Budget 2026: निर्मला सीतारमण के बजट में टैक्सपेयर्स को मिल सकती है कौन-कौन सी राहत?

Union Budget 2026: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को 9वीं बार यूनियन बजट पेश करेंगी। पिछले साल उन्होंने यूनियन बजट में सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री करने का ऐलान किया था। इससे टैक्सपेयर्स इस बार भी बड़ी राहत की उम्मीद कर रहे हैं

अपडेटेड Jan 21, 2026 पर 6:34 PM
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Budget 2026 : बजट में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बूस्ट मिल सकता है। IT मंत्रालय ने स्कीम के लिए आवंटन बढाने की मांग की है। इसको ध्यान में रखते हुए स्कीम के लिए आवंटित राशि दोगुनी हो सकती है

यूनियन बजट 2026 पेश होने में कुछ हफ्तों का समय बचा है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अगले वित्त वर्ष का बजट पेश करेंगी। वित्तमंत्री ने अपने करीब हर बजट में टैक्सपेयर्स को कुछ न कुछ दिया है। खासकर उनका फोकस इनकम टैक्स की नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने पर रहा है। नई रीजीम की शुरूआत उन्होंने ही साल 2020 में की थी। यूनियन बजट 2025 में उन्होंने नई रीजीम में टैक्स एग्जेम्प्शन की लिमिट बढ़ाई थी। नई रीजीम के टैक्स स्लैब में बदलाव किया था। लेकिन, सबसे बड़ा ऐलान सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स-फ्री करना था।

टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को आसान बनाने पर होगा फोकस

टैक्सपेयर्स को 1 फरवरी को पेश होने वाले Union Budget से कई उम्मीदें हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार पिछले साल की तरह कोई बड़ा ऐलान नहीं होगा। लेकिन, सरकार का फोकस टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को आसान बनाने, कंप्लायंस बढ़ाने और कम इनकम वाले टैक्सपेयर्स को राहत देने पर हो सकता है। देश की कुल आबादी को देखते हुए अब भी रिटर्न फाइल करने वाले लोगों की संख्या काफी कम है। सरकार का फोकस इसे बढ़ाने पर है।


इनकम टैक्स एक्ट, 2025 इस साल होगा लागू

इस साल 1 अप्रैल से इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होने जा रहा है। यह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि नए इनकम टैक्स एक्ट का फोकस टैक्स के नियमों में बुनियादी बदलाव करने पर नहीं है। इसका फोकस सिर्फ इनकम टैक्स के नियमों की लैंग्वेज को आसान बनाने पर है। इससे उस व्यक्ति को भी टैक्स के नियम आसानी से समझ में आएंगे, जिन्हें टैक्स के मामलों की ज्यादा समझ नहीं है। अभी ज्यादातर लोगों को टैक्स के नियमों को समझने में दिक्कत होती है।

क्रिप्टोकरेंसी के टैक्स के नियमों में हो सकता है बदलाव

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी को लेकर टैक्स के व्यापक नियम पेश कर सकती है। सरकार ने यूनियन बजट 2022 में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) पर टैक्स लगाने का ऐलान किया था। क्रिप्टो से हुए मुनाफे पर एकसमान 30 फीसदी टैक्स लगाया गया था। इसके अलावा क्रिप्टो से जुड़े ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी टीडीएस लगाया गया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये नियम नाकाफी हैं। क्रिप्टो से हुए गेंस पर 30 फीसदी टैक्स लगता है, जो दूसरे एसेट्स से ज्यादा है। म्यूचु्अल फंड्स की इक्विटी स्कीम और लिस्टेड शेयरों के शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स 20 फीसदी और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 12.5 फीसदी है। क्रिप्टो इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार को इस असमानता को दूर करना चाहिए।

होम लोन पर बढ़ सकता है टैक्स बेनेफिट्स

टैक्सपेयर्स होम लोन पर टैक्स बेनेफिट्स बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। अभी होम लोन के इंटरेस्ट पेमेंट पर 2 लाख रुपये तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। होम लोन के प्रिंसिपल पर भी डिडक्शन की इजाजत है। लेकिन, यह डिडक्शन सेक्शन 80सी के तहत मिलता है। इस सेक्शन के तहत करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट ऑप्शंस आते हैं। इसलिए होम लोन के प्रिंसिपल पर डिडक्शन क्लेम करने की गुंजाइश नहीं बचती है। टैक्सपेयर्स की मांग है कि सरकार को सेक्शन 24बी के तहत इंटरेस्ट पर मिलने वाले 2 लाख रुपये तक के डिडक्शन को बढ़ाया जाए। प्रिंसिपल पर अलग से डिडक्शन करने की इजाजत दी जाए। होम लोन पर टैक्स बेनेफिट्स सिर्फ इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में मिलते है।

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नई रीजीम में भी हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर डिडक्शन

इनकम टैक्स की नई रीजीम के टैक्सपेयर्स कम से कम टर्म लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन चाहते हैं। उनका मानना है कि जिस तरह से इलाज का खर्च बढ़ रहा है, उसे देखते हुए हेल्थ पॉलिसी जरूरी हो गई है। टर्म लाइफ इंश्योरेंस भी जरूरी है। इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन की इजाजत है। लेकिन, नई रीजीम में इसकी इजाजत नहीं है। टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि सरकार इस बार बजट में नई रीजीम में भी दोनों डिडक्शन की इजाजत दे सकती है। पॉलिसीबाजार के डायरेक्टर (बिजनेस) सज्जा प्रवीण चौधरी ने कहा कि इंश्योरेंस इंडस्ट्री को बजट में बड़े रिफॉर्म्स की उम्मीद है। सरकार एमएसएमई को हेल्थ इंश्योरेंस और दूसरे इंश्योरेंस पर जीएसटी में राहत दे सकती है।

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