Budget 2026: होम लोन ब्याज की छूट होगी 5 लाख रुपये! सरकार देगी होमबायर्स को राहत?

Budget 2026: क्या सरकार बजट में होम लोन ब्याज पर मिलने वाली छूट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करेगी? घर खरीदने के लिए ज्यादातर लोग होम लोन लेते हैं। ऐसे समय में जब घरों की कीमतें आसमान छूने लगी है

अपडेटेड Jan 27, 2026 पर 1:57 PM
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Budget 2026: क्या सरकार बजट में होम लोन ब्याज पर मिलने वाली छूट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करेगी?

Budget 2026: क्या सरकार बजट में होम लोन ब्याज पर मिलने वाली छूट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करेगी? घर खरीदने के लिए ज्यादातर लोग होम लोन लेते हैं। ऐसे समय में जब घरों की कीमतें आसमान छूने लगी है। मिडिल क्लास परिवार के लिए भी घर खरीदने के लिए होम लोन का अमाउंट पहले से कहीं ज्यादा हो गया है। ऐसे में क्या सरकार ब्याज के तहत मिलने वाली छूट को बढ़ाएगी। ताकि, होमबायर्स की राहत मिले और रियल एस्टेट सेक्टर में भी बूस्ट आए?

हाउसिंग सेक्टर को रफ्तार देने वाला हो बजट

केंद्रीय बजट 2026 अब बस कुछ ही दिनों दूर है और इसे लेकर रियल एस्टेट सेक्टर में उम्मीदें तेज हो गई हैं। खासतौर पर डेवलपर्स और होमबायर्स की नजर सरकार के उन फैसलों पर है, जो घर खरीदना आसान बना सकते हैं। रियल एस्टेट से जुड़े प्रमुख संगठनों का मानना है कि अगर बजट में सही कदम उठाए गए, तो इससे हाउसिंग सेक्टर को नई रफ्तार मिल सकती है।


होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट बढ़ाई जाए

डेवलपर्स संगठनों ने सरकार से सबसे अहम मांग होम लोन पर ब्याज में मिलने वाली टैक्स छूट को लेकर की है। अभी इनकम टैक्स कानून के तहत होम लोन के ब्याज पर अधिकतम 2 लाख रुपये तक की ही कटौती मिलती है। संगठनों का कहना है कि मौजूदा समय में घरों की कीमतें और ब्याज दरें दोनों बढ़ चुकी हैं। ऐसे में यह लिमिट बहुत कम पड़ती है। इसलिए इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए, ताकि मध्यम वर्ग को घर खरीदने में राहत मिल सके और रियल एस्टेट की मांग को भी मजबूती मिले।

बदली जाए अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा

अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। अभी सरकार 45 लाख रुपये तक के घरों को ही अफोर्डेबल मानती है। डेवलपर्स का कहना है कि यह लिमिट कई साल पहले तय की गई थी और तब से कंस्ट्रक्शन कॉस्ट, जमीन के दाम और कच्चे माल की कीमतों में काफी इजाफा हो चुका है। बड़े शहरों और महानगरों में 45 लाख रुपये में एक ठीक-ठाक दो कमरों का घर मिलना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में अफोर्डेबल हाउसिंग की कीमत लिमिट में बदलाव जरूरी है, ताकि इस सेगमेंट को सही मायनों में बढ़ावा मिल सके।

यहां बढ़े स्टैंडर्ड डिडक्शन

रेंटल इनकम पर मिलने वाले स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी बढ़ाने की मांग की गई है। फिलहाल किराये से होने वाली आय पर रिपेयर और मेंटेनेंस के नाम पर 30 फीसदी की कटौती मिलती है। इसे बढ़ाकर 50 फीसदी करने का सुझाव दिया गया है। डेवलपर्स का कहना है कि इससे रेंटल हाउसिंग में निवेश आकर्षक बनेगा और ज्यादा लोग किराये के मकान खरीदने के लिए आगे आएंगे।

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