Budget 2026 Gold Price: मोदी राज में आखिर कितनी बढ़ी है सोने की चमक?

Budget 2026 Gold Price: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार मई 2014 के आखिर में प्रधानमंत्री बने थे। तब सोने की कीमत 27,000-28,000 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इस साल 30 जनवरी को एमसीएक्स पर गोल्ड का भाव 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इसका मतलब है कि तब से अब तक सोने की कीमत 432 फीसदी बढ़ी है

अपडेटेड Jan 31, 2026 पर 5:21 PM
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इंडिया में गोल्ड की ज्यादा मांग की सबसे बड़ी वजह गोल्ड ज्वेलरी में लोगों की दिलचस्पी है।

सोने के लिए 30 जनवरी की तारीख खास रही। देश और विदेश में सोने में बड़ी गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 4,900 डॉलर प्रति औंस के नीचे चला गया। यह 9 फीसदी से ज्यादा गिरावट है। इधर, भारत में गोल्ड फ्यूचर्स 12 फीसदी गिरकर 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे गोल्ड के निवेशक निराश हैं। लेकिन, यह नहीं भूलना चाहिए कि पिछले कुछ सालों में गोल्ड में जबर्दस्त तेजी दिखी है। सवाल है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से लेकर अब तक गोल्ड का प्रदर्शन कैसा रहा है?

पिछले 11.5 सालों में चार गुनी से ज्यादा हुई सोने की कीमत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार मई 2014 के आखिर में प्रधानमंत्री बने थे। तब सोने की कीमत 27,000-28,000 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इस साल 30 जनवरी को एमसीएक्स पर गोल्ड का भाव 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इसका मतलब है कि तब से अब तक सोने की कीमत 432 फीसदी बढ़ी है। मोदी सरकार के 11.5 सालों में सोने ने जबर्दस्त रिटर्न दिया है। खासकर पिछले कुछ सालों में इसमें बड़ी तेजी देखने को मिली है।


बीते 5 सालों में ज्यादातर सालों में सोने का पॉजिटिव रिटर्न

2021 में गोल्ड की कीमतों में थोड़ा करेक्शन दिखा था। यह करीब 3.6 से 4 फीसदी तक गिरा था। 2022 में गोल्ड की कीमत 52,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार हो गई। इसका रिटर्न 8 फीसदी से ज्यादा रहा। 2023 में गोल्ड का रिटर्न करीब 15 फीसदी रहा। 2024 में गोल्ड ने 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया। लेकिन, सबसे ज्यादा रिटर्न 2025 में रहा। पिछले साल गोल्ड ने निवेशकों को 70 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया। इसमें वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल और जियोपॉलिटिकल टेंशन का बड़ा हाथ है।

भारत सोने की खपत के मामले मे दुनिया में पहले नबर पर

भारत दुनिया में गोल्ड का दूसरा सबसे बड़ा कंज्यूमर देश है। भारत गोल्ड की अपनी जरूरत का ज्यादातर हिस्सा आयात से पूरा करता है। सरकार का फोकस गोल्ड के आयात को कंट्रोल में रखने पर रहा है। इसकी वजह यह है कि गोल्ड का आयात बढ़ने का सीधा असर ट्रेड डिफिसिट पर पड़ता है। इससे रुयये पर भी दबाव बढ़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपया पहले से ही दबाव में है। गोल्ड का आयात बढ़ने से रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है।

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2025 की शुरुआत से सोने की कीमत 98 फीसदी चढ़ी 

इंडिया में गोल्ड की ज्यादा मांग की सबसे बड़ी वजह गोल्ड ज्वेलरी में लोगों की दिलचस्पी है। भारत में गोल्ड ज्वेलरी लोगों की जिंदगी से काफी करीब से जुड़ी है। शादी-विवाहो में गोल्ड ज्लेवरी खरीदने और उपहार में देने की परंपरा रही है। 2023 में गोल्ड की भारत में कुल डिमांड में ज्वेलरी की तीन-चौथाई हिस्सेदारी थी। 2025 की शुरुआत से इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड की कीमतें 98 फीसदी चढ़ गई हैं। कीमतों में तेजी की वजह से गोल्ड ईटीएफ जैसे प्रोडक्ट्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

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