कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बीते दशकों में बड़े बदलाव हुए हैं। पहले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी टैक्स लगता था। 2004 में सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) की शुरुआत के साथ कैपिटल गेंस टैक्स के नियम बदल गए। लिस्टेड कंपनियों के शेयर्स और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स जिनपर एसटीटी चुकाया गया है, उन्हें लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स से छूट दे दी गई।
2018 में दोबारा एलटीसीजी की शुरुआत
दोबारा 2018 में लिस्टेड कंपनियों के शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के लिए एलटीसीजी टैक्स शुरू किया गया। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 112ए के तहत 1,00,000 रुपये से ज्यादा एलटीसीजी पर 10 फीसदी टैक्स लगाया गया। 31 जनवरी, 2018 तक हुए गेंस को ग्रैंडफादरिंग का प्रोटेक्शन मिला।
2024 में एलटीसीजी के नियमों में बड़े बदलाव
सरकार ने यूनियन बजट 2024 में कैपिटल गेंस के नियमों में बड़े बदलाव किए। लिस्टेड कंपनियों के शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर एलटीसीजी टैक्स 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया। अनलिस्टेड शेयरों के एलटीसजी पर भी टैक्स 20 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया। लेकिन, सरकार ने इंडेक्सेशन बेनेफिट को खत्म कर दिया। अचल संपति (Immovable Property) पर भी एलटीसीजी टैक्स को 20 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया। इस पर भी इंडेक्सेशन बेनेफिट खत्म कर दिया गया।
23 जुलाई, 2024 से पहले की प्रॉपर्टी पर इंडेक्सेशन
सरकार ने हालांकि, 23 जुलाई, 2024 से पहले खरीदी गई प्रॉपर्टी पर इंडेक्सेशन बेनेफिट का विकल्प बनाए रखा। ऐसी प्रॉपर्टीज पर इंडेक्सेशन के साथ एलटीसीजी टैक्स 20 फीसदी बनाए रखा गया। बगैर इंडेक्सेशन 12.5 फीसदी टैक्स रेट का नया विकल्प भी दिया गया। सरकार का मकसद कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों को आसान बनाना था। लंबे समय से कैपिटल गेंस टैक्स के अलग-अलग रेट्स की जगह सिंगल रेट की मांग हो रही थी।
अब भी कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में असमानता
अब भी कैपिटल गेंस टैक्स के लिए अलग-अलग एसेट्स के होल्डिंग पीरियड अलग-अलग हैं। यूनियन बजट में सरकार यह फर्क दूर करने के लिए कदम उठा सकती है। लिस्टेड कंपनियों के शेयरों को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस लागू होता है, जबकि अनलिस्टेड कंपनियों के शेयरों के लिए यह पीरियड 24 महीना है। अगर यह फर्क खत्म कर दिया जाए तो इससे टैक्सपेयर्स को काफी आसानी होगी।
अब एसटीटी बनाए रखने की जरूरत नहीं
सरकार ने शेयरों पर एलटीसीजी टैक्स के विकल्प के रूप में एसटीटी की शुरुआत की थी। 2018 में दोबारा एलटीसीजी लागू करने के बाद एसटीटी को बनाए रखने की जरूरत नहीं रह गई है। एसटीटी घटाने या धीरे-धीरे इसे खत्म करने से स्टॉक मार्केट्स में लिक्विडिटी बढ़ेगी। अभी इनवेस्टर्स को एसटीटी और एलटीसीजी टैक्स दोनों चुकाना पड़ता है।
डेट फंड और इक्विटी फंड के लिए अलग-अलग नियम
अभी म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीमों के टैक्स के नियम फेवरेबल हैं। एलटीसीजी के लिए होल्डिंग पीरियड 12 महीने है। 1.25 लाख रुपये तक के एलटीसीजी पर टैक्स नहीं लगता है। लेकिन, डेट फंड्स पर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि डेट फंड्स को कितने समय बाद बेचा जाता है। इसका मतलब है कि डेट फंड्स पर एलटीसीजी बेनेफिट खत्म हो गया है। टैक्स के नियमों में इस फर्क को दूर करने की जरूरत है।
अमित जैन-पार्टनर, डेलॉयट इंडिया