सपोर्ट
एक्सपर्ट का कहना है कि सोने में पहले ही बड़ी तेजी आ चुकी है। ऐसे में निवेशकों का रुझान अब चांदी की तरफ बढ़ रहा है। सोने के मुकाबले चांदी अभी भी सस्ती मानी जा रही है। इसके अलावा इंडस्ट्रियल सेक्टर से चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और नई तकनीकों में चांदी का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव, सीमित सप्लाई और घटते स्टॉक्स भी चांदी की कीमतों को सहारा दे रहे हैं। बाजार में फिजिकल चांदी की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। इसी वजह से कई निवेशक अभी बेचने से बच रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लेकिन लंबी पीरियड में चांदी के मजबूत बने रहने की संभावना है। अगले 2-3 महीनों में अगर बाजार स्थिर होता है, तो चांदी में फिर से 30 से 40 फीसदी तक की तेजी देखने को मिल सकती है।