Budget 2026 Reaction: केंद्रीय बजट 2026-27 पर अलग-अलग सेक्टर्स से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इंडस्ट्री, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्बन प्लानिंग, फाइनेंस और जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर के एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बजट राजकोषीय अनुशासन के साथ विकास को रफ्तार देने वाला है।
फाइनेंशियल सेक्टर और MSME पर फोकस
सरबवीर सिंह, जॉइंट ग्रुप सीईओ, PB Fintech का कहना है कि यह बजट पूंजी-समर्थित और MSME-प्रेरित विकास का स्पष्ट संकेत देता है। उन्होंने कहा कि पब्लिक कैपेक्स को बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये करने से बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए मजबूत डिमांड पाइपलाइन बनेगी। 10,000 रुपये करोड़ के MSME ग्रोथ फंड से छोटे और मझोले उद्यमों को लिक्विडिटी मिलेगी और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। मोटर एक्सीडेंट क्लेम पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स फ्री करना आम लोगों के लिए राहत भरा कदम है।
हेल्थकेयर और मेडटेक सेक्टर पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ सुधीर श्रीवास्तव ने कहा कि भारत के पास मेडिकल टेक्नोलॉजी और सर्जिकल रोबोटिक्स में वैश्विक हब बनने की पूरी क्षमता है। उन्होंने स्वदेशी R&D को बढ़ावा, कंपोनेंट-लेवल मैन्युफैक्चरिंग और AI आधारित हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी को अपनाने की जरूरत बताई। घरेलू मेडिकल डिवाइसेज पर GST युक्तिकरण और R&D टैक्स इंसेंटिव से इनोवेशन को नई रफ्तार मिल सकती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और EPC सेक्टर की राय
इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर से परवीन गुप्ता ने कहा कि बजट 2026 देश की दीर्घकालिक आर्थिक बढ़ोतरी के लिए अहम है। उन्होंने शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स में लगातार कैपेक्स पर जोर देने की जरूरत बताई। समय पर फंड रिलीज, तेज प्रोजेक्ट क्लीयरेंस और सरल कॉन्ट्रैक्ट फ्रेमवर्क से प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन बेहतर होगा।
अर्बन प्लानिंग और सस्टेनेबिलिटी
आर्किटेक्चर और अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट दिक्षु सी कुकरेजा का मानना है कि अब शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ विकास का जरिया नहीं बल्कि आर्थिक उत्पादकता और जलवायु अनुकूलन का आधार बन चुका है। उन्होंने हाउसिंग और अर्बन अफेयर्स मंत्रालय को मिले करीब 97,000 करोड़ रुपये के आवंटन को सही दिशा में कदम बताया। अर्बन चैलेंज फंड और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड से समग्र सिटी-मेकिंग को बढ़ावा मिलेगा।
दीपक अग्रवाल, को-फाउंडर और Co-CEO, Moneyboxx Finance ने कहा कि 4.3% का फिस्कल डेफिसिट और 12.2 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स भारत की ग्रोथ स्टोरी को मजबूत आधार देता है। उन्होंने 10,000 करोड़ रुपये के SME ग्रोथ फंड और आत्मनिर्भर भारत फंड में टॉप-अप को छोटे कारोबारियों के लिए बड़ा सहारा बताया।
जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर को राहत
जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर से राजेश रोकड़े, चेयरमैन, All India Gem & Jewellery Domestic Council ने कहा कि कस्टम ड्यूटी और GST में कोई बढ़ोतरी न होना उद्योग के लिए राहत भरी खबर है। वहीं, GJC के वाइस चेयरमैन अविनाश गुप्ता ने कहा कि आसान टैक्स कंप्लायंस और MSME सपोर्ट से ज्वैलर्स को स्थिरता मिलेगी।