Budget 2026: अभी भारत में 2 लाख रुपये से अधिक गोल्ड या गोल्ड ज्वैलरी खरीदने पर पैन-आधार दिखाना अनिवार्य है। सरकार ने यह नियम साल 2016 में लागू किया था। तब देश में 10 ग्राम सोने का भाव 25,000 रुपये से 32,000 रुपये का बीच था। तब 2 लाख रुपये की गोल्ड खरीदारी पर नियम सही लगता था लेकिन अब साल 2026 जब 10 ग्राम सोने का भाव 1,60,000 रुपये के ऊपर है। तब 2 लाख रुपये की खरीदारी पर पैन-आधार दिखाना वैलिड नहीं लगता। यही कारण है कि ज्वैलरी इंडस्ट्री सरकार से इस लिमिट को बढ़ाने की डिमांड बजट में कर रही है। ज्वैलर्स सरकार से सोना खरीदने पर PAN या आधार देने की मौजूदा 2 लाख रुपये की लिमिट को बढ़ाने की मांग कर रही है।
इनकम टैक्स कानून की धारा 139A और नियम 114B के तहत अगर कोई व्यक्ति 2 लाख रुपये से ज्यादा का सोना या ज्वेलरी खरीदता है, तो उसे ज्वेलर को अपना PAN नंबर देना जरूरी होता है।अगर PAN नहीं है, तो आधार नंबर दिया जा सकता है। यह नियम 1 जनवरी 2016 से लागू है। 2016 में नियम 114B में बदलाव हुआ था। उसी समय सोने और ज्वेलरी के लिए अलग सीमा हटाकर 2 लाख रुपये की सामान्य सीमा लागू की गई। इसके बाद से सोने की कीमतें बढ़ती रहीं लेकिन लिमिट वहीं की वहीं अटकी रही।
सरकार ने क्यों बनाए ये नियम
सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई थी ताकि बड़े ट्रांजेक्शन पर नजर रखी जा सके। काले धन और टैक्स चोरी को रोका जा सके। साथ ही हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन का एक रिकॉर्ड रखा जा सके। इसका मेन टारगेट टैक्स चोरी रोकना था।
साल 2016 में 10 ग्राम सोने का दाम भारत में 25,000 रुपये से 32,000 रुपये के बीच रहा। तब 2 लाख रुपये की गोल्ड पर खरीदारी पर पैन कार्ड नंबर देने का नियम सही लगा। अब पिछले 8–9 सालों में सोने की कीमत कई गुना बढ़ चुकी है। आज की तारीख में सोने का भाव 2 लाख रुपये के आसपास पहुंचने को तैयार है। अभी देश में 10 ग्राम सोने का भाव 1,65,000 रुपये के आसपास है। अगर गहनों की बात करें शादियों और त्योहार के समय सोने के गहने खरीदने की परंपरा है। ऐसे में 10 ग्राम सोना मेकिंग चार्ज के साथ खरीदना ही 2 लाख रुपये तक चला जाता है। ऐसे में 2 लाख रुपये पर पैन देना वाजिब नही लगता। अब इस लिमिट को बढ़ाए जाने की मांग ज्वैलरी इंडस्ट्री और एसोसिएशन कर रही है।
ज्वैलरी इंडस्ट्री क्यों उठा रही है मांग
शादी, त्योहार या पारिवारिक जरूरतों के लिए की गई सामान्य खरीदारी भी 2 लाख रुपये से ऊपर चली जाती है। छोटे और मध्यम वर्ग के खरीदार भी रिपोर्टिंग के दायरे में आ जाते हैं। ज्वेलर्स और ग्राहकों दोनों पर अतिरिक्त कंप्लायंस का बोझ बढ़ता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब यह लिमिट कीमत बढ़ने की वजह से टूट रही है, न कि इसलिए कि लोग कोई बड़ा या संदिग्ध ट्रांजेक्शन कर रहे हैं।
Budget 2026 में क्या बदल सकता है?
चार्टर्ड अकाउंटेंट गोविंद शर्मा का कहना है कि सरकार को इस लिमिट पर दोबारा विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक या तो 2 लाख की सीमा को बढ़ाया जाए या फिर इसे सोने की मौजूदा कीमत या महंगाई से जोड़ा जाए, ताकि यह समय-समय पर अपने आप अपडेट होती रहे। उनका मानना है कि इससे कानून का असली मकसद बना रहेगा। यानी वाकई बड़े और संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर नजर, न कि आम ग्राहकों को परेशान करना। आज जो खरीदारी पहले हाई-वैल्यू मानी जाती थी, वह अब बिल्कुल सामान्य हो चुकी है। खासतौर पर शादियों, पारिवारिक समारोहों, पारंपरिक निवेश के समय में यह लिमिट मामूली लगती है।
लिमिट बढ़ने से ग्राहकों को क्यो होगा फायदा
ईमानदार ग्राहकों को अनावश्यक डॉक्युमेंटेशन से राहत मिलेगी। छोटे ज्वेलर्स के लिए काम आसान होगा। सिस्टम का फोकस असली बड़े ट्रांजेक्शन पर रहेगा।
सरकार ने 2 लाख रुपये की लिमिट क्यों रखी थी?
सरकार ने बनाए नियम का मकसद यह था कि जब कोई व्यक्ति तय सीमा से ज्यादा सोना खरीदे तो ज्वेलर उस ट्रांजेक्शन की जानकारी Statement of Financial Transactions (SFT) के जरिए इनकम टैक्स विभाग को दे। इस SFT में खरीदार का PAN/आधार, ट्रांजैक्शन की रकम, पेमेंट का तरीका, तारीख जैसी जानकारी होती है। बाद में यह डेटा खरीदार की Income Tax Return (ITR) से मिलाया जाता है। अगर खर्च आय से मेल नहीं खाता, तो सिस्टम अलर्ट देता है। मतलब यह नियम हर खरीदारी पर सवाल उठाने के लिए नहीं, बल्कि डेटा के जरिए टैक्स चोरी पकड़ने के लिए बनाया गया था।