वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज संसद में पेश केंद्रीय बजट 2026 ने वरिष्ठ नागरिकों को कोई नया टैक्स बोझ नहीं दिया, लेकिन उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों जैसे ऊंची छूट सीमाएं या स्वास्थ्य खर्च पर विशेष राहत को भी नजरअंदाज कर दिया। पेंशनभोगी और रिटायर्ड लोग, जो महंगाई और मेडिकल खर्चों से जूझ रहे हैं, पुरानी टैक्स संरचना से ही संतुष्ट रहेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिरता तो है, लेकिन बढ़ती जिंदगी के खर्चों के सामने अपर्याप्त भी है।
ओल्ड टैक्स रिजीम में 60-79 साल के सीनियर्स के लिए 3 लाख और 80 साल से ऊपर वालों के लिए 5 लाख रुपये की बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट यथावत रही है। इसमें न कोई नई डिडक्शन लिमिट बढ़ी है और ना ही सेक्शन 80DDB के तहत मेडिकल खर्चों पर इन्फ्लेशन-लिंक्ड राहत मिली है। घरेलू एल्डर केयर या ऊंचे सोशल सिक्योरिटी पेंशन की मांगें अनसुनी रही हैं। Lt Col Rochak Bakshi जैसे फाइनेंशियल प्लानर्स मानते हैं कि फिक्स्ड इनकम वाले रिटायर्स के लिए हेल्थकेयर महंगाई चुनौती बनी रहेगी।
ब्याज और किराया आय पर टीडीएस थ्रेशोल्ड में कोई बदलाव नहीं है। सीनियर लैंडलॉर्ड्स को किराए से आने वाली कमाई पर पुरानी दरों से ही टैक्स कटौती का सामना करना पड़ेगा, जिससे रिफंड क्लेम्स की झंझट बनी रहेगी। इससे उनकी मासिक कैश फ्लो पर असर पड़ेगा, खासकर जो बैंक डिपॉजिट्स पर निर्भर हैं।
हालांकि, हेल्थकेयर में कुछ सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। NIMHANS 2.0 का ऐलान और रांची, तेजपुर जैसे क्षेत्रों में मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट्स का अपग्रेड डिमेंशिया व डिप्रेशन जैसी बुजुर्गों की समस्याओं पर फोकस करता है। Vijay Maheshwari जैसे एक्सपर्ट्स इसे मेंटल वेलबीइंग के लिए 'शक्तिशाली कदम' बता रहे हैं, जो शहरी केंद्रों से इतर मदद पहुंचाएगा। अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स एक्ट 1961 को नया एक्ट 2025 रिप्लेस करेगा, जो सरल फॉर्म्स और कम लिटिगेशन से डिजिटल फाइलिंग को आसान बनाएगा।
Union Budget 2026 वरिष्ठ नागरिकों के लिए मिश्रित अनुभव लेकर आया है। टैक्स में स्थिरता और स्वास्थ्य सेवाओं में राहत जरूर मिली है, लेकिन सीधी आर्थिक छूट की उम्मीद पूरी नहीं हुई। यह बजट बुजुर्गों के लिए राहत और निराशा दोनों का पैकेज है जहां मेडिकल खर्च कम होंगे, वहीं टैक्स बचत की राह अभी भी अधूरी है।