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Budget 2026: सुपर रिच पर न बढ़े इनकम टैक्स सरचार्ज, कम कर वाले देशों में बसने का बढ़ सकता है जोखिम

Budget 2026: देश में वेल्थ टैक्स 2015 में खत्म कर दिया गया था। स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों के अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी खजाने को लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। पुरानी आयकर व्यवस्था के तहत आने वाले लोग 37 प्रतिशत की दर से सरचार्ज देते हैं

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jan 11, 2026 पर 4:09 PM
Budget 2026: सुपर रिच पर न बढ़े इनकम टैक्स सरचार्ज, कम कर वाले देशों में बसने का बढ़ सकता है जोखिम
Budget 2026: इस समय देश में 50 लाख रुपये से अधिक आय वाले व्यक्तियों पर इनकम टैक्स सरचार्ज लागू है।

टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार को आगामी बजट 2026-27 में अत्यधिक-धनी लोगों यानि कि सुपर रिच पर इनकम टैक्स सरचार्ज बढ़ाने और वेल्थ टैक्स को फिर से शुरू करने से बचना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरचार्ज बढ़ा या वेल्थ टैक्स लगा तो यह कदम उच्च आय वर्ग के लोगों को कम टैक्स वाले देशों में बसने के लिए प्रेरित कर सकता है। इस समय देश में 50 लाख रुपये से अधिक आय वाले व्यक्तियों पर इनकम टैक्स सरचार्ज लागू है। 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत, एक करोड़ से दो करोड़ रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत और दो करोड़ से पांच करोड़ रुपये तक की आय पर 25 प्रतिशत सरचार्ज लगता है।

5 करोड़ रुपये से अधिक कमाने वाले और नई आयकर व्यवस्था चुनने वाले लोग 25 प्रतिशत सरचार्ज देते हैं। पुरानी आयकर व्यवस्था के तहत आने वाले लोग 37 प्रतिशत की दर से सरचार्ज देते हैं। स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों के अनुमान के अनुसार, GST रेट में कटौती और कम इनकम टैक्स कलेक्शन से चालू वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी खजाने को लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। वित्त वर्ष 2026-27 में रेवेन्यू का कोई भी अतिरिक्त स्रोत सरकार को रक्षा और अन्य क्षेत्रों में अधिक एलोकेशन में मदद कर सकता है।

जितनी ज्यादा कमाई, उतना ज्यादा टैक्स

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पीडब्ल्यूसी एंड कंपनी एलएलपी के पार्टनर अमित राणा का कहना है कि आयकर लगाने में 'वर्टिकल इक्विटी' के सिद्धांत का पालन किया जाता है। इसका अर्थ है कि जो जितना अधिक कमाता है, उसकी टैक्स देनदारी उतनी ही अधिक होनी चाहिए। आगे कहा कि जब आप टैक्स को बहुत अधिक बनाना शुरू कर देते हैं, तो आप उन उच्च आय वाले लोगों को खोने का जोखिम उठाते हैं, जो भारत में नहीं रहना चाहेंगे। और आज की दुनिया में यह संभव है। उच्च आय वाले व्यक्तियों पर टैक्सेशन सावधानीपूर्वक संतुलित होना चाहिए, क्योंकि वे ही इंडस्ट्री और रोजगार पैदा करते हैं।

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