Budget 2026: टैक्सपेयर्स को यूनियन बजट में मिलेगी खुशखबरी, ये बड़े ऐलान करेंगी निर्मला सीतारमण

एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतामरण का ज्यादा फोकस इनकम टैक्स की नई रीजीम पर है। इसका ऐलान उन्होंने 2020 के यूनियन बजट में किया था। शुरुआत में इसमें टैक्सपेयर्स ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। फिर इसका अट्रैक्शन बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने कई ऐलान किए

अपडेटेड Feb 01, 2026 पर 8:28 AM
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Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने में थोड़ा ही समय बचा है।

यूनियन बजट 2026 में सरकार टैक्सपेयर्स खासकर मिडिल क्लास लोगों के लिए कुछ बड़े ऐलान कर सकती हैं। पिछले साल यूनियन बजट में सरकार ने टैक्सपेयर्स को बड़ा तोहफा दिया था। उन्होंने 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी थी। नौकरी करने वाले लोगों को तो अब सालाना 12.5 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं रह गई है। इससे टैक्सपेयर्स को काफी राहत मिली है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतामरण का ज्यादा फोकस इनकम टैक्स की नई रीजीम पर है। इसका ऐलान उन्होंने 2020 के यूनियन बजट में किया था। शुरुआत में इसमें टैक्सपेयर्स ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। फिर इसका अट्रैक्शन बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने कई ऐलान किए। 2023 में उन्होंने इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन देने का ऐलान किया। पिछले साल बजट में 12 लाख रुपये तक की इनकम नई रीजीम में टैक्स-फ्री कर दी गई। इसमें टैक्स के रेट्स कम हैं। लेकिन ज्यादातर डिडक्शंस नहीं मिलते हैं।

क्या नई रीजीम में बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ेगी?


इनकम टैक्स की नई रीजीम में बेसिक टैक्स एग्जेम्प्शन लिमिट 4,00,000 लाख रुपये है। इसका मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 4 लाख रुपये तक है तो उसे टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार इस लिमिट को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर सकती है। इससे टैक्सपेयर्स को काफी फायदा होगा। खासकर कम इनकम वाले लोगों को इससे राहत मिलेगी। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले 70 फीसदी से ज्यादा इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स ने नई रीजीम का इस्तेमाल किया।

क्या इक्विटी एमएफ पर टैक्स-फ्री एलटीसीजी की लिमिट बढे़गी?

सरकार ने यूनियन बजट 2024 में स्टॉक्स और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस की टैक्स-फ्री लिमिट बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे अब बढ़ाने की जरूरत है। इससे शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि के निवेश में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी। सरकार 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इस लिमिट को बढ़ाकर 2 लाख रुपये तक कर सकती है।

क्रिप्टोकरेंसी इनवेस्टर्स को क्या टैक्स में मिलेगी राहत?

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण क्रिप्टोकरेंसी इनवेस्टर्स के लिए इस बार बड़ा ऐलान कर सकती हैं। क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री ने सरकार को अपनी मांगों के बारे में बताया है। सरकार ने यूनियन बजट 2022 में क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स लगाने का ऐलान किया था। क्रिप्टोकरेंसी पर दो तरह से टैक्स लगाया गया था। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (वीडीए) से जुड़े ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी टीडीएस लगाया गया था। दूसरा, क्रिप्टोकरेंसी से हुए मुनाफे पर एक समान 30 फीसदी का टैक्स लगाया गया था। क्रिप्टो इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार इस बार बजट में क्रिप्टो इनवेस्टर्स को टैक्स में राहत देगी।

नई रीजीम में भी टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन मिलेगा?

टैक्स एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि सरकार इनकम टैक्स की नई रीजीम में भी टर्म लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम पर डिडक्शन की इजाजत देगी। अभी इनकम टैक्स की सिर्फ पुरानी रीजीम में दोनों पर डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत है। सेक्शन 80सी के तहत टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ पॉलिसी पर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। लेकिन, ऐसा सिर्फ ओल्ड रीजीम में किया जा सकता है।

डेट म्यूचुअल फंड इनवेस्टर्स को टैक्स में मिलेगी राहत?

यूनियन बजट 2026 में सरकार डेट म्यूचुअल फंड के टैक्स नियमों में बदलाव कर सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 1 अप्रैल, 2023 से डेट म्यूचुअल फंड्स पर टैक्स के नए नियम लागू हो गए। अब डेट म्यूचुअल फंड की यूनिट्स बेचने से हुए कैपिटल गेंस को सिर्फ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस माना जाता है। इस पर इनवेस्टर के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इससे डेट फंड्स से मिलने वाले रिटर्न में कमी आई है। ज्यादा सालाना इनकम वाले लोगों को डेट फंड्स के गेंस पर ज्यादा टैक्स देना पड़ता है। इससे इस फंड में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी भी घटी है। सरकार यूनियन बजट में डेट फंड्स के इनवेस्टर्स को टैक्स में राहत दे सकती है।

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