यूनियन बजट 2026 से इंश्योरेंस सेक्टर को कई उम्मीदें हैं। इंडस्ट्री ज्यादा टैक्स डिडक्शंस, इनकम टैक्स की दोनों रीजीम में हेल्थ और लाइफ पॉलिसीज पर टैक्स बेनेफिट्स और जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) मसले का हल चाहती है। इंश्योरेंस इंडस्ट्री का मानना है कि इससे लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसीज में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी।
सिर्फ पुरानी रीजीम में इंश्योरेंस पर डिडक्शन
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी के तहत अभी इनकम टैक्स की सिर्फ पुरानी रीजीम में हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन मिलता है। 60 साल से कम उम्र का व्यक्ति खुद और परिवार के लिए हेल्थ पॉलिसी खरीदकर 25,000 रुपये का डिडक्शन क्लेम कर सकता है। सीनियर सिटीजंस के लिए हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम पर 50,000 रुपये डिडक्शंस की इजाजत है।
डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने का हो सकता है ऐलान
IFFCO-TOKIO जनरल इंश्योरेंस के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ सुब्रत मंडल ने कहा कि अभी हेल्थ पॉलिसी और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज पर मिलने वाला डिडक्शंस इनफ्लेशन को देखते हुए पर्याप्त नहीं रह गया है। उन्होंने कहा, "अगर डिडक्शन बढ़ाकर दोगुना कर दिया जाता है तो परिवारों की दिलचस्पी अपने लिए पर्याप्त कवर वाली पॉलिसी खरीदने में बढ़ेगी। इससे लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल सिक्योरिटी बढ़ेगी।" सरकार Union Budget 2026 में डिडक्शन बढ़ाने का ऐलान कर सकती है।
नई रीजीम में भी इंश्योरेंस पर मिल सकता है डिडक्शन
टैक्स एनालिस्ट्स का कहना है कि इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर डिडक्शन की इजाजत इनकम टैक्स की नई रीजीम के टैक्सपेयर्स को भी मिलनी चाहिए। बी शंकर एडवोकेट्स के मैनेजिंग पार्नर एस शंकर ने कहा, "नई टैक्स रीजीम में भी डिडक्शन का फायदा देने से जरूरी हेल्थ कवरेज तक लोगों की पहुंच बढ़ाने में नई रीजीम बाधा नहीं बनेगी।" ध्यान में रखना जरूरी है कि इनकम टैक्स की नई रीजीम में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर डिडक्शन नहीं मिलता है।
सेक्शन 80सी के तहत लाइफ इंश्योरेंस पर डिडक्शन
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत कई इनवेस्टमेंट ऑप्शंस आते हैं। इनमें निवेश कर एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। इनमें लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी शामिल है। इसके अलावा सेक्शन 10(10डी) पर मैच्योरिटी पर मिलने वाले पैसे पर टैक्स नहीं लगता है। लेकिन, यह टैक्स बेनेफिट्स इनकम टैक्स की सिर्फ पुरानी रीजीम में मिलते हैं।
इंश्योरेंस इंडस्ट्री आईटीसी मसले का समाधान चाहती है
इंश्योरेंस इंडस्ट्री जीएसटी पर आईटीसी के मसले का भी समाधान चाहती है। आईटीसी के तहत बिजनेसेज को पर्चेजेज पर चुकाए गए टैक्स को ऑफसेट करने की इजाजत है। उनका कहना है कि आईटीसी उपलब्ध नहीं होने से उनकी कॉस्ट बढ़ जाती है, जिसका असर पॉलिसीज के प्रॉफिट पर पड़ता है। रिटेल लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस को जीएसटी से छूट देने से पॉलिसीहोल्डर्स को फायदा हुआ है, लेकिन बीमा कंपनियां डिस्ट्रिब्यूशन, कस्टमर सपोर्ट और टेक्नोलॉजी जैसी सर्विसेज पर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम नहीं कर पा रही है।